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ईरानः गिरती मुद्रा को लेकर हो रहा प्रदर्शन हुआ हिंसक, कम से 3 की मौत; अब तक क्या पता चला?

ईरान में गिरती मुद्रा और बढ़ती महंगाई को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के बीच कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है।

तेहरानः ईरान में सरकार के विरोध में कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन गुरुवार, 1 जनवरी को हिंसक हो गया जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है।

ईरान इन दिनों आर्थिक संकट से गुजर रहा है। देश की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। वहीं महंगाई भी बहुत बढ़ी है जिसको लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। राजधानी तेहरान से शुरू हुए ये प्रदर्शन देश के अन्य शहरों तक पहुंचे।

ईरान में प्रदर्शनों के दौरान कम से कम दो लोगों की मौत

ईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया एजेंसी, फार्स ने मुताबिक, “जानकारी रखने वाले एक सूत्र” के अनुसार, गुरुवार सुबह पश्चिमी शहर लोरदेगान में सशस्त्र प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम दो नागरिक मारे गए।

जर्मन वेबसाइट डॉयचे वेले की खबर के मुताबिक, मानवाधिकार समूह हेंगाव ने भी शहर में हुई मौतों की जानकारी दी है। हेंगाव ने बताया कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने के बाद उन्हें मार डाला और घायल कर दिया।

समूह ने यह भी बताया कि बुधवार को मध्य इस्फहान प्रांत में एक और प्रदर्शनकारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस बीच सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया कि बुधवार रात देश के पश्चिमी हिस्से में कुहदाश्त में अर्धसैनिक क्रांतिकारी गार्ड के बासिज बल का एक स्वयंसेवक सदस्य मारा गया। रविवार को अशांति शुरू होने के बाद से ईरान के सुरक्षा बलों में यह पहली मौत है।

यह भी पढ़ें – ईरान में सड़कों पर क्यों उतरें हैं हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी? क्या है मुख्य वजह?

बासिज स्वयंसेवी बल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति वफादार है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से संबद्ध है जो ईरान के सशस्त्र बलों के समानांतर कार्य करता है और सीधे अयातुल्ला को रिपोर्ट करता है।

स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क ने क्या बताया?

बासिज के करीबी माने जाने वाले स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क ने लोरेस्टान प्रांत के एक उप राज्यपाल के हवाले से बताया कि गार्ड कोर का एक सदस्य “विरोध प्रदर्शनों के दौरान दंगाइयों के हाथों शहीद हो गया।”

स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क के मुताबिक, सईद पौराली ने बताया कि झड़पों में बासिज बल के 13 अन्य सदस्य और पुलिस अधिकारी घायल हो गए। हालांकि, ईरान में कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने अधिकारियों के घटनाक्रम के विवरण पर सवाल उठाए हैं।

गौरतलब है कि ईरान में 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद यह सबसे बड़ा प्रदर्शन है। उन प्रदर्शनों को भी ईरानी सरकार ने क्रूर तरीके से दबाया था जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था।

हाल के दिनों में ईरान भर में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह अशांति 28 दिसंबर को तेहरान में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुई, जो देश में व्याप्त गंभीर आर्थिक संकट के खिलाफ थी। इस संकट के चलते मुद्रा का मूल्य सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गया है, जबकि दिसंबर में मुद्रास्फीति 40% से अधिक हो गई।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ईरानी अर्थव्यवस्था वर्षों से संघर्ष कर रही है। इसको लेकर देश में प्रदर्शन हो रहे हैं जिसमें ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे भी लगे। इन नारों को देश के सर्वोच्च नेता आयातोल्ला अली खोमैनी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि वह देश के सर्वोच्च नेता हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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