मुंबई: सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली। हालांकि, फिर अचानक भारी बिकवाली के बाद बड़ी गिरावट भी दर्ज की गई। सोने की कीमतों में करीब 6% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी 8% तक टूट गई।
इस तरह सोना और चांदी दोनों ही अपनी अब तक की रिकॉर्ड ऊँचाई से तेजी से फिसले। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 के बाद यह सोने की कीमतों में सबसे बड़ी इंट्राडे (एक ही दिन में) गिरावट है।
सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
यूएस स्पॉट गोल्ड की कीमतें गुरुवार को 5.7% गिरकर 5,104.6 डॉलर (4,69,126 रुपये) प्रति औंस तक आ गईं, हालांकि बाद में कुछ नुकसान की भरपाई हुई। वैसे, रिकॉर्ड स्तर करीब 5,595 डॉलर (5,14,256 रुपये) प्रति औंस से अब सोना लगभग 8% नीचे आ चुका है। इसी बीच, अमेरिकी स्पॉट सिल्वर (चांदी) की कीमतों में 8% से ज्यादा की तेज गिरावट दर्ज की गई और भाव 106.8 डॉलर (9,817 रुपये) प्रति औंस तक टूट गए। हालांकि बाद में चांदी ने अपने कुछ नुकसान की भरपाई की और आखिरी बार यह करीब 1.5% की गिरावट के साथ कारोबार करती दिखी।
भारतीय बाजार के लिहाज से बात करें तो गुरुवार को सोने का दाम पहली बार 1.75 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया था। वहीं, चांदी की कीमत 3.80 लाख रुपए प्रति किलो हो गई थी।
बहरहाल, कल देखी इन तेजी और फिर गिरावट के बीच आज शुक्रवार को भी सोने और चांदी में गिरावट देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक सोना 1.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,250 डॉलर प्रति औंस और चांदी 3.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 110 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट क्यों?
विशेषज्ञों के मुताबिक सोने और चांदी की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें ऊँचे स्तरों पर मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और शेयर बाजारों में बिकवाली, जो दूसरे एसेट्स तक भी फैल गई, प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि 2025 की शुरुआत से सोने और चांदी में आई तेज रैली के बाद मौजूदा तेजी कुछ ज्यादा खिंची हुई और टिकाऊ नहीं लग रही थी। ऐसे में निवेशकों ने ऊँचे स्तरों पर मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया।
इसी साल जनवरी में ही सोने की कीमतों में लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि चांदी की कीमतों में 60% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ये उछाल 2025 में आई जबरदस्त तेजी के बाद है, जब सोना 65% और चांदी 148% तक उछली थी।
अमेरिकी डॉलर ने शुरुआती गिरावट से उबरते हुए 0.3% तक की बढ़त हासिल की, जिससे धातुओं पर दबाव बढ़ा। आमतौर पर डॉलर के मजबूत होने से धातुओं की मांग घटती है, क्योंकि डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं।
जानकार ये भी मानते हैं कि अमेरिकी शेयर बाजार में आई तेज गिरावट का असर अब दूसरे एसेट्स पर भी दिख रहा है। इसके चलते सोना, चांदी, इंडस्ट्रियल मेटल्स और बिटकॉइन समेत कई अन्य एसेट्स में जोरदार बिकवाली देखने को मिल रही है।
लाल निशान में खुला शेयर बाजार
इस बीच कमजोर ग्लोबल संकेतों से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:19 पर सेंसेक्स 444 अंक या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,100 और निफ्टी 157 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,261 पर था।
शुरुआती बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल और कमोडिटीज स्टॉक्स कर रहे थे। इस कारण सभी सूचकांको में निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज टॉप लूजर्स थे। आईटी, मीडिया, एनर्जी, पीएसई, रियल्टी, पीएसयू बैंक और डिफेंस इंडेक्स भी लाल निशान में थे। केवल हेल्थकेयर, फार्मा और एफएमसीजी हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में मारुति सुजुकी, इंडिगो, टाइटन, आईटीसी और सन फार्म गेनर्स थे। टाट स्टील, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एनटीपीस, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक लूजर्स थे। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली है।

