नई दिल्ली: दुनिया में भारत आय और संपत्ति की असमानता के मामले में अब भी शीर्ष देशों की लिस्ट में बना हुआ है। देश में शीर्ष 10 प्रतिशत कमाने वालों के पास कुल राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा है, जबकि नीचे के 50 प्रतिशत लोगों को सिर्फ 15% मिलता है। वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2026 में यह बात कही गई है। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में संपत्ति की असमानता और भी ज्यादा है। इसमें सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों के पास कुल संपत्ति का लगभग 65 प्रतिशत और इसमें भी शीर्ष 1% के पास लगभग 40 फीसदी संपत्ति है।
पहले की वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट-2022 के अनुसार, भारत में टॉप 10 प्रतिशत लोगों के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 प्रतिशत था, जबकि 2021 में नीचे के 50 प्रतिशत लोगों का हिस्सा 13 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय (PPP) लगभग 6,200 यूरो (6.57 लाख रुपये) है, और औसत संपत्ति (PPP) लगभग 28,000 यूरो (29.6 लाख रुपये) है। महिला श्रम भागीदारी 15.7% के साथ बहुत कम पर बनी हुई है, जो पिछले एक दशक में कोई सुधार नहीं दिखा रही है। कुल मिलाकर असमान आय, संपत्ति और लिंग में असमानता भारत में गहराई से जमी हुई है, जो अर्थव्यवस्था के भीतर लगातार संरचनात्मक विभाजन को उजागर करती है।’
वैश्विक स्तर पर भी संपत्ति में घोर असमानता
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में दौलत ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई है, लेकिन इसका बंटवारा बहुत असमान है। शीर्ष 0.001 प्रतिशत, जिसमें 60,000 से भी कम मल्टी-मिलियनेयर शामिल हैं, उनके पास पूरी दुनिया की आधी आबादी से तीन गुना ज्यादा दौलत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1995 में उनका हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत था जो आज बढ़कर 6% से ज्यादा हो गया है, और यह सब वैश्विक असमानताओं में बढ़ोतरी और बहुपक्षीय भागीदारी के कमजोर होने के माहौल में हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के टॉप 10 प्रतिशत लोगों के पास कुल दौलत का तीन-चौथाई हिस्सा (75 प्रतिशत है, जबकि नीचे के 50 फीसदी लोगों के पास सिर्फ 2% है। बीच के 40 प्रतिशत लोगों के पास 23 प्रतिशत दौलत है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘और करीब से देखने पर, यह असमानता चौंकाने वाली हो जाती है। अकेले शीर्ष 1% लोग, जो लगभग यूनाइटेड किंगडम की वयस्क आबादी के बराबर हैं, दुनिया की 37% दौलत को नियंत्रित करते हैं। यह दुनिया की आधी आबादी की कुल दौलत से अठारह गुना ज्यादा है। यह ग्रुप चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, ब्राजील और रूस की कुल वयस्क आबादी जितना बड़ा है।’
1980 और 2025 में ग्लोबल इनकम ग्रुप्स का ज्योग्राफिक विवरण देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 1980 में ग्लोबल एलीट नॉर्थ अमेरिका और ओशिनिया, यूरोप में केंद्रित थे। लैटिन अमेरिका की भी कुछ मौजूदगी थी, लेकिन चीन और भारत लगभग पूरी तरह से डिस्ट्रीब्यूशन के निचले आधे हिस्से तक ही सीमित थे। इसमें कहा गया है, ‘उस समय, ग्लोबल एलीट में चीन की लगभग कोई मौजूदगी नहीं थी, जबकि भारत, आमतौर पर एशिया, और सब-सहारा अफ्रीका बहुत निचले परसेंटाइल में थे।’
दुनिया के किन देशों में सबसे अधिक असमानता?
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में दुनिया में सबसे ज्यादा आय को लेकर असमानता है। यहां टॉप 10 प्रतिशत लोग कुल आय का 66 प्रतिशत कमाते हैं, जबकि निचले आधे हिस्से को सिर्फ 6 प्रतिशत मिलता है। ब्राजील, मैक्सिको, चिली और कोलंबिया जैसे लैटिन अमेरिकी देशों में भी ऐसा ही ट्रेंड है, जहाँ सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों को कमाई का लगभग 60 प्रतिशत मिलता है।
यूरोपीय देशों में ज्यादा संतुलित तस्वीर है। स्वीडन और नॉर्वे में निचले 50 प्रतिशत लोग कुल इनकम का लगभग 25 प्रतिशत कमाते हैं, जबकि टॉप 10 प्रतिशत को 30 प्रतिशत से कम मिलता है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, जापान और यूनाइटेड किंगडम सहित कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बीच की स्थिति हैं। टॉप 10 प्रतिशत लोग कुल इनकम का लगभग 33-47 प्रतिशत कमाते हैं, जबकि निचले आधे हिस्से को 16-21 प्रतिशत मिलता है।
एशिया में आय का बंटवारा मिला-जुला है। बांग्लादेश (शीर्ष-10% के पास 41 प्रतिशत) और चीन (शीर्ष 10 प्रतिशत के पास 43 फीसदी) जैसे देशों में ज्यादा संतुलित स्थिति है, जबकि भारत, थाईलैंड और तुर्की में सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोग कुल इनकम का आधे से ज्यादा कमाते हैं।

