तेहरानः पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार (15 अप्रैल) को तेहरान पहुंचा है। ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता के सिलसिले में पाकिस्तान की कोशिशें जारी हैं। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी शामिल हैं।
इससे पहले हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही थी।
असीम मुनीर के नेतृत्व में तेहरान पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
बयान में कहा गया कि “फील्ड मार्शल असीम मुनीर… और गृह मंत्री मोहसिन नकवी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ चल रहे मध्यस्थता प्रयासों के तहत तेहरान पहुंचे।” ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
मुनीर का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सऊदी अरब, कतर और तुर्की की आधिकारिक यात्राएं शुरू कीं। जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि पाकिस्तान में अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को वार्ता के अगले दौर से पहले आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरे दौर की वार्ता जल्द ही संभव!
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस्लामाबाद में “अगले दो दिनों में” ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। ट्रंप ने न्यू यॉर्क पोस्ट को बताया कि ” वास्तव में आपको वहां रहना चाहिए क्योंकि अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है और हम वार्ता के लिए आगे जाने के इच्छुक हैं। “
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, दूसरे दौर की वार्ता जल्द ही हो सकती है। इसके लिए पाकिस्तान तैयारियों में लगा हुआ है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज की सऊदी अरब और कतर की यात्राओं के बारे में कहा कि यह द्विपक्षीय संदर्भ में होंगी। इस दौरान वह दोनों देशों के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और चल रहे द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर चर्चा करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच बीतो दिनों पाकिस्तान में संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से प्रत्यक्ष वार्ता की थी।
लेकिन रविवार (12 अप्रैल) सुबह बिना किसी समझौते के वार्ता समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वार्ता में समझौता नहीं हो सका है। उन्होंने इसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को न छोड़ना बताया। ईरान ने हालांकि कहा कि इस्लामाबाद में हुई वार्ता इसलिए विफल रही क्योंकि अमेरिका की तरफ से “अत्यधिक मांगें” रखी गईं थीं।
बताते चलें कि ईरान और अमेरिका-इजराइल के साथ युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इजराइल-अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इसके चलते दुनियाभर के देशों में ऊर्जा संकट को लेकर खबरें देखी गईं। वहीं, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भी उछाल दर्ज किया गया।

