नोएडाः सोमवार यहां मजदूरों के वेतन को लेकर शुरू हुआ विशाल प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया और शहर कई घंटों तक थम-सा गया। कई सेक्टरों में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन ने इसमें बाहरी तत्वों की भूमिका का आरोप लगाते हुए बड़े स्तर की साजिश की आशंका जताई है। साथ ही संगठित गलत सूचना, पाकिस्तान समर्थित अस्थिरता फैलाने की कोशिशों और नक्सल गतिविधियों के संभावित पुनर्जीवन जैसे पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी गई है। मामले में अब तक 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे जैसे अलग-अलग कंपनियों के श्रमिक सड़कों पर उतरे, आंदोलन ने हिंसक मोड़ ले लिया। हिंसा की सबसे भयावह तस्वीरें फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी के बाहर से आईं, जहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। भीड़ ने न केवल पथराव शुरू किया बल्कि वहां खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी और पुलिस वाहन को भी पलट दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और जिले के कई थानों की फोर्स को मौके पर बुलाना पड़ा।
नोएडा आंदोलन, क्या है मामला?
दरअसल मजदूरों में असंतोष की जड़ हरियाणा और नोएडा के बीच बढ़ता वेतन अंतर है। श्रमिकों को जब यह पता चला कि रिचा ग्लोबल की फरीदाबाद यूनिट में वेतन में करीब 35 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई है, तो नोएडा फेज-2 में स्थित रिचा ग्लोबल की अन्य यूनिटों के कर्मचारियों ने भी समान वेतन की मांग शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाए।
प्रदर्शनकारी श्रमिक न केवल न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी चाहते हैं, बल्कि उनकी मांगों में ओवरटाइम का दोगुना भुगतान और रविवार को काम करने पर अतिरिक्त राशि देना भी शामिल है। इसके अलावा वे 30 नवंबर तक बोनस भुगतान और बिना किसी ठोस कारण के होने वाली छंटनी पर रोक की मांग कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अधिकांश मांगों पर सहमति जता दी है, लेकिन श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा अब भी मुख्य वेतन वृद्धि के मुद्दे पर लिखित और ठोस आश्वासन की मांग कर रहा है।
यूपी के श्रम मंत्री ने पाकिस्तान लिंक की संभावन जताई
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने इस हिंसा के पीछे एक ‘वेल-प्लैन’ साजिश की आशंका जताई है। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने मेरठ और नोएडा में हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए इस आंदोलन के पीछे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स का हाथ होने की संभावना व्यक्त की है। उनका मानना है कि राष्ट्रविरोधी तत्व श्रमिक असंतोष का फायदा उठाकर अशांति पैदा करना चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने नोएडा में हुई हालिया हिंसा को एक ‘सुनियोजित साजिश’ करार देते हुए कहा कि यह घटना प्रदेश की शांति और विकास की गति को बाधित करने का एक गंभीर प्रयास है। उन्होंने आशंका जताई कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वे ताकतें सक्रिय हैं, जो उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को चुनौती देना चाहती हैं।
मंत्री राजभर ने सुरक्षा पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हाल ही में मेरठ और नोएडा से चार संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी हुई है, जिनके सीधे तार पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि जब सीमा पार से बैठे लोग प्रदेश में अस्थिरता फैलाने की फिराक में हों, तो इस तरह की हिंसक घटनाओं के पीछे किसी बड़ी साजिश की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। हमारी खुफिया एजेंसियां पूरे मामले की सघन जांच कर रही हैं और साजिशकर्ताओं को बख्शा नहीं जाएगा।”
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श्रमिकों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या अफवाह के बहकावे में न आएं। अराजकता कभी समाधान नहीं हो सकती। उत्तर प्रदेश के निर्माण में आपका पसीना और मेहनत शामिल है और सरकार ‘श्रमेव जयते’ के संकल्प के साथ आपके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे नक्सलवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयास से जोड़ते हुए खुफिया तंत्र को सतर्क रहने और बाहरी तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
भ्रामक सूचनाएं और बॉट नेटवर्क रडार पर
प्रशासन का कहना है कि हिंसा को भड़काने में सोशल मीडिया पर फैली गलत सूचनाओं की बड़ी भूमिका रही। जांच में पता चला है कि प्रदर्शन के दौरान मौत और चोटों की झूठी खबरें फैलाने के लिए 24 घंटे के भीतर 50 से अधिक ‘बॉट अकाउंट्स’ बनाए गए थे।
यूपी एसटीएफ अब इन डिजिटल निशानों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके पीछे कौन सी ताकते काम कर रही हैं। अधिकारी अशांति में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए फैक्ट्रियों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले में 350 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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