पटना: भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने बुधवार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। सम्राट राज्य में इस पद पर पहुंचने वाले पहले भाजपा नेता बन गए हैं। चौधरी के साथ ही जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी ने भी बिहार के नए उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है।
मंगलवार सम्राट चौधरी विधायक दल के नेता चुना गए थे। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद चौधरी ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री पद तक का रास्ता नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद साफ हुआ। नीतीश ने हाल ही में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली थी। इसका बाद मंगलवार उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया।
मुख्यमंत्री बनने से पहले सम्राट चौधरी नीतीश कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद सम्राट चौधरी ने एक्स पर पार्टी नेतृत्व का आभार जताया था। उन्होंने इसे पवित्र अवसर बताते हुए कहा कि यह उनके लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा करने का मौका है।
बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) ने एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था, लेकिन भारी जीत के साथ भाजपा राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
सम्राट चौधरी राजद-जदयू से होते भाजपा तक पहुंचे
सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा कई उतार-चढ़ावों से होकर गुजरी है। शुरुआत उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से की, लेकिन आज वे भाजपा के शीर्ष नेताओं में गिने जाते हैं। कहा जाता है कि भाजपा ने उन्हें वह मंच दिया, जिसकी चाह हर राजनीतिक कार्यकर्ता रखता है।
सम्राट चौधरी का राजनीति से रिश्ता बचपन से ही रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के बड़े नाम रहे हैं। वे सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण सम्राट चौधरी ने राजनीति को करीब से समझा और उसी राह पर आगे बढ़े। पिछले विधानसभा चुनाव में वे मुंगेर के तारापुर से जीतकर विधानसभा पहुंचे।
उन्होंने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 19 मई 1999 को बिहार सरकार में कृषि मंत्री बने। इसके बाद 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने। 2010 में उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्ष का मुख्य सचेतक भी बनाया गया, जिससे उनकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत हुई।
भाजपा में उनकी सक्रिय पहचान 2018 के बाद बनी। 2019 में, जब नित्यानंद राय प्रदेश अध्यक्ष थे, तब सम्राट चौधरी को पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद वे धीरे-धीरे भाजपा के कद्दावर नेताओं में शामिल हो गए।
नीतीश कुमार के भाजपा से अलग होकर महागठबंधन सरकार बनाने के बाद सम्राट चौधरी को बड़ा राजनीतिक मौका मिला। उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने एक प्रतीकात्मक बयान देते हुए सिर पर मुरैठा बांध लिया और कहा कि इसे तब तक नहीं उतारेंगे, जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हट नहीं जाते। इस बयान ने उन्हें राज्य की राजनीति में अलग पहचान दिलाई।
2023 में उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। बाद में जब नीतीश कुमार फिर से एनडीए में लौटे, तो सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री बने और उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। यह पहली बार था जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए गृह विभाग किसी और को दिया।

