नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में संघर्ष और भी बढ़ता जा रहा है। करीब 20 दिनों की लड़ाई के बाद भी स्थिति बदलती नजर नहीं आ रही है। ईरान ने कतर और सऊदी अरब में ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया है। ईरान की ओर से गुरुवार को कतर के मुख्य ऊर्जा केंद्र- रास लाफान औद्योगिक शहर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर आग लगी और व्यापक क्षति की आशंका है।
सऊदी अरब ने भी कहा कि उसने अपनी ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले ड्रोनों को रोका है। जबकि एक बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा रियाद के दक्षिण में एक रिफाइनरी के पास गिरा। हमले के बाद सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा, ‘हमने जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखा है, और समय आने पर, सऊदी अरब का नेतृत्व जरूरी निर्णय लेगा। हम अपने देश और अपने आर्थिक संसाधनों की रक्षा करने से पीछे नहीं हटेंगे।’
इन दोनों देशों यानी कतर और सऊदी अरब में ऊर्जा सुविधाओं पर ईरान के हमले दरअसल इजराइल द्वारा साउथ पार्स के प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमले के बाद हुए हैं। जारी युद्ध के दौरान खाड़ी में ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर एक तरह से यह पहला रिपोर्ट किया गया बड़ा हमला है। जाहिर तौर पर इससे ईरान भी दूसरे खाड़ी देशों के उर्जा संसाधनों पर पलटवार कर रहा है। आखिर साउथ पार्स गैस क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है और यह युद्ध किस तरह इस पश्चिमी एशिया क्षेत्र के प्रमुख ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए खतरा बनता जा रहा है, इसे समझते हैं।
साउथ पार्स गैस फील्ड क्या है?
साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड मानी जाती है। इसे ईरान और कतर के बीच साझा किया जाता है। साउथ पार्स ईरानी जलक्षेत्र में स्थित है, जबकि नॉर्थ डोम जिसे नॉर्थ फील्ड भी कहा जाता है, कतरी जलक्षेत्र में स्थित है। इस गैस क्षेत्र की खोज सबसे पहले 1971 में कतरी जलक्षेत्र में हुई थी, जब खुफ फॉर्मेशन के नाम से जानी जाने वाली कई जलाशय चट्टानों में गैस पाई गई थी।
आज साउथ पार्स जलाशय लगभग 9,700 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसमें लगभग 1,800 ट्रिलियन घन फीट गैस है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा जारी अध्ययनों के अनुसार, विश्व में साबित कुल गैस भंडार का यह लगभग आठ प्रतिशत है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें अगले 13 वर्षों तक विश्व की जरूरतों के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध है।
यहां गौर करने वाली बात है कि साउथ पार्स गैस क्षेत्र ईरान और कतर दोनों देशों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। साउथ पार्स ईरान के प्राकृतिक गैस उत्पादन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। इसी गैस से देश की बिजली, ताप और पेट्रोकेमिकल उद्योग संचालित होते हैं। वहीं, दूसरी ओर कतर में, जिसे नॉर्थ फील्ड के नाम से जाना जाता है, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। यह वैश्विक एलएनजी मांग का लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति करता है।
इजराइल का साउथ पार्स पर हमला
इजराइल ने बुधवार (18 मार्च) को साउथ पार्स पर हमला किया था। इसके बाद गैस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित निकालना पड़ा और आग बुझाने के लिए आपातकालीन दल तैनात किए गए। ईरान ने इस हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने परिणाम भुगतने की चेतावनी दी और कहा कि उनका कदम पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकते हैं। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने तत्काल चेतावनी जारी करते हुए फारस की खाड़ी के देशों में तेल और गैस सुविधाओं को खाली करने को कहा।
हालांकि इजराइल ने शुरू में इस हमले पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसने हमले से पहले अमेरिका को इसकी जानकारी दे दी थी। इस हमले में क्या अमेरिका की भी भूमिका थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
वैसे, यह पहली बार नहीं है जब इजराइल ने साउथ पार्स गैस क्षेत्र को निशाना बनाया है। पिछले साल 12 दिनों के युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में स्थित एक रिफाइनरी पर इजराइली ड्रोन से हमला किया गया था, जिसके बाद गैस उत्पादन रोक दिया गया था।
ईरान का पलटवार और खराब होते हालात
दक्षिण पार्स पर इजराइल के हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस ठिकानों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। उसकी ओर से कतर और सऊदी अरब पर उर्जा संसाधनों पर मिसाइलें दागी गई।
कतर की सरकारी तेल कंपनी कतर एनर्जी ने ऊर्जा उद्योग के केंद्र रास लाफान औद्योगिक शहर पर ईरानी मिसाइलों के हमले के बाद ‘व्यापक क्षति’ की सूचना दी। सऊदी अरब ने कहा कि उसने रियाद की ओर दागी गई चार बैलिस्टिक मिसाइलों को रोककर नष्ट किया और देश के पूर्व में स्थित एक गैस संयंत्र पर ड्रोन हमले के प्रयास को भी नाकाम किया गया है।
ईरान के हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने यह कहा कि इजराइल अब ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमले नहीं करेगा, लेकिन साथ ही धमकी दी कि अगर ईरान कतर की एलएनजी गैस सुविधाओं पर कोई और जवाबी हमला करता है, तो वे ईरान के पूरे साउथ पार्स गैस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर तबाह कर देंगे।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बिना इजराइल की मदद या सहमति के ही ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को इतनी ताकत से उड़ा सकता है, जितनी उसने पहले कभी नहीं देखी होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि अमेरिका को साउथ पार्स क्षेत्र पर इजराइल के पहले के हमले के बारे में ‘कुछ भी पता नहीं था’, लेकिन “इजराइल द्वारा इस क्षेत्र पर कोई और हमला नहीं किया जाएगा’, जब तक कि ईरान ‘किसी निर्दोष देश, इस मामले में कतर पर हमला करने का फैसला नहीं करता।’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, ‘मिडिल ईस्ट में जो हुआ, उससे गुस्से में इजरायल ने ईरान में दक्षिण पार्स गैस फील्ड नाम की एक बड़ी फैसिलिटी पर हिंसक हमला किया है। पूरे इलाके का एक छोटा सा हिस्सा ही प्रभावित हुआ है। अमेरिका को इस खास हमले के बारे में कुछ नहीं पता था और कतर किसी भी तरह से इसमें शामिल नहीं था और न ही उसे इस बात का कोई अंदाजा था कि ऐसा होने वाला है।’
बहरहाल, साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला साबित कर रहा है कि ऊर्जा अब कैसे धीरे-धीरे इस युद्ध में एक हथियार बनती जा रही है। 28 फरवरी को इस युद्ध की शुरुआत के बाद से, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले होते रहे हैं। इसी हफ्ते मंगलवार को एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद अबू धाबी के शाह गैस क्षेत्र में परिचालन निलंबित कर दिया गया था।
जानकारों के अनुसार ऐसे हमले युद्ध के और गहराने का संकेत दे रहे हैं, जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर परिणाम दिखेंगे। फाइनेंसियल टाइम्स के अनुसार एमएसटी फाइनेंशियल के विश्लेषक सॉल कावोनिक ने कहा, ‘कुछ मिलियन बैरल उत्पादन को ठप करने वाली घटना का बड़ा प्रभाव होगा क्योंकि इसका मतलब है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी भंडार को फिर से भरने का कोई तरीका नहीं होगा।’ उन्होंने आगे कहा कि तरलीकृत प्राकृतिक गैस संयंत्र पर हमला सबसे बुरा होगा, क्योंकि इसकी मरम्मत में कई साल लग सकते हैं।

