Friday, March 20, 2026
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कौन है मौलवी इरफान? फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल का ‘मास्टरमाइंड’,मेडिकल छात्रों को पढाता था कट्टरपंथ का पाठ

दिल्ली धमाके के तार फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसका सरगना मौलवी इरफान अहमद बताया जा रहा है। उसे जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले से गिरफ्तार किया गया है। ऐसे आरोप है कि उसी ने कई डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाया।

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के एक मौलवी इरफान अहमद वाघा को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली से सटे फरीदाबाद के पास विस्फोटकों के बड़े जखीरे और लाल किले के पास हुए विस्फोट के ठीक बाद कई एजेंसियां पूरे आतंकी मॉड्यूल की जाँच में जुटी है।

अधिकारियों के अनुसार काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने श्रीनगर पुलिस के साथ मिलकर देर रात मौलवी इरफान के आवास पर छापेमारी के दौरान उसे और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया। इस दंपति पर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को कट्टरपंथी बनाने और आतंकी कामों के लिए भर्ती करने का आरोप है, जिनमें फरीदाबाद में उजागर हुए तथाकथित ‘आतंकी मॉड्यूल’ से जुड़े लोग भी शामिल हैं। साथ ही घाटी के कई युवक भी शामिल हैं।

अधिकारियों का मानना ​​है कि वाघा ने उस नेटवर्क को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसने कश्मीर के कुछ आरोपियों के तार दिल्ली कार विस्फोट की साजिश से जोड़े हैं। अब तक मौलवी इरफान अहमद वाघा के बारे में जो कुछ हम जानते हैं, वह ये है कि उसका कथित नेटवर्क दिल्ली विस्फोट से जुड़ा हो सकता है। आखिर क्या भूमिका रही है वाघा की और वो कैसे युवकों को कट्टरपंथ से जोड़ता था…जानने की कोशिश करते हैं।

इरफान अहमद कैसे युवाओं को बनाथा था कट्टरपंथी?

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इरफान अहमद वाघा पहले श्रीनगर के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल स्टाफ के रूप में काम करता था। इस दौरान, वह कई छात्रों के संपर्क में आया जो नियमित रूप से नौगाम की एक मस्जिद में जाते थे।

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सूत्रों ने बताया कि इरफान ने धीरे-धीरे इन छात्रों, जिनमें फरीदाबाद में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे कुछ छात्र भी शामिल थे, उन्हें कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित करना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार उसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से प्रेरणा मिलती थी।

एक सूत्र ने बताया, ‘वह जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से प्रेरित था और छात्रों को वीडियो दिखाता था। वह वीओआईपी (इंटरनेट से बातचीत) पर अफगानिस्तान में किसी से बात कर रहा था।’

जांचकर्ताओं ने बताया है कि इरफान कई टेलीग्राम और थ्रीमा अकाउंट (Threema) चलाता था, जिनका इस्तेमाल वह टार्गेट वाले युवाओं के बीच जैश का की नफरती बातों के प्रचार को फैलाने के लिए करता था। रिपोर्ट के अनुसार, ‘वह छात्रों को अफगान युद्ध के दौरान के भाषण भी दिखाता था।’

अधिकारियों को संदेह है कि इरफान को अफगानिस्तान के नंगरहार स्थित आतंकवादी आकाओं से वैचारिक मार्गदर्शन और एन्क्रिप्टेड वॉयस निर्देश प्राप्त हुए थे।

आगे की जाँच में इरफान की पत्नी की संलिप्तता का भी पता चला है। उसने कथित तौर पर शाहीन शाहिद नाम की एक डॉक्टर को कट्टरपंथी बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिस पर भारत में जैश के जमात-उल-मोमिनात नाम के एक महिला विंग को बनाने का आरोप है। लखनऊ की शाहीन शाहिद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है और उसका नाम भी दिल्ली में हुए कार विस्फोट के पीछे के सूत्रधारों में सामने आ रहा है।

सूत्रों ने बताया, ‘शाहीन एक सूत्रधार थी, लेकिन दिमाग इरफान का था।’ रिपोर्ट के अनुसार इसी मॉड्यूल से जुड़े मुजम्मिल और उमर, जो दिल्ली विस्फोट से भी जुड़े हैं, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगे थे। कथित तौर पर दंपति के घर से जब्त किए गए फोनों में संदेश और निर्देश थे, जिनमें भर्ती करने वालों से कट्टरपंथी लक्ष्यों को हासिल करने और नेटवर्क का विस्तार करने को कहा गया था।

ऐसे जांच दर जांच खुलती गई परतें

मौलवी इरफान अहमद वाघा तक पहुँचने का रास्ता तब शुरू हुआ जब 19 अक्टूबर को नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के नाम वाले पोस्टर दिखाई दिए। खुफिया एजेंसियों ने तुरंत जाँच शुरू की और पत्थरबाजी के अपने इतिहास के लिए जाने जाने वाले तीन सक्रिय कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान, तीनों ने मौलवी इरफान से अपने संबंधों का खुलासा किया, जिससे वह सुरक्षा एजेंसियों की रडार में आया। इसके बाद डॉ. अदील अहमद राथर और जमीर अहंगर को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें मौलवी का करीबी माना जाता है।

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आगे की पूछताछ से पुलिस को एक और प्रमुख व्यक्ति, डॉ. मुजम्मिल, का पता लगाने में मदद मिली, जो कथित तौर पर फरीदाबाद में इरफान के कमरों से काम कर रहा था। मुजम्मिल दिल्ली से करीब धौज गाँव स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय में डॉक्टर के रूप में काम करता था, वही जगह जहाँ इस हफ्ते की शुरुआत में एक बड़ी विस्फोटक खेप बरामद हुई थी।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इरफान के नेटवर्क में मोहम्मद उमर भी शामिल था, जिस पर फरीदाबाद मॉड्यूल का पर्दाफाश होने के बाद दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट को अंजाम देने का संदेह है।

जब सुरक्षा बलों ने और छापेमारी की तो उन्हें भारी मात्रा में विस्फोटक सामान बरामद हुआ। इसमें 350 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, बम बनाने का सामान, हथियार और एक एके-47 राइफल जैसी चीजें शामिल हैं। फरीदाबाद के फतेहपुर तगा गाँव में, जो वहाँ से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है, वहां अधिकारियों ने 2,563 किलोग्राम संदिग्ध विस्फोटक बरामद किए।

जाँचकर्ताओं का मानना ​​है कि धमाके की योजना सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं थी। सूत्रों के अनुसार कई राज्यों में धमाके की योजना तैयार की जा रही थी। इसका उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में जैश प्रमुख मसूद अजहर के परिवार की हत्या का बदला लेने के लिए भारत को इस आग में झोंकना था।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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