Friday, March 20, 2026
Homeविश्वRussia-Ukraine war: यूक्रेन शांति समझौते के लिए तैयार, जेलेंस्की ने अमेरिका से...

Russia-Ukraine war: यूक्रेन शांति समझौते के लिए तैयार, जेलेंस्की ने अमेरिका से मांगी 20 साल की सुरक्षा गारंटी

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलेदिमीर जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि शांति का रास्ता तभी खुलेगा जब यह समझौता न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप के लिए वास्तविक स्थिरता लेकर आए।

म्यूनिखः जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन ने कहा है कि वह शांति समझौते के लिए तैयार है, लेकिन यह समझौता ऐसा होना चाहिए जो सम्मानजनक हो और दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश ऐसे समझौते के लिए तैयार है जो यूक्रेन, यूरोप और पूरे क्षेत्र के लिए वास्तविक शांति लाए।

जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि शांति का रास्ता तभी खुलेगा जब यह समझौता न केवल यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप के लिए वास्तविक स्थिरता लेकर आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संकट को सबसे पहले एक सम्मानजनक तरीके से समाप्त करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी दिशा में यूक्रेन प्रयास कर रहा है। जेलेंस्की ने यह भी बताया कि रूस और अमेरिका के साथ अगले सप्ताह होने वाली त्रिपक्षीय वार्ताओं से उन्हें सार्थक परिणाम की उम्मीद है, हालांकि कई बार ऐसा लगता है कि पक्ष अलग-अलग मुद्दों पर बात कर रहे हैं।

सुरक्षा गारंटी समेत यूक्रेन की क्या मांग है?

शांति वार्ता की मेज पर बैठने से पहले जेलेंस्की ने अपनी शर्तें बेहद स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने फिलहाल 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया है, लेकिन यूक्रेन कम से कम 20 साल की ऐसी कानूनी गारंटी चाहता है जो पूरी तरह से ‘वॉटर-टाइट’ यानी अचूक हो। इस गारंटी में यह स्पष्ट होना चाहिए कि भविष्य में किसी भी शांति सेना को अमेरिका किस प्रकार की विशिष्ट मदद प्रदान करेगा। इसके साथ ही, जेलेंस्की ने यूरोपीय संघ में शामिल होने के लिए एक निश्चित तारीख की मांग की है। हालांकि कुछ अधिकारियों ने इसके लिए 2027 तक का समय सुझाया है, लेकिन यूक्रेन इस पर स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता है।

शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा रियायतों को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के अलग-अलग नजरिए हैं। जेलेंस्की ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अक्सर केवल यूक्रेन से ही रियायतें देने की बात कही जाती है, जबकि रूस पर ऐसा कोई दबाव नहीं दिखता। उन्होंने अमेरिकी सुझावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि डोनाबास क्षेत्र से पीछे हटना मुमकिन नहीं है, क्योंकि वहां यूक्रेन के नागरिक रहते हैं। जेलेंस्की ने यह भी साफ किया कि अमेरिका द्वारा 15 मई तक चुनाव कराने के दबाव को वह तभी स्वीकार करेंगे, जब युद्धविराम लागू होने के कम से कम दो महीने बीत चुके हों, ताकि मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जेलेंस्की ने म्यूनिख में इस बात पर गहरा दुख जताया कि वर्तमान शांति वार्ताओं में यूरोप व्यावहारिक रूप से अनुपस्थित है। उन्होंने इसे एक बड़ी गलती करार देते हुए कहा कि यूक्रेन बातचीत की प्रक्रिया में यूरोप को पूरी तरह शामिल करने की कोशिश कर रहा है ताकि उनकी आवाज भी सुनी जा सके। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यूरोप के साथ साझेदारी की पेशकश तो की, लेकिन इसे कई कड़ी शर्तों के साथ जोड़ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जलवायु, प्रवासन और टैरिफ जैसे मुद्दों पर वाशिंगटन की शर्तें नहीं मानी गईं, तो अमेरिका इस दिशा में अकेले आगे बढ़ने से भी पीछे नहीं हटेगा।

संबोधन के दौरान जेलेंस्की ने ईरानी शासन पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान द्वारा रूस को दिए गए ‘शाहेद ड्रोन’ यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को तबाह कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया कि ऐसे शासनों को समय देना केवल अधिक विनाश का कारण बनता है। हालांकि शांति की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन यूरोपीय नेताओं के बीच अब भी संशय बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन फिलहाल सैन्य या आर्थिक रूप से पूरी तरह थके नहीं हैं, जिससे कूटनीतिक सफलता मिलने में अभी समय लग सकता है।

रूस का क्या है रुख ?

दूसरी ओर, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संकेत दिया है कि मॉस्को भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है। लावरोव ने कहा कि रूस उन समझौतों और नतीजों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो पिछले साल अगस्त में अलास्का के एंकोरेज शहर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई वार्ता से निकले थे। रूस एक ऐसी बहुध्रुवीय दुनिया का पक्षधर है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित हो। लावरोव ने चेतावनी दी कि मॉस्को किसी भी ऐसे ‘थोपे गए समझौते’ या ‘डबल स्टैंडर्ड’ का विरोध करेगा जिसमें उसके राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की गई हो।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments