ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई देश के सर्वोच्च पद को संभालने के लिए सबसे आगे चल रहे दावेदार के रूप में उभरे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। वहीं, इजराइली मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि मोजतबा के नाम पर ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट ने मुहर लगा दी है।
36 वर्षों तक देश पर शासन करने वाले खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में मौत हो गई थी। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती भी मारे गए। खामेनेई की पत्नी, मंसूरेह खोजास्तेह बघेरजादेह की भी हमलों में लगी चोटों के कारण मौत हो गई है।
बहरहाल न्यूयॉर्क अखबार ने तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था- असेंबली ऑफ एक्सपर्ट ने मंगलवार को उत्तराधिकार पर विचार-विमर्श करने के लिए बैठक की। मोजतबा खामेनेई को ‘स्पष्ट रूप से सबसे आगे’ बताया गया, हालांकि अंतिम घोषणा पर अभी विचार चल रहा है।
खबरों के मुताबिक, कुछ ने चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग के बीच उन्हें जल्दबाजी में उत्तराधिकारी घोषित करने से वे निशाना बन सकते हैं।
इस बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में बताया कि खामेनेई को पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा और तेहरान में एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। हालांकि, दफनाने की तारीख अभी तक घोषित नहीं की गई है। खामेनेई का कोई नामित उत्तराधिकारी नहीं था। अयातुल्ला अलीरेजा अराफी, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और चीफ जस्टिस गुलामहुसैन मोहसेनी एजेई सहित तीन सदस्यीय ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने अगले उत्तराधिकारी के चुने जाने तक सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियों को संभाला है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
56 साल के मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। वह अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। उनका बचपन उन वर्षों में बीता जब उनके पिता ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले शाह का विरोध करने में सक्रिय थे। ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ नेताओं से इतर मोजतबा को कोई उच्च-स्तरीय धार्मिक विद्वान नहीं माना जाता। उन्होंने कभी कोई निर्वाचित पद भी नहीं संभाला है और न ही उनके पास सरकार में कोई औपचारिक पद है। हालांकि, व्यापक रूप से माना जाता है कि पर्दे के पीछे उनका काफी प्रभाव रहा है। खासकर ईरान में शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ उनके करीबी संबंध चर्चा में रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के धार्मिक नेताओं पर मोजतबा के समर्थन के लिए काफी दबाव डाला।
उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान लड़ाई भी लड़ी और बाद में अपने पिता के कार्यालय के कुछ हिस्सों के प्रबंधन में शामिल हो गए। 2019 में अमेरिका ने उन पर यह आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया कि उन्होंने कोई औपचारिक पद न होते हुए भी सुप्रीम लीडर की ओर से आधिकारिक क्षमता में कार्य किया।
बहरहाल, अगर मोजतबा की नियुक्ति होती है तो इसे ऐतिहासिक माना जाएगा, क्योंकि ईरान की नेतृत्व व्यवस्था लंबे समय से वंशानुगत शासन के विचार को खारिज करती रही है। साथ ही, पिता से बेटे को सत्ता का हस्तांतरण शिया धार्मिक समुदायों के बीच परंपरागत रूप से अनुकूल या स्वीकार्य नहीं माना जाता।
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ईरान विशेषज्ञ अली नसर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि अगर मोजतबा को शीर्ष पद पर लाया जाता है, तो यह इस बात का संकेत होगा कि ‘अब सत्ता पर शासन के भीतर रिवोल्यूशनरी गार्ड के कहीं अधिक कट्टरपंथी धड़े का नियंत्रण हो गया है।’
बता दें कि ईरान में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 सदस्यों वाली एक संस्था है और इसके सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं। यह संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर की नियुक्ति करने और उनकी निगरानी करने की जिम्मेदारी रखती है। इस्लामिक रिपब्लिक के इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार होगा जब यह संस्था किसी नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी।

