कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) में 15 साल से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है। भाजपा ने 206 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की। वहीं, टीएमसी मात्र 80 सीट पर सिमट कर रह गई। नतीजों में ममता बनर्जी समेत मंत्रिमंडल के आधे से अधिक मंत्री हार गए।
इन चुनावों में 35 मंत्रियों ने चुनाव लड़ा था जिनमें से 22 की हार हुई। इस हिसाब से राज्य मंत्रिमंडल के लगभग 63 फीसदी मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनावी मैदान में थी। उन्हें भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने मात दी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले जबकि ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले।
West Bengal में ममता समेत 22 मंत्री हारे
4 मई को पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा में 293 सीटों के लिए नतीजे घोषित किए गए। जबकि फाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा चुनाव होंगे। ममता के अलावा आवास एवं विद्युत मंत्री अरूप विस्वास भी अपनी सीट से चुनाव हार गए। इसी तरह दमदम सीट से उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के मंत्री भी चुनाव में हार गए। दमदम उत्तर सीट से पर्यावरण और वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को भी हार का सामना करना पड़ा।

उद्योग, वाणिज्य और उद्यम मंत्री शशि पांजा को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अग्नि एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस भी अपनी सीट बचाने में असफल रहे। तकनीकी शिक्षा मंत्री और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास मंत्री इंद्रनील सेन भी हारे। अन्य मंत्रियों, जो चुनाव में हारे उनमें कृषि विपणन मंत्री बेचाराम मन्ना, पशु संसाधन विकास मंत्री स्वपन देबनाथ, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बुलु चिक बरैक, सहकारी और पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप के मजूमदार को भी हार का सामना करना पड़ा।
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भाजपा की बड़ी जीत
अन्य मंत्रियों में बीरबाभा हसंदा, मानस रंजन भूनिया, मोलोय घटक, सिद्दीकुल्ला चौधरी, उदयन गुहा, संध्यारानी टुडु, बंकिम चंद्र हाजरा, उज्जल बिस्वास, स्नेहाशीष चक्रवर्ती, श्रीकांत महतो, सत्यजीत बर्मन शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल विधनसभा चुनावों के नतीजों में कांग्रेस को मात्र 2 सीटें ही मिली हैं। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) को भी एक सीट पर जीत मिली है। हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी को 2 सीटों पर जीत मिली है। इन दोनों ही सीटों पर हुमायूं कबीर ही चुनावी मैदान में थे।
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ऐसे में राज्य में भाजपा की सरकार आ गई है और 15 साल पुराना ममता का किला ढह गया है। ममता साल 2011 में राज्य की मुख्यमंत्री बनी थी। तब उन्होंने तीन दशक से भी पुराने वाम किले को ध्वस्त कर राज्य में अपनी पैठ बनाई थी। ममता और टीएमसी के लिए यह एक बड़ी हार है। भाजपा जहां 2021 विधानसभा चुनाव में मात्र 77 सीटों पर जीत पाई थी। इस बार के चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इससे पहले 2016 विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास सिर्फ 3 सीटें ही थी।

