अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और परमाणु कार्यक्रम को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई लंबी बातचीत फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। 20 घंटे से अधिक चली मैराथन वार्ता के बाद भी दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे। रविवार सुबह इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने बातचीत के दौरान काफी लचीलापन दिखाया और तालमेल बिठाने की कोशिश की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ मिलकर हर संभव प्रयास किया, लेकिन तेहरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। जेडी वेंस ने कड़े लहजे में कहा कि हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं, जो हमारा अंतिम और सबसे अच्छा ऑफर है। अब यह देखना बाकी है कि ईरान इसे स्वीकार करता है या नहीं।
वेंस ने कहा कि ‘पाकिस्तान ने बातचीत को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में अच्छी भूमिका निभाई, ताकि किसी समझौते तक पहुंचा जा सके। हम 21 घंटे से बातचीत में लगे हुए थे, लेकिन दुखद बात यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके।’
हमने अपनी रेड लाइन साफ कर दी थीः वेंस
वेंस ने कहा, “हमने बहुत साफ कर दिया है कि हमारी ‘रेड लाइन’ क्या हैं। हम किन चीजों पर राजी हो सकते हैं और किन पर नहीं, इसमें कोई भ्रम नहीं रखा गया। बदकिस्मती से उन्होंने हमारी शर्तें नहीं मानीं।” उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन की शर्तों को न मानना अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर साबित होगा।
अमेरिका ने इस वार्ता में अपना मुख्य एजेंडा ‘ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना’ रखा है। वेंस ने जोर देकर कहा कि अमेरिका केवल तात्कालिक वादे नहीं, बल्कि लंबे समय का भरोसा चाहता है। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे। क्या हम ईरानियों में परमाणु हथियार न बनाने की इच्छा का बुनियादी वादा देखते हैं? हमने अभी तक ऐसा नहीं देखा है।”
इस शांति वार्ता की मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा था। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सेरेना होटल में यह वार्ता सुबह 4.50 बजे तक बातचीत जारी रही। यह बातचीत दो चरणों में की गई। बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका के लिए रवाना हो गए।
‘अमेरिका की वादाखिलाफी को नहीं भूले’
उधर, ईरान ने इस वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका की ‘अतार्किक और अत्यधिक मांगों’ को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने एक्स पर एक कड़ा संदेश साझा करते हुए कहा कि ईरान अमेरिका के पुराने धोखे और वादाखिलाफी को कभी नहीं भूलेगा।
बाघेई ने लिखा, “कूटनीति हमारे लिए ईरानी भूमि के रक्षकों के पवित्र जिहाद का ही विस्तार है। हम अमेरिका की वादाखिलाफी और उसके द्वेषपूर्ण कृत्यों को नहीं भूले हैं और न ही भूलेंगे। वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष अपनी अवैध मांगों को छोड़ता है या नहीं।”
ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फेघारी ने भी शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमारी अमेरिका के साथ बातचीत फेल रही। हम किसी भी सरेंडर की शर्तें स्वीकार नहीं करते और हम किसी भी शर्त पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट और युद्ध क्षतिपूर्ति पर फंसा पेंच
ईरानी सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में परमाणु कार्यक्रम के अलावा होर्मुज स्ट्रेट, प्रतिबंधों में ढील और युद्ध क्षतिपूर्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई। तसनीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रारंभिक प्रगति के बावजूद गंभीर मतभेद बने हुए हैं।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की राजधानी इन वार्ताओं के दौरान लगभग ‘घोस्ट टाउन’ में तब्दील हो गई थी। प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम लागू करते हुए प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया, बाजार और दफ्तर पूरी तरह बंद रहे, जबकि हजारों पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। आमतौर पर व्यस्त रहने वाली सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वार्ता स्थल के आसपास सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि पत्रकारों को अंदर प्रवेश से पहले कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ा। रास्ते में जगह-जगह हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात थे। इन सख्त इंतजामों का मकसद यही था कि कोई भी बाधा डालने वाला तत्व इन संवेदनशील बातचीत को प्रभावित न कर सके।
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