नई दिल्लीः सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान ओबीसी आरक्षण के ‘कथित दुरुपयोग’ के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ। भाजपा सांसद के. लक्ष्मण द्वारा धर्म के आधार पर आरक्षण दिए जाने के खिलाफ की गई टिप्पणियों के विरोध में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के इस कदम के बाद सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि ये दल मुसलमानों को केवल वोट बैंक के तौर पर देखते हैं और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं।
दरअसल भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि कई विपक्षी शासित राज्यों में ओबीसी कोटे का धर्म के नाम पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में सभी मुस्लिमों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कर आरक्षण दिया जा रहा है, जो संवैधानिक मानदंडों के खिलाफ है।
शून्यकाल में ओबीसी कोटे में मुस्लिम हिस्सेदारी को लेकर के. लक्ष्मण ने क्या कहा?
भाजपा सांसद ने कहा कि ओबीसी आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाना था, लेकिन अब इसका दुरुपयोग धर्म के नाम पर किया जा रहा है। राज्य की एक समिति ने एक मामले में 4% आरक्षण विशेष रूप से एक समुदाय के लिए देने की सिफारिश की है। वहीं, ओबीसी सूची में मुस्लिम समुदाय के कई समूह शामिल कर दिए गए हैं। जबकि देश में ओबीसी की आबादी लगभग 50% है, ऐसे में धर्म के आधार पर इस तरह के आरक्षण का विस्तार करना उचित नहीं है।
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के. लक्ष्मण ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु उच्च न्यायालयों के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा, “आरक्षण नीति में धर्म के आधार पर कोटे का कोई प्रावधान नहीं है। कुछ राज्य मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देकर ओबीसी के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। सरकार को ऐसे धर्म आधारित आरक्षण की व्यापक समीक्षा के आदेश देने चाहिए।”
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि हमारी नीति केवल सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होनी चाहिए, न कि धर्म पर। जैसा कि स्पष्ट रूप से कहा गया है, आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं दिया जा सकता।
विपक्ष के वॉकआउट की जेपी नड्डा ने की आलोचना
जब के. लक्ष्मण अपनी बात रख रहे थे, तब विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और उनके भाषण के बीच में ही टोका-टाकी शुरू कर दी। विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित हुई और बाद में लगभग पूरा विपक्ष विरोध स्वरूप सदन से बाहर चला गया।
विपक्ष के वॉकआउट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष न तो लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करता है और न ही उसे संविधान में कोई दिलचस्पी है।
नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में देखते हैं और तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं। उन्होंने विपक्ष के आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि जब भाजपा सदस्य अपने आवंटित समय में सदन में अपनी बात रख रहे थे, तब विपक्ष ने उन्हें लगातार बाधित किया, जो यह दिखाता है कि इन दलों का संसदीय प्रक्रियाओं और सार्थक बहस में कोई विश्वास नहीं है।
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नड्डा ने विपक्ष के इस व्यवहार को अलोकतांत्रिक और निंदनीय करार देते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हर गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा के बजाय केवल सदन में व्यवधान पैदा करने में रुचि रखता है।
विपक्ष ने कहा- संविधान की बुनियादी समझ नहीं
सदने के बाहर मीडिया से बात करते हुए विपक्ष ने भाजपा पर कई तरह के आरोप लगाए। राजद सांसद मनोज कुमार झा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न तो संविधान की बुनियादी समझ है और न ही पिछड़ा वर्ग आयोग की कार्यप्रणाली की।
उन्होंने मंडल आयोग का हवाला देते हुए समझाया कि आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह से स्पष्ट है, जिसके तहत उन जातियों और समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया है जिन्हें उनके व्यावसायिक नामों से जाना जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या भाजपा इस तरह के कदम उठाकर देश में तनाव पैदा करना चाहती है।
समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने सदन की घटना पर अपनी राय रखते हुए कहा कि शून्यकाल के दौरान भाजपा सदस्यों ने ओबीसी सूची से मुस्लिमों को बाहर करने का मुद्दा उठाया और इसका पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने बताया कि इसके विरोध में पूरा विपक्ष एकजुट होकर सदन से बाहर चला गया।
जावेद खान ने आगे तंज कसते हुए कहा कि उन्हें भाजपा के इस कदम पर रत्ती भर भी आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि भाजपा से इसी तरह के एजेंडे की उम्मीद की जा सकती है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा के इस कदम को सीधे तौर पर भारतीय संविधान की भावना के विपरीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने शून्यकाल में एक ऐसा सवाल उठाया है जो न केवल संविधान के खिलाफ है, बल्कि मंडल आयोग की मूल भावना का भी अपमान करता है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के आरक्षण का विरोध करना संविधान के उस ढांचे पर हमला है, जो समाज के वंचित समूहों को सुरक्षा प्रदान करता है।
सदन में उठाए मुद्दे पर भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने क्या कहा?
भाजपा सांसद के. लक्ष्मण ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हमें किसी को शामिल किए जाने से कोई आपत्ति नहीं है; अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए पहले से ही आरक्षण की व्यवस्था है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम उन मुस्लिम समुदायों के विरोध में नहीं हैं जो पहले से ही ओबीसी श्रेणी का हिस्सा हैं, विशेष रूप से वे जो पारंपरिक और व्यावसायिक पेशों से जुड़े हैं। हालांकि, हम एक पूरी तरह से नई सूची बनाने के सख्त खिलाफ हैं, जहाँ केवल धर्म के आधार पर आरक्षण दिया जा रहा है।
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए लक्ष्मण ने आरोप लगाया कि आज एआईएमआईएम (AIMIM) धर्म के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस धर्म और जाति के आधार पर समाज को बांटने और मजदूरों का शोषण करने का प्रयास कर रही है। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पूरे समाज को एकजुट करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की नीतियां एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस सहित हर वर्ग और समुदाय की सेवा करने और उन्हें लाभ पहुँचाने के लिए समर्पित हैं।
सदन की कार्यवाही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज मैंने राज्यसभा में ओबीसी आरक्षण का अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने रेखांकित किया कि डॉ. बीआर अंबेडकर ने संविधान में जिस सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए आरक्षण की परिकल्पना की थी, आज उसी संवैधानिक भावना और उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
गौरतलब है कि भाजपा पहले भी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा 2010-12 के बीच कुछ मुस्लिम समूहों को ओबीसी सूची में शामिल करने और कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुसलमानों को 4% आरक्षण देने के फैसले को लेकर सवाल उठाती रही है।

