Tuesday, April 7, 2026
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अमेरिका-ईरान की जंग में क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का पेंच? ईरान का क्यों है इस पर ‘कब्जा’

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उत्तर में फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और फिर आगे अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी यहां से गुजरता है।

नई दिल्ली: अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ जंग शुरू किए जाने के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) चर्चा में है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20% तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आमतौर पर इसी स्ट्रेट ऑफ से गुजरता है। यही वजह है कि जंग शुरू होने के बाद से दुनिया भर के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। खासतौर पर दक्षिण एशियाई देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

जंग के बीच ईरान ने हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है। चुनिंदा जहाजों को ही ईरान यहां से पार करने दे रहा है। यहां बंद करने से मतलब ये है कि ईरान की ओर से धमकी दी जा रही है कि उसकी सहमति के बगैर वह जहाजों को पार नहीं करने देगा और उन पर हमले कर सकता है। इस वजह से जहाज यहां आना कम कर रहे हैं। आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है और कहां स्थित है? ईरान इस पर इतना प्रभाव क्यों दिखाता है और क्या ईरान इसे अपनी मनमर्जी से बंद या खोल सकता है, वैश्विक समझ और नियम क्या कहते हैं। आईए इसे समझते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है और कहां है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा समुद्री मार्ग है। इसके उत्तर में ईरान, दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) हैं। यह अपने प्रवेश और निकास वाली बिंदु पर 50 किलोमीटर चौड़ा है और अपने सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई घटकर महज 33 किलोमीटर रह जाती है।

Strait Of Hormuz

यह उत्तर में फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और फिर आगे अरब सागर से जोड़ता है। संकरा होने के बावजूद यह होर्मुज दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकरों के लिए पर्याप्त गहरा है। इसका इस्तेमाल पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल और एलएनजी उत्पादक देशों के साथ-साथ उनके ग्राहकों द्वारा भी खूब किया जाता रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुमानों के अनुसार, 2025 में होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पादों का आवागमन हुआ। बिजनेस के लिहाज से देखें तो यह लगभग 600 अरब डॉलर मूल्य का ऊर्जा व्यापार है। यह तेल न केवल ईरान से बल्कि इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों से भी आता है।

इसके अलावा वैश्विक LNG का लगभग 20% हिस्सा भी इसी होर्मुज से होकर गुजरता है, जिसमें से अधिकांश कतर से आता है। अमेरिकी सरकार के डेटा के अनुसार 2024 में कतर ने इस होर्मुज से लगभग 9.3 अरब घन फीट (Bcf/d) एलएनजी का निर्यात किया, जबकि यूएई ने लगभग 0.7 अरब घन फीट (Bcf/d) का निर्यात किया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिम एशिया से फर्टिलाइजर के निर्यात का भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के फर्टिलाइजर व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा इसी होर्मुज से होकर गुजरता है। इन सबसे उलट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिम एशिया में आयात के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस समुद्री मार्ग के रास्ते यहां खाद्य पदार्थ, दवाएं और अन्य चीजें आयात होती हैं।

ईरान के ‘कब्जे’ में क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

सबसे संकरे बिंदु पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और इसके मार्ग पूरी तरह से ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आ जाते हैं। वैसे तकनीकी रूप से देखें तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं हो सकता। इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य (International Strait) माना गया है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्र United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के तहत आते हैं।

इसके तहत तटीय देश (जैसे ईरान या ओमान) सुरक्षा नियम बना सकते हैं, लेकिन वे पूरी तरह से रास्ता बंद नहीं कर सकते। ईरान ने इस पर 1982 में हस्ताक्षर तो किया लेकिन इसे आधिकारिक रूप से अपने यहां कानून का हिस्सा नहीं बनाया है। दूसरे शब्दों में कहें तो वह इस संधि से कानूनी रूप से बंधा हुआ नहीं है।

Hormuz 2

बहरहाल, इन सब बातों से इतर ईरान की भौगोलिक स्थिति भी उसे इस क्षेत्र में रणनीतिक तौर पर इस मामले में ज्यादा मजबूत बना देती है। होर्मुज का बड़ा हिस्सा ईरानी तट से लगा हुआ है।

उसके कुछ द्वीप भी यहां है, जहां से ईरान इन इलाकों में गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रख सकता है। इसके अलावा आत्मरक्षा और तटीय सुरक्षा की बात कर ईरान की नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी मजबूत मौजूदगी यहां बनाई हुई हैं। ईरान ने अपने तटों पर एंटी-शिप मिसाइल, रडार सिस्टम और तेज गति वाली पेट्रोल बोट्स भी तैनात कर रखे हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो ईरान या किसी देश का यहां आधिकारिक तौर पर कब्जा नहीं भी है तो भी तेहरान का प्रभुत्व नकारा नहीं जा सकता।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमेशा से रहा है अहम

पुराने समय में भी यह होर्मुज व्यापार का प्रमुख मार्ग था। चीन से रेशम, चीनी मिट्टी के बर्तन, हाथीदांत और कपड़े इसी रास्ते से पश्चिमी देशों तक पहुंचते थे। आधुनिक दौर में यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक बन चुका है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर, बहरीन और यूएई से निकलने वाले कच्चे तेल और एलएनजी के विशाल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं।

ऊर्जा की इस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों, खासकर चीन, तक जाता है। यह होर्मुज कई बार भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र रहा है। 1973 के अरब-इजराइल युद्ध के दौरान तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था। ऐसे ही 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में दोनों देशों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिसे ‘टैंकर वॉर’ कहा गया। 2012 में भी ईरान ने पश्चिमी प्रतिबंधों के जवाब में इस मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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