नई दिल्ली: अमेरिका से तनातनी को लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गहराते संकट के बीच ईरान ने शनिवार को फिर से इसे बंद कर दिया। इसके अलावा ऐसी भी खबरें आई कि उसकी नौसेना ने गुजरने वाले जहाजों पर गोलीबारी की, जिनमें से दो भारतीय ध्वज वाले विमानवाहक पोत थे। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने भारतीय जहाजों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने के विरोध में ईरानी राजदूत को तलब किया।
ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना द्वारा जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा के बाद शनिवार को भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा होर्मुज को फिर से बंद करने का फैसला अमेरिका द्वारा ईरान के शांति समझौते की शर्तों को मानने तक जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने से इनकार करने के जवाब में की गई है।
इससे एक दिन पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच अस्थायी युद्धविराम का हवाला देते हुए घोषणा की थी कि ‘युद्धविराम की शेष अवधि के लिए होर्मुज से सभी वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन पूरी तरह से खुला रहेगा।’
होर्मुज में फायरिंग की घटना
होर्मुज को लेकर उलझन की स्थिति के बीच जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार भारतीय ध्वज वाले कुछ जहाजों सहित कई व्यापारिक पोत जलडमरूमध्य को पार करने का प्रयास करने के बाद फारस की खाड़ी में वापस लौट गए। कम से कम एक टैंकर पर ईरानी गनबोटों ने गोलीबारी की, जिसके कारण उसे वापस मुड़ना पड़ा और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग को पार करने का प्रयास छोड़ना पड़ा।
साथ ही डेटा से पता चलता है कि भारतीय तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ सहित कुछ जहाज शनिवार को सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहे। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के स्वामित्व वाला ‘देश गरिमा’ मार्च की शुरुआत से अब तक जलडमरूमध्य को पार करने वाला दसवां भारतीय ध्वज वाला पोत है। समुद्री डेटा और खुफिया प्लेटफॉर्म ‘मरीनट्रैफिक’ के जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, शनिवार शाम तक यह ओमान की खाड़ी में था।
होर्मुज से गुजरने के बाद फारस की खाड़ी में अब भारत के ध्वज वाले 14 जहाज मौजूद हैं। मरीनट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार कम से कम चार भारतीय ध्वज वाले जहाज- तेल टैंकर सनमार हेराल्ड, देश वैभव और देश विभोर, और मालवाहक पोत जग अर्नव – होर्मुज पार करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन ईरान द्वारा चोकपॉइंट को फिर से बंद किए जाने की घोषणा के बाद वे वापस लौट गए।
‘देश वैभव’ और ‘देश विभोर’ सरकारी स्वामित्व वाली एससीआई कंपनी के हैं, जबकि ‘सनमार हेराल्ड’ चेन्नई स्थित सनमार शिपिंग कंपनी की है। वहीं, ‘जग अर्नव’ मुंबई स्थित ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के स्वामित्व में है।
इस बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ऑपरेशंस सेंटर ने क्षेत्र में जहाजों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि एक टैंकर ने सूचना दी है कि ओमान से 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में जलडमरूमध्य के जलक्षेत्र में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की दो गनबोटों ने उससे संपर्क किया और फिर उस पर गोलीबारी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘टैंकर और चालक दल सुरक्षित हैं। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।’ हालांकि, उस टैंकर की पहचान नहीं बताई गई है जिसने आईआरजीसी की ओर से हुई गोलीबारी की सूचना दी थी।
टैंकरट्रैकर्स डॉट कॉम ने बताया कि ईरान द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों को वापस लौटना पड़ा, जिनमें इराकी तेल ले जा रहा एक सुपरटैंकर भी शामिल था।
बताते चलें कि विदेशी मीडिया ने बाद में बताया कि भारत का झंडा लगे दो जहाजों पर गोलीबारी हुई थी। इसमें—‘जग अर्णव’ और ‘सन्मार हेराल्ड’—शामिल थे। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जग अर्णव’ पर फायरिंग की गई, जबकि दूसरा जहाज सुरक्षित रहा।
तेहरान के राजदूत तलब, विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?
इन घटनाक्रमों के बीच भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में दो भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग को लेकर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत का पक्ष रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत की ईरानी राजदूत से हुई बात का जिक्र किया। बयान में लिखा है-
‘नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को शनिवार शाम विदेश मंत्रालय ने विदेश सचिव के साथ एक बैठक के लिए बुलाया। इस बैठक के दौरान, विदेश सचिव ने होर्मुज स्ट्रेट में हुई गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त से अवगत कराया। इस फायरिंग की जद में भारत के झंडे वाले दो जहाज आए थे।’
बयान में आगे कहा गया है, ‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को कितना महत्व देता है, और याद दिलाया कि ईरान ने पहले भी भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद की थी। व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए, विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत के विचारों को ईरान के अधिकारियों तक पहुंचाए, और होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने वाले जहाजों को रास्ता देने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द फिर से शुरू करें। ईरान के राजदूत ने इन विचारों को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।’
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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