नई दिल्लीः लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक अल्पमत के चलते पारित नहीं हो सका है। लोकसभा ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को उस विधेयक को खारिज कर दिया जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी लाने और नई जनगणना कराए बिना परिसीमन (डीलिमिटेशन) करने का प्रावधान था।
मतदान में प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके पक्ष में 298 सदस्यों ने और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) को विधेयक पारित कराने के लिए 326 वोटों की आवश्यकता थी। कुल 528 सांसदों ने मतदान में भाग लिया।
महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में गिरा
इस विधेयक का उद्देश्य परिसीमन के लिए नई जनगणना की आवश्यकता को दरकिनार करना था। एक ऐसा प्रावधान जो विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है।
इसके बाद लोकसभा कल (18 अप्रैल) को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। किरण रिजिजू ने विधेयक को लोकसभा से वापस ले लिया है। यह घटनाक्रम संसद के 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले तीन दिवसीय विशेष सत्र के बीच हुआ है। इसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में संशोधनों पर विचार करने के लिए बुलाया गया था। इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था।
इस प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य साल 2029 तक आरक्षण लागू करना था। इसके साथ ही लोकसभा की सीटें 850 तक बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया था। यह लक्ष्य आम चुनावों से पहले पूरा करना था।
इस योजना के एक हिस्से के तहत डीलिमिटेशन अंतिम प्रकाशित जनगणना के आधार पर किया जाना है। विपक्ष ने इस आपत्ति जताई है। डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने संसद में संशोधनों का विरोध किया है और सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की है।
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राहुल- अखिलेश समेत इन नेताओं की प्रतिक्रिया
इस घटना पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने विधेयक को देश की चुनावी संरचना को बदलने का प्रयास बताया। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ” हमने लोकसभा में इस विधेयक को हरा दिया है। हमने हमेशा यही कहा है कि यह विधेयक महिलाओं के उत्थान के उद्देश्य से नहीं बल्कि देश की चुनावी संरचना को बदलने का प्रयास था। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महिला आरक्षण विधेयक 2023 को लागू करने का आग्रह करता हूं और पूरा विपक्ष इसमें आपकी मदद करेगा। “
राहुल के अलावा वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, सांसद इकरा हसन समेत पक्ष-विपक्ष के अन्य नेताओं की भी प्रतिक्रिया आई है।
भाजपा नेत्री और मंडी से सांसद कंगना रनौत की भी विधेयक पारित न होने पर प्रतिक्रिया आई है।
अमित शाह ने क्या कहा था?
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मैं इस देश की मातृशक्ति से कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस पार्टी ने जो प्रस्ताव रखा है, वह एक सुनियोजित जाल है, ताकि महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए।
इसलिए ये जो कहते हैं कि हमारे राज्यों को समान भार होना चाहिए, मैं सहमत हूं। महिला आरक्षण 2029 से पहले होना चाहिए। 2029 के बाद ले जाने के लिए इनके षड्यंत्र को हम सफल नहीं होने देंगे। मैं समझता हूं कि अगर ये वोट नहीं देंगे तो महिला आरक्षण बिल गिर जाएगा, लेकिन देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है।
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उन्होंने कहा कि मैं यहां संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं। भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इंडिया महागठबंधन वाले तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं और ये संविधान की बात करते हैं। कोई मुझे बता दे कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है।
भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है। इसके बावजूद तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित होकर इंडिया महागठबंधन मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग कर रहा है जबकि वे अपने इस रुख के समर्थन में संविधान का हवाला भी दे रहे हैं।
(आईएएनएस से इनपुट के साथ)

