Tuesday, April 28, 2026
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बंगाल में किसके सिर होगा जीत का ताज? दूसरे चरण का मतदान क्यों है निर्णायक

दूसरे चरण में कई महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल सीटों पर चुनाव होंगे। जिनमें भबानीपुर भी शामिल है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को चुनौती दे रही हैं।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हुआ। इसमें अब तक का सबसे अधिक मतदान (लगभग 92.9%) दर्ज किया गया। अब सभी की निगाहें 29 अप्रैल (बुधवार) को होने वाले दूसरे और अंतिम चरण के मतदान पर हैं। इस आखिरी चरण में 142 सीटों पर मतदान है। ये इलाके कोलकाता जिले और दक्षिण बंगाल के हैं। ये 142 सीटें इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि बंगाल में लंबे समय से दिखाई दे रही बदलाव की लहर पर मुहर लग गई है। पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही दूसरे चरण की सीटों पर भी प्रचार में जुटे रहे। यह एक तरह से भाजपा की दक्षिण बंगाल में टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश है। भाजपा को 2021 के चुनावों में 77 सीटें मिली थी और दमदार प्रदर्शन के दम पर पार्टी पहली बार राज्य में प्रमुख विपक्षी दल बनी थी। इस बार पार्टी की कोशिश 2021 की सीटों से कहीं आगे निकलने की है।

दूसरे चरण में किन सीटों पर मतदान?

दूसरे चरण में कई महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल सीटों पर चुनाव होंगे। जिनमें भबानीपुर भी शामिल है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को चुनौती दे रही हैं।

इसके अलावा दूसरे चरण में जिन सीटों पर मतदान होगा, उनमें कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, हावड़ा, नादिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और पूर्वी बर्धमान सहित आठ जिले शामिल हैं।

साल 2021 में भाजपा के तमाम प्रयासों के बावजूद, तृणमूल ने इन क्षेत्रों पर अपनी पकड़ बनाए रखी थी। भाजपा तब 142 में से केवल 18 सीटें ही जीत सकी थी, जबकि वामपंथी सहयोगी इंडियन सेकुलर फ्रंट ने एक सीट पर कब्जा जमाया था। तृणमूल ने इन 142 सीटों में से 123 सीटें अपने नाम की थी।

कोलकाता उत्तर और दक्षिण में मिलाकर 11 सीटें हैं, जबकि हावड़ा में 16, नादिया में 17, उत्तर 24 परगना में 33, दक्षिण 24 परगना में 31, हुगली में 18 और पूर्वी बर्धमान में 16 सीटें हैं।

अंतिम चरण में ममता बनर्जी, कोलकाता पोर्ट से कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, दमदम उत्तर से वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, श्यामपुकुर से वाणिज्य और उद्योग मंत्री शशि पांजा, टॉलीगंज से उर्जा मंत्री अरूप बिस्वास, दमदम से शिक्षा मंत्री ब्रात्या बसु और बिधाननगर से अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के राज्य मंत्री सुजीत बसु सहित कई अन्य प्रमुख टीएमसी नेताओं का भविष्य तय होगा।

दूसरी ओर भाजपा ने पनिहाटी से उस जूनियर डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिसके साथ अक्टूबर 2024 में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और फिर हत्या कर दी गई थी। भाजपा के दो वरिष्ठ नेता- पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता और अभिनेत्री-राजनेता रूपा गांगुली को दूसरे चरण में राशबेहारी और सोनरापुर दक्षिण से उम्मीदवार बनाया गया है।

दूसरे चरण की 142 सीटें क्यों अहम?

इसकी सबसे अहम वजह तो यही है कि ये तृणमूल के गढ़ माने जाते हैं। बंगाल में ममता की जीत की कहानी शुरू होने के बाद से ही इन सीटों पर तृणमूल का प्रदर्शन शानदार रहा है। पीएम मोदी ने जहां पहले चरण के मतदान को ‘भाजपा लहर’ का संकेत बताया है, वहीं तृणमूल के शीर्ष नेताओं ने भी रिकॉर्ड मतदान को अपने पक्ष में लहर के रूप में देखा है।

ममता ने हाल में कहा था, ‘क्या आप जानते हैं कि इतने सारे नाम हटाए जाने के बावजूद मतदान इतना अधिक क्यों हुआ? ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग जानते हैं कि यह चुनाव उनके अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। क्योंकि इसके बाद वे (भाजपा) राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करेंगे।’

जगतबल्लभपुर में एक रैली में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘मैं कोई राजनीतिक ज्योतिषी नहीं हूं। लेकिन जब भी मैंने राजनीतिक परिणामों के बारे में भविष्यवाणी की है, वह सही साबित हुई है। पहले चरण में हमने शतक बना लिया है। भाजपा खेमे में दहशत है। वे पत्रकारों को बुलाकर यह कहानी चलाने को कह रहे हैं कि भाजपा ने पहले चरण में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह तेजी से आगे बढ़ रही है।’

हालांकि, भाजपा को उम्मीद है कि अधिक मतदान और मतदाताओं के कुछ वर्गों में बढ़ी असंतुष्टि से उसे फायदा हो सकता है। इन 142 सीटों पर थोड़ा भी बेहतर प्रदर्शन उसकी कुल सीटों की संख्या में एक बड़ी वृद्धि कर सकता है। अगर भाजपा को महत्वपूर्ण बढ़त मिलती है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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