नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) का दफ्तर सील कर दिया। यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा न्यूज एजेंसी की जमीन आवंटन रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज किए जाने के कुछ ही घंटों बाद शुक्रवार (20 मार्च) शाम हुई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि 9- रफी मार्ग स्थित इस जमीन का ‘तुरंत कब्जा लिया जाए।’ अहम बात ये है कि यह जगह दिल्ली में बेहद प्राइम लोकेशन पर है। यह कई केंद्रीय मंत्रालयों की इमारतों सहित काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के मुख्यालय के भी काफी करीब स्थित है।
इस कार्रवाई पर यूएनआई की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा गया कि उसके कार्यालय को सील करने से ‘प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।’ साथ ही आरोप लगाया गया कि ‘कर्मचारियों को जबरन वहां से निकाला गया।’ यह भी कहा गया कि ‘दिल्ली पुलिस की टीमों द्वारा महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी की गई।’
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यूएनआई ने आवंटन से जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा करने में लगातार विफल रहने के बावजूद ‘प्राइम लैंड’ पर कब्जा बनाए रखा है। दरअसल, साल 2000 में जारी किए गए अलॉटमेंट की एक शर्त यह भी थी कि यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ मिलकर आवंटित प्लॉट पर दो साल के भीतर एक संयुक्त भवन बनाना था।
लेकिन यह शर्त पूरी नहीं होने पर, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद मार्च 2023 में जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘इस मामले के तथ्यों से यह स्थिति सामने आती है कि एक लाइसेंसधारी ने अपनी जिम्मेदारियां दशकों तक पूरी नहीं कीं और इस तरह एक कीमती सार्वजनिक जमीन को प्रभावी रूप से बंधक बनाकर रखा। ऐसा आचरण सार्वजनिक जमीन के आवंटन से जुड़े पूरे ढांचे की बुनियाद को प्रभावित करता है। इसलिए आवंटन रद्द किया जाना पूरी तरह उचित और कानूनी रूप से अपरिहार्य था।’
यूएनआई ने 2023 में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की थी। फरवरी 2025 में इसे द स्टेट्समैन लिमिटेड ने अपने कब्जे में ले लिया। यूएनआई के नए प्रबंधन ने अदालत को सूचित किया था कि वह अब निर्माण के लिए धन जुटाने के लिए ‘तैयार और सक्षम’ है। हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाया कि ’45 वर्षों से अधिक समय से लगातार गैर-निष्पादन’ को ‘पूर्वव्यापी रूप से ठीक या माफ नहीं किया जा सकता।’
400 करोड़ रुपये से ज्यादा है जमीन की कीमत
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस जमीन की अनुमानित कीमत 409 करोड़ रुपये आंकी गई है। अनुमान है कि इसकी संकेतात्मक दर 7.74 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है। रिपोर्ट के अनुसार यूएनआई कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस से भी गुजरी, जिसके बाद फरवरी 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने ‘द स्टेट्समैन’ द्वारा प्रस्तुत 72 करोड़ रुपये के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी।
सरकारी सूत्र ने कहा, ‘इससे बिना पट्टादाता की पूर्व मंजूरी के ही आवंटी का प्रभावी स्वामित्व और प्रबंधन नियंत्रण एक निजी व्यावसायिक संस्था को हस्तांतरित हो गया।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी
सूत्र ने यह भी तर्क दिया कि ‘यह आवंटन एक गैर-लाभकारी राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी को एक विशेष संस्थागत उद्देश्य के लिए किया गया था, लेकिन अब एक लाभ कमाने वाली व्यावसायिक संस्था के जुड़ने से आवंटी का चरित्र, उद्देश्य और पात्रता मूल रूप से बदल गई है, जिससे मूल आवंटन का आधार ही कमजोर हो गया है।’
UNI को 45 साल पहले आवंटित जमीन की कहानी क्या है?
यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) को 1979 में भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा 9, रफी मार्ग स्थित यह जमीन आवंटित की गई थी। इसका उद्देश्य पांच मीडिया संगठनों के दफ्तरों के लिए एक संयुक्त कार्यालय परिसर का निर्माण करना था।
हालांकि यह योजना पूरी नहीं हो सकी और बाद में 1986 में एक संशोधित आवंटन पत्र जारी किया गया। इसमें यह प्रावधान किया गया कि इस परिसर में तीन मीडिया संगठन – यूएनआई, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन मौजूद होंगे।
यह योजना भी पूरी नहीं हो सकी और 1999 में विभाग ने एक और आवंटन पत्र जारी किया। इसके बाद जून 2000 में एक संशोधित पत्र जारी किया गया। इस पत्र के तहत 5,289.52 वर्ग मीटर जमीन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) को समान रूप से आवंटित की गई थी, ताकि दोनों संगठनों के लिए एक संयुक्त कार्यालय भवन बनाया जा सके। साल 2012 में इस संयुक्त भवन के निर्माण को मंजूरी भी दे दी गई थी, जिसे NBCC के जरिए बनाया जाना था, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई।
यह भी पढ़ें- LPG संकट: राज्यों को मिलेगा 20% ज्यादा गैस, आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया; 23 मार्च से नई व्यवस्था

