कोलकाता: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। अमित शाह की मौजूदगी में कोलकाता में भाजपा विधायक दल की शुक्रवार को हुई बैठक में उन्हें नेता चुना गया। बैठक के बाद अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया। अधिकारी शनिवार (9 मई) को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कल का दिन रवींद्र जयंती होने की वजह से भी खास है। बंगाल में पहली बार भाजपा सत्ता पर काबिज होने जा रही है। इससे पहले गुरुवार को बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के बीच विधानसभा भंग कर दी थी। लोकभवन से इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था।
बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए थे। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीट हैं। इसमें से एक सीट फालता पर 21 मई को दोबारा मतदान होना है। इसके नतीजे 24 मई को आएंगे। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए 207 सीटें जीती हैं, जबकि 15 साल से राज कर रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट कर रह गई।
पश्चिम बंगाल में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए अमित शाह ने शुक्रवार को हुई बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘मैं पश्चिम बंगाल भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में शुभेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा करता हूं।’ उन्होंने बताया कि 8 प्रस्ताव और समर्थन मिले हैं, सभी में एक ही नाम मिला है।
कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ
अधिकारी शनिवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित एनडीए के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है। कभी तृणमूल में ममता के करीबी माने जाने वाले शुभेंदु 2021 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा में शामिल हुए थे। इस बार शुभेंदु ने ममता बनर्जी को भबानीपुर से 15 हजार से अधिक वोटों से हराया है। साथ ही वे नंदीग्राम से भी लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे। नंदीग्राम से उन्होंने 2021 में भी जीत हासिल की थी और तब उन्होंने इस सीट पर ममता को मात दी थी।
56 साल के शुभेंदु अधिकारी के पास बंगाल की राजनीति की गहरी समझ मानी जाती है। वे लंबे समय तक ममता बनर्जी के साथ रहे। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में भी उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाम मोर्चा की सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। हालांकि, 2021 के चुनाव से कुछ महीने पहले दिसंबर-2020 में वे भाजपा में शामिल हो गए। इसके पीछे की वजह ममता बनर्जी से उनकी नाराजगी बताई जाती है।
पिता और भाई का भई रहा है राजनीति से नाता
शुभेंदु एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी राजनीति में रहे हैं। वे कांग्रेस और बाद में टीएमसी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनके भाई भी सक्रिय राजनीति में हैं, जिससे पूर्वी मिदनापुर में इस परिवार का व्यापक प्रभाव बना हुआ है।
अधिकारी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक के तौर पर उभरे हैं। 2021 से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव राज्य की सबसे चर्चित लड़ाइयों में शामिल है। पूर्वी मेदिनीपुर जिले में अधिकारी की मजबूत पकड़ और संगठन क्षमता सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
वे उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने और चुनावी समीकरण साधने में माहिर हैं। अधिकारी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया। कांथी पीके कॉलेज से स्नातक अधिकारी ने 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की।
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