जयपुरः अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा ने हरियाणा के गुरुग्राम से लेकर राजस्थान के उदयपुर तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनों में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ताओं को आशंका है कि बदली हुई परिभाषा देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक के पारिस्थितिक संतुलन के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के अनुसार, “अरावली पर्वतमाला निर्दिष्ट अरावली जिलों में स्थित कोई भी भू-आकृति है जिसकी ऊंचाई उसके स्थानीय भूभाग से 100 मीटर या उससे अधिक हो” और “अरावली पर्वतमाला एक दूसरे से 500 मीटर के भीतर स्थित दो या दो से अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह है।”
अरावली पहाड़ी को लेकर हो रहे प्रदर्शन
गुरुग्राम में हरियाणा के मंत्रिमंडल मंत्री राव नरबीर सिंह के घर के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्य और स्थानीय लोग शामिल हुए। वहीं, उदयपुर में भी वकीलों ने अरावली की नई परिभाषा के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने बैनर और तख्तियां पकड़ी हुई थीं और “अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ” और “अरावली नहीं तो जीवन नहीं” जैसे नारे लगा रहे थे। उन्होंने नई परिभाषा को मंजूरी देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की।
गौरतलब है कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक समिति की अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा संबंधी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में कार्यकर्ताओं ने बताया, नई परिभाषा खनन, निर्माण और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है, जिससे अरावली पर्वतमाला की प्राकृतिक सुंदरता को नष्ट करने का खतरा बढ़ सकता है।
एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी को बताया, “हमारा मानना है कि यह निर्णय इसके पारिस्थितिक संतुलन के लिए हानिकारक हो सकता है।”
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए करता है प्राकृतिक सुरक्षा का काम
कार्यकर्ताओं का कहना है कि अरावली पर्वत श्रृंखला दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है, जो प्रदूषण, मरुस्थलीकरण और जल संकट को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अरावली को पूरी तरह से संरक्षित क्षेत्र घोषित करे और एक सख्त और स्पष्ट संरक्षण नीति लागू करे।
हिंदुस्तान टाइम्स ने एक प्रदर्शनकारी के हवाले से लिखा “विकास के नाम पर प्रकृति से समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि अरावली का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। हवा में विषाक्तता धीरे-धीरे व्यापक होती जा रही है।”
इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर जयपुर में एक मार्च निकाला। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता टीका राम जुली ने शनिवार को केंद्र सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला को पुनर्परिभाषित करने के कदम की आलोचना की, जिससे 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति मिल गई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने पर पारिस्थितिक क्षति और मरुस्थलीकरण हो सकता है, क्योंकि अरावली पर्वतमाला मरुस्थलीकरण को रोकने और भूजल स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अरावली की नई परिभाषा को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। इसके साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान होगा।

