नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को जॉर्डन पहुंचे। यह उनकी तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव है, जिसमें इथियोपिया और ओमान भी शामिल हैं। पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बीच जॉर्डन की यह उनकी पहली पूरी तरह से द्विपक्षीय यात्रा है।
जॉर्डन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और हाल के वर्षों में दोनों में राजनीतिक संबंध गहरे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी 15 और 16 दिसंबर को जॉर्डन में रहेंगे। किंग अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन से मिलेंगे, जो इजराइल-फिलिस्तीन शांति प्रक्रिया में भाग लेने वालों में से एक रहे हैं।
पश्चिम एशिया में एक मॉडरेट इस्लामिक देश जॉर्डन ने खुद को कट्टरपंथ, उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत दीवार के तौर पर पेश किया है। यह देश पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभा रहा है। नई दिल्ली और अम्मान (जॉर्डन की राझधानी) आतंकवाद से एक ग्लोबल चुनौती के तौर पर निपटने के लिए एक कॉमन रुख पर चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर हुए आतंकवादी हमले पर भी बातचीत के दौरान जरूर चर्चा होगी।
चर्चा के एजेंडे में गाजा शांति योजना, भारत की खाद्य सुरक्षा जरूरतें और रक्षा भी शामिल हैं।
भारत-जॉर्डन के बीच व्यापार
भारत दरअसल जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। 2023-24 में दोनों देशों के बीच 2.875 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत इस देश से बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर आयात करता है, जो भारत की खाद्य सुरक्षा की कोशिश का एक अहम हिस्सा है। भारत ने वहाँ पोटाश और फॉस्फेट सेक्टर में भी निवेश किया है। भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे निवेश की और भी संभावनाएँ हैं।
जॉर्डन इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी, जो IFFCO इंडिया और जॉर्डन फॉस्फेट माइंस कंपनी का एक जॉइंट वेंचर है, $860 मिलियन के इन्वेस्टमेंट से शुरू की गई थी और यह फॉस्फोरिक एसिड बनाकर भारत को एक्सपोर्ट करती है। यह JV भारत के लिए फॉस्फोरिक एसिड का एक बड़ा सोर्स है।
भारत और जॉर्डन ने 2018 में रक्षा सहयोग पर एक MoU पर भी साइन किया थे। जॉर्डन में लगभग 17,500 भारतीयों का समुदाय रहता है, जिनमें से ज्यादातर गारमेंट, कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में और UN और दूसरे मल्टीलेटरल संगठनों में काम करते हैं। इस साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं सालगिरह है।
पीएम मोदी के कार्यकाल में जॉर्डन से रिश्ता
पीएम मोदी फरवरी 2018 में फिलिस्तीन जाते समय जॉर्डन से गुजरे थे। लेकिन किंग ने उनका बहुत खास स्वागत किया, जिससे यह सिर्फ एक ट्रांजिट विजिट से कहीं ज्यादा बन गया। मौजूदा पूरी योजनाबद्ध तरीके से द्विपक्षीय यात्रा 37 साल के अंतराल के बाद हो रही है।
मोदी की फरवरी 2018 की यात्रा के तुरंत बाद फरवरी-मार्च 2018 में किंग ने भी भारत का दौरा किया था।
इसके बाद से दोनों नेता कई मौकों पर मिले हैं। इसमें सितंबर 2019 में न्यूयॉर्क में 74वीं UN जनरल असेंबली और अक्टूबर 2019 में रियाद में फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव के मौके पर हुई मुलाकात भी शामिल है। इसके अलावा दिसंबर 2023 में दुबई में COP28 में, और जून 2024 में इटली में G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर भी मुलाकात हुई थी।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी से बात करने वाले पहले विश्व नेताओं में जॉर्डन के किंग भी शामिल थे। 24 अप्रैल, 2025 को फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने हमले की निंदा की और कहा कि आतंकवाद को उसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में खारिज किया जाना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अपने समर्थन को भी दोहराया।
दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2023 में गाजा में हो रहे घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिए फोन पर भी बात की थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने आतंकवाद, हिंसा और आम नागरिकों की जान जाने के बारे में अपनी साझा चिंताओं को व्यक्त किया था।

