तेल अवीव: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर मिसाइल से हमला किया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब हूती विद्रोहियों ने हमला किया है। इस समूह के अनुसार उन्होंने ‘संवेदनशील इजराइली सैन्य ठिकानों’ को निशाना बनाया है।
इससे पहले इजराइल ने कहा था कि उसने यमन से दागी गई एक मिसाइल को रोका है। पिछले चार हफ्तों में ईरान ने अमेरिका के खाड़ी क्षेत्र में अरब सहयोगियों के खिलाफ एक्शन को और बढ़ाया है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद किया। इससे दुनिया का सबसे भीषण ऊर्जा संकट पैदा हो गया है।
इस बीच इजराइल की ओर से दक्षिणी लेबनान पर भी आक्रमण किया गया है। ऐसे में कम से कम तीन हफ्तों से ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह आतंकी समूह के खिलाफ भी इजराइल जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ रहा है।
हूती गुट की युद्ध में एंट्री, क्या होगा असर?
ईरान के हूती सहयोगी अब तक जंग का हिस्सा नहीं थे। हालांकि, उनके ताजा एक्शन ने जता दिया है कि वे भी अब इसमें कूद रहे हैं। युद्ध में उनकी प्रभावी भागीदारी न केवल पहले से ही फैल रहे संघर्ष को और अधिक बढ़ा सकती है, बल्कि पूरा ध्यान एक अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग और लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की ओर भी मुड़ सकता है। यह यमन के करीब है।
यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां हूती गुट ने 2023 के अंत से कमर्शियल शिपिंग की आवाजाही को बड़े पैमाने पर बाधा पहुंचाई है। हूती गुट का यहां काफी दबदबा रहता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि यमन दरअसल बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के बेहद निकट स्थित है, जो लाल सागर में जाकर मिलती है। करीब 2,000 किलोमीटर लंबे लाल सागर के दूसरे छोर पर स्वेज नहर है, जो इसे भूमध्य सागर से जोड़ती है।

बहरहाल, इजराइल पर हमले को लेकर हूती गुट ने कहा कि उसने दक्षिणी वेस्ट बैंक में स्थित इजराइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की। हूती समूह ने अपने बयान में कहा कि यह हमला लेबनान, ईरान और फिलिस्तीन में बुनियादी ढांचे पर हमलों और नागरिकों की मौत के जवाब में किया गया है।
समूह ने यह भी कहा कि उसका अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक उसका मकसद पूरा नहीं हो जाता और रेजिस्टेंस से जुड़े सभी मोर्चों पर हो रहे हमले बंद नहीं हो जाते।
कौन हैं हूती विद्रोही गुट
हूती भी एक सशस्त्र राजनीतिक और धार्मिक समूह है जो यमन के शिया मुस्लिम अल्पसंख्यक, जैदी समुदाय का समर्थन करता है। वे पश्चिम एशिया में ईरान के सहयोगी संगठनों के नेटवर्क का हिस्सा हैं। ईरान के इसी सहयोगी नेटवर्क में गाजा का हमास और लेबनान का हिजबुल्लाह जैसे समूह भी शामिल हैं। हालांकि, इजराइल ने हाल के वर्षों में हिजबुल्लाह को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
हूती गुट की स्थापना 1990 में हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती द्वारा की गई थी। यह लंबे समय से अमेरिका और इजराइल की खिलाफत करता रहा है। इसका नारा भी स्पष्ट है- ‘अमेरिका का नाश हो, इजराइल का नाश हो, यहूदियों पर लानत हो, इस्लाम की विजय हो।’
2014 में, हूतियों ने गृहयुद्ध से त्रस्त यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। साथ ही नए राष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी को सत्ता से हटा दिया। तब से उन्होंने यमन में सत्ता संतुलन को काफी हद तक अपने पक्ष में झुका दिया है।

