Friday, March 20, 2026
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राष्ट्रपति भवन से क्यों हटाई गई इसका डिजाइन तैयार करने वाले एडविन लुटियंस की प्रतिमा?

देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सोमवार को ‘राजाजी उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार (23 फरवरी) को राष्ट्रपति भवन में भारत के पहले और एकमात्र गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। इसमें खास बात यह रही कि राजगोपालाचारी की प्रतिमा को ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह पर लगाया गया।

समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ‘यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति को गर्व से अपनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की शृंखला का हिस्सा है।’

राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के अशोक मंडप के पास स्थित भव्य सीढ़ी के पास चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। काले रंग की इस प्रतिमा ने ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की कांस्य प्रतिमा का स्थान लिया है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ कार्यक्रम के दौरान प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल के कई मंत्री उपस्थित थे।

पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘राजाजी उत्सव’ को एक अद्भुत पहल बताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी पोस्ट की रीपोस्ट करते हुए लिखा कि ‘राजाजी उत्सव’ एक अद्भुत पहल है, जो राष्ट्र के प्रति राजाजी के समृद्ध योगदान के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि आप इस उत्सव में अवश्य शामिल हों और इससे प्रेरणा लें!

इससे पहले 22 फरवरी को पीएम मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था कि देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा था, ‘आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।’

पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां तो लगी रहने दी गईं, लेकिन देश के महान सपूतों को जगह नहीं दी गई।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी एक पोस्ट में मोदी सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘राजाजी को राष्ट्रपति भवन में प्रतिमा से सम्मानित होते देखकर मुझे बहुत खुशी हुई है। गणतंत्र बनने से पहले वे भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल थे और उन्होंने अपना पद नए राष्ट्रपति को सौंप दिया था।’

एडविन लुटियंस के परिवार ने क्या कहा?

भारत के राष्ट्रपति भवन में राजगोपालाचारी की प्रतिमा की स्थापना को लेकर एडविन लुटियंस के परपोते मैट रिडले की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि एडविन लुटियंस की कांस्य प्रतिमा हटाए जाने से उन्हें गहरा दुख हुआ।
एक्स पर एक पोस्ट में रिडले ने लिखा, ‘यह जानकर दुख हुआ कि लुटियंस (मेरे परदादा) की प्रतिमा को दिल्ली स्थित उस राष्ट्रपति भवन से हटाया जा रहा है जिसे उन्होंने ही डिजाइन किया था। पिछले साल मैं इसके साथ था। उस समय मुझे आश्चर्य हुआ था कि उनके नाम को आधारशिला से क्यों हटा दिया गया था।’

गौरतलब है कि 1912 में जब ब्रिटिश प्रशासन राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित कर रहा था, तब प्रख्यात ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस को दिल्ली के बड़े हिस्से का डिजाइन तैयार करने के लिए चुना गया।

इसमें राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और यहां तक ​​कि हैदराबाद हाउस भी शामिल है, जो हैदराबाद के निज़ाम का निवास स्थान था। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के मार्ग, जिसे अब कर्तव्य पथ के नाम से जाना जाता है, उसका डिजाइन भी उन्होंने ही तैयार किया था।

लुटियंस के डिजाइन किए गए इन इमारतों के बारे में बताया जाता है कि ये न तो पूरी तरह यूरोपीय शैली के हैं और न ही पूरी तरह भारतीय या मुगल। यह एक तरह से ऐसी मिश्रित शैली थी, जिसमें पश्चिमी परंपराओं और स्थानीय तत्वों का इस्तेमाल हुआ।

लुटियंस दिल्ली और इसके बदले हुए मायने

बदलते समय के साथ ‘लुटियंस दिल्ली’ शब्द न केवल भारत की राजधानी में स्थित करीब 26 वर्ग किलोमीटर भूमि का पर्याय बना, बल्कि एक विशेष वर्ग के लोगों का भी प्रतीक बना। मसलन जिनके पास लंबे समय से सत्ता या पावर रही है, जो अंग्रेजी बोलते हैं, जिनकी पढ़ाई विदेश में हुई है या जिनका जीवन आम भारतीय जीवन शैली से अलग और ऊंचा है।

खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अतीत में लुटियंस दिल्ली शब्द का इस्तेमाल काफी कठोर लहजे में किया है। साल 2019 में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि उनकी छवि ‘खान मार्केट गैंग या लुटियंस दिल्ली’ से नहीं, बल्कि ’45 वर्षों के परिश्रम’ से बनी है, और इसे मिटाया नहीं जा सकता।

ऐसे ही साल 2025 में औपनिवेशिक काल के कानूनों के जारी रहने के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने एक बार कहा था, ‘मुझे आश्चर्य है कि लुटियंस जमात और खान मार्केट गैंग इतने वर्षों तक इस पर चुप रहे। जनहित याचिकाओं के ठेकेदार, जो लोग बार-बार अदालत जाते हैं, वे उस समय इससे आजादी के बारे में चिंतित क्यों नहीं थे?’

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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