नई दिल्ली: असम के संवैधानिक रूप से सुरक्षित कार्बी आंगलोंग जिले में कथित अवैध गैर-आदिवासी बस्ती को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इसमेंअब तक दो लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों घायल हुए हैं। हालात ऐसे बने है कि राज्य सरकार को दो जिलों में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगाने और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह राज्य का पहाड़ी क्षेत्र है और अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए भी जाना जाता है।
यह हिंसा पश्चिम कार्बी आंगलोंग और उससे सटे कार्बी आंगलोंग जिले में जमीन के अधिकारों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद भड़की, जो आदिवासी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में बदल गया। पुलिस को भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज का भी इस्तेमाल करना पड़ा।
पुलिस ने बताया कि पुलिस कार्रवाई में एक आदिवासी प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है, जबकि खेरोनी में आग लगने से एक गैर-आदिवासी व्यक्ति मारा गया है। खेरोनी एक छोटा व्यापारिक शहर है जो इस अशांति का केंद्र बन गया है।
सुरक्षा बलों पर हमला हुआ, वरिष्ठ अधिकारी घायल
असम के DGP हरमीत सिंह ने बताया कि धनुष, तीर, देशी बम और पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसमें सीनियर अधिकारियों समेत 48 पुलिसकर्मी घायल हो गए। झड़प के दौरान घायल होने वालों में DGP और IGP लॉ एंड ऑर्डर अखिलेश कुमार सिंह भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने इलाके में एक पुल पर कब्जा करने की कोशिश की और जब उन्हें रोका गया तो वे हिंसक हो गए। सिंह ने कहा, ‘आज, उन्होंने पुल पर कब्जा करने की कोशिश की, और जब हमने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने हम पर हमला कर दिया। देशी बम और पत्थर फेंके गए। मुझ पर धनुष और तीर से हमला किया गया।’
उन्होंने आगे कहा कि पुलिस के पास वीडियो फुटेज है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला…कैसे फैली हिंसा?
जमीन के अधिकार और छठी अनुसूची मुख्य मुद्दा हैं। ये विरोध प्रदर्शन कार्बी समुदाय के उस विरोध से जुड़े हैं, जिसमें वे आरोप लगाते हैं कि गैर-आदिवासी बसने वाले पेशेवर चरागाह रिजर्व और गाँव के चरागाह रिजर्व जमीनों पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। ये जिले कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के तहत आते हैं, जो संविधान की छठी अनुसूची द्वारा शासित है। यह अनुसूची आदिवासी क्षेत्रों को जमीन, जंगलों और स्थानीय शासन पर स्वायत्तता देती है ताकि मूल समुदायों की रक्षा की जा सके। स्थानीय निवासी एक साल से ज्यादा समय से कथित कब्जा करने वालों को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना रोक-टोक के बसावट आदिवासी जमीन के अधिकारों के लिए खतरा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 6 दिसंबर को कार्बी समुदाय के सदस्यों द्वारा भूख हड़ताल शुरू करने के बाद तनाव बढ़ गया। मंगलवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस ने कुछ भूख हड़ताल करने वाले प्रदर्शनकारियों को बिगड़ती सेहत के कारण गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में शिफ्ट कर दिया।
पुलिस के अनुसार, यह गलत जानकारी फैली कि प्रदर्शन कर रहे एक नेता को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे लोगों में गुस्सा फैला और हिंसा भड़की। डीजीपी हरमीत सिंह ने पत्रकारों को बताया, ‘कल से यहां भारी भीड़ जमा है। मैंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनसे बात की। कल रात, उनके नेता को मेडिकल चेक-अप के लिए गुवाहाटी ले जाया गया क्योंकि डॉक्टरों को लगा कि भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है। फिर भी, किसी ने यह गलत जानकारी फैलाई कि उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। हिंसा से किसी को कुछ नहीं मिलता।’

इंटरनेट बंद, मामले को सुलझाने के लिए बातचीत की कोशिश
बहरहाल, बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए असम सरकार ने मंगलवार को कार्बी आंगलोंग और वेस्ट कार्बी आंगलोंग जिलों में तुरंत प्रभाव से इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को सस्पेंड करने का आदेश दिया। असम सरकार के गृह और राजनीतिक विभाग के कमिश्नर और सचिव बिस्वजीत पेगू ने कहा, ‘इस दौरान वॉयस कॉल और फिक्स्ड टेलीफोन लाइनों पर आधारित ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी चालू रहेगी। इस आदेश का कोई भी उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के संबंधित प्रावधान के तहत दंडनीय होगा।’
सरकार ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेटों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल भड़काऊ मैसेज और अफवाहें फैलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
दूसरी ओर राज्य कैबिनेट मंत्री रानोज पेगू जो पहले खेरोनी में प्रदर्शनकारियों से मिल चुके हैं, उन्होंने कहा कि समूह भूख हड़ताल खत्म करने और 26 दिसंबर को राज्य सरकार और कार्बी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल के साथ त्रिपक्षीय बातचीत में हिस्सा लेने पर सहमत हो गया है।
पेगू ने कहा, ‘हमने कार्बी समुदाय को भरोसा दिलाया है कि सरकार जमीन के अधिकारों और दूसरे आदिवासी मुद्दों को लेकर गंभीर है।’ उन्होंने कहा कि बातचीत में ‘कार्बी समुदाय के अस्तित्व से जुड़े बड़े मुद्दों’ पर चर्चा होगी।
हालांकि, बातचीत के आश्वासन के बावजूद मंगलवार को दिन भर हिंसा जारी रही। खेरोनी में दुकानों और बाजारों में आग लगा दी गई। पुलिस ने बताया कि एक विशेष जांच टीम बनाई गई है और आगजनी और हमलों में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी से लगभग 250 किलोमीटर पूर्व में खेरोनी में अतिरिक्त फोर्स तैनात करने को कहा गया है। सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह बहुत दुख की बात है कि आज की हिंसा में दो लोगों की जान चली गई।’ मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का भी आश्वासन दिया।

