Friday, March 20, 2026
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रेखा गुप्ता को दिल्ली का ताज, क्यों सीएम रेस में पिछड़ गए प्रवेश वर्मा?

नई दिल्ली: भाजपा की रेखा गुप्ता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। बुधवार को बीजेपी के दिल्ली प्रदेश कार्यालय में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधायक दल की बैठक में उनको सर्वसम्मति से नेता चुना गया। बताया जाता है कि रेखा गुप्ता के नाम का प्रस्ताव खुद प्रवेश वर्मा, विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय ने रखा। मालूम हो कि दिल्ली सीएम फेस को लेकर मीडिया में चल रही खबरों में प्रवेश वर्मा का नाम भी शामिल था। लेकिन आज इन वजहों के चलते दिल्ली सीएम की रेस में रेखा गुप्ता से पिछड़ गए प्रवेश वर्मा। 

आधी आबादी को साधा 

महिलाएं बीजेपी का कोर वोटर मानी जाती हैं। राज्य दर राज्य बीजेपी की जीत के पीछे महिला मतदाताओं का निर्णायक रोल माना जाता है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) की बात करते हैं। बीजेपी भी हर चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संसद से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उपलब्धि के तौर पर लेकर जाती है लेकिन पार्टी की सरकार वाले किसी भी राज्य में सरकार की कमान किसी महिला के हाथ में नहीं थी। राजस्थान में जीत के बाद पार्टी ने पूर्व सीएम वसुंधरा की जगह भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया जिन्हें सीएम का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था। अब बीजेपी ने दिल्ली में महिला सीएम देकर पूरे देश की महिलाओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि हमने राष्ट्रीय राजधानी की सरकार की कमान एक महिला को दी है।

वैश्य समाज का नहीं था कोई सीएम 

विश्लेषकों की मानें तो आम आदमी पार्टी का एक बड़ा समर्थक वर्ग वैश्य समाज से था। इस समाज से केजरीवाल को पूरे देश में न केवल समर्थन मिलता था वरन चंदा भी आता था। अरविंद केजरीवाल ने भी खुद को महाजन समाज के आइकॉन के तौर पर पेश किया। केजरीवाल की सियासत में इस समाज का बड़ा रोल माना जाता है। अब भाजपा ने वैश्य समुदाय से ही आने वाली रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर अपने पुराने वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। दूसरी बात यह भी कि रेखा गुप्ता के परिवार से कोई राजनीति में नहीं है।

परिवारवाद भी बड़ी वजह 

माना जा रहा है कि भाजपा ने प्रवेश वर्मा की जगह रेखा गुप्ता को सीएम बनाकर परिवारवाद से भी परहेज करने की कोशिश की है। प्रवेश वर्मा पूर्व सीएम साहेब सिंह वर्मा के बेटे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा प्रवेश वर्मा को सीएम बनाती तो उस पर विपक्षी परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते। सनद रहे खुद पीएम मोदी परिवारवाद को हथियार बनाते हुए विपक्षी दलों पर जोरदार हमले करते रहे हैं। ऐसे में यदि प्रवेश वर्मा को सीएम बनाया जाता तो विपक्षी दल भाजपा पर ही परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते।

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