Friday, March 20, 2026
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राहुल गांधी ने किस किताब का किया जिक्र जिस पर संसद में मचा हंगामा, क्या है इसमें?

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से लिए गए अंश पढ़े। इसी को लेकर हंगामा शुरू हुआ। इस किताब के कुछ अंश एक पत्रिका ने प्रकाशित किए हैं।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र करने पर सोमवार को लोकसभा में हंगामा मच गया। अध्यक्ष ओम बिरला ने इस दौरान बार-बार सदस्यों को नियमों की याद दिलाई कि ऐसी सामग्री जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, उसका उद्धरण नहीं दिया जा सकता।

दरअसल, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से लिए गए अंश पढ़े। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर तुरंत आपत्ति जताते हुए सदन को बताया कि कोई भी ऐसी किताब से उद्धरण नहीं दे सकता जो अभी प्रकाशित ही न हुई हो।

नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक में क्या है?

यह पुस्तक अभी तक आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है और रक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी समीक्षा की जा रही है। हालांकि, ‘द कैरावैन’ पत्रिका ने अभी तक अप्रकाशित इस किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं, जिनमें कथित तौर पर चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर लिए गए निर्णयों और आपसी बातचीत का विवरण है।

पत्रिका की ओर सोमवार (2 फरवरी) की सुबह किए गए एक ट्वीट में रिपोर्ट की शुरुआत अगस्त 2020 की एक कथित घटना से हुई है, और पत्रिका द्वारा साझा की गई पोस्ट में भी गलवान का जिक्र था। हालांकि, राहुल गांधी ने संसद में अपने भाषण में डोकलाम का उल्लेख किया था।

भारत, चीन और भूटान के त्रिकोणीय जंक्शन पर स्थित डोकलाम 2017 में भारत-चीन गतिरोध का केंद्र बना था। वहीं, जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों पक्षों के बीच घातक झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। 1962 के बाद यह पहली बार था जब लद्दाख में भारत-चीन बॉर्डर पर सैनिकों की मौत हुई थी। इस झड़प में चीन के भी कई सैनिकों के मारे जाने की खबरें आई थी, लेकिन बीजिंग ने कभी स्पष्ट संख्या जारी नहीं की।

बहरहाल, ‘द कैरावैन’ के एक्स पोस्ट में कहा गया कि ‘जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के दौरान जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के प्रमुख थे। इस झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए और भारत ने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण खो दिया।

गलवान की यह घटना 1962 के युद्ध के बाद लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पहली ऐसी झड़प थी, जिसमें सैन्य मौतें हुईं। इस घटना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ा संकट पैदा किया और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर लंबे समय तक असर डाला।’

पोस्ट में आगे यह भी कहा गया कि आधिकारिक पुष्टि के अभाव में मई 2020 के बाद से पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा किए गए क्षेत्रीय कब्जे की सही मात्रा का आकलन करना मुश्किल है। हालांकि, इसमें कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी के हवाले से कहा गया, ‘चीन न सिर्फ हमारी जमीन पर क़ब्ज़ा कर रहा है, बल्कि हर साल भारतीय क्षेत्र के भीतर और गहराई तक घुसता जा रहा है।’

राहुल गांधी-राजनाथ सिंह में बहस

भाषण के दौरान ही राजनाथ सिंह ने ससंद में राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और उनके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। रक्षा मंत्री ने सवाल किया कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, क्या वह वास्तव में प्रकाशित हुई है या नहीं?

राजनाथ सिंह ने कहा कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसके आधार पर बयान देना ठीक नहीं है। इस पर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।

स्पीकर ने राहुल गांधी से अपने स्रोत को प्रमाणित करने के लिए कहा। इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया कि यह किताब सरकार द्वारा प्रकाशित नहीं होने दी जा रही है, लेकिन यह ‘सौ फीसदी ऑथेंटिकेटेड’ है।

इस पर राजनाथ सिंह ने फिर कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ही नहीं है।

इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने खुद ही विवाद खत्म कर दिया है, क्योंकि वह मान रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है।

स्पीकर ओम बिरला ने सदन को याद दिलाया कि अखबार की कटिंग या अप्रकाशित किताबों पर चर्चा करने की परंपरा नहीं रही है और सदन की कार्यवाही नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है। उन्होंने राहुल गांधी से आगे बढ़ने के लिए कहा।

राहुल गांधी ने कहा कि वह यह मुद्दा उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन जब कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए गए, तो उन्हें इसका जवाब देना पड़ा। इसके बाद उन्होंने फिर से मनोज नरवणे की किताब का जिक्र किया।

स्पीकर ने दोहराया कि सदन में बोलने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार नियमों और परंपराओं के तहत ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में हंगामा होता रहा।

राहुल के भाषण के बाद भाजपा ने क्या कहा?

राहुल गांधी के भाषण पर हंगामे के बीच बीजेपी की ओर से नरवणे की ओर से दिए गए एक पुराने बयान को साझा किया गया। बीजेपी की ओर से एक वीडियो शेयर किया गया। साथ ही कहा गया कि इसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे स्पष्ट रूप से कहा है कि भूमि का एक इंच भी खोया नहीं है। हम ठीक वहीं हैं जहां हम थे।

भाजपा ने कहा कि झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए राहुल गांधी ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और एक पूर्व सेना प्रमुख को अपनी गंदी राजनीति में घसीट लिया। वो भी एक ऐसी किताब के जरिए जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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