तिरुवनंतपुरमः कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार, 13 दिसंबर को केरल के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों का स्वागत करते हुए परिणामों को स्पष्ट जनादेश और राज्य के लोकतांत्रिक लोकाचार का उत्सव बताया। इस दौरान उन्होंने तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत को लेकर भी बयान दिया। थरूर ने इसे ‘उल्लेखनीय बदलाव’ करार दिया है।
शशि थरूर ने एक्स पर एक पोस्ट में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को बेहतरीन प्रदर्शन की बधाई दी और कहा कि इससे आगामी केरल विधासभा चुनावों से पहले एक मजबूत संकेत मिलता है।
शशि थरूर क्या बोले?
थरूर ने कहा “केरल के स्थानीय स्वशासन चुनावों में आज का दिन आश्चर्यजनक परिणामों से भरा रहा! जनादेश स्पष्ट है, और राज्य की लोकतांत्रिक भावना स्पष्ट रूप से झलकती है।”
उन्होंने कहा कि यूडीएफ का प्रदर्शन निरंतर परिश्रम, सशक्त राजनीतिक संदेश और मौजूदा सत्ता-विरोधी लहर का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन ने 2020 के स्थानीय निकाय चुनावों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।
इस दौरान थरूर ने राज्य की राजधानी में भाजपा की सफलता को भी स्वीकार किया और तिरुवनंतपुरम नगर निगम में पार्टी के “ऐतिहासिक प्रदर्शन” और “महत्वपूर्ण जीत” के लिए उसे बधाई दी।
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थरूर ने कहा कि मैं तिरुवनंतपुरम में भाजपा के ऐतिहासिक प्रदर्शन को भी स्वीकार करना चाहता हूं और नगर निगम में उनकी महत्वपूर्ण जीत पर उन्हें हार्दिक बधाई देना चाहता हूं – यह एक सशक्त प्रदर्शन है जो राजधानी के राजनीतिक परिदृश्य में एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है। मैंने 45 वर्षों के एलडीएफ के कुशासन से मुक्ति के लिए चुनाव प्रचार किया था लेकिन मतदाताओं ने अंततः एक ऐसी पार्टी को पुरस्कृत किया है जिसने शासन में स्पष्ट बदलाव की मांग की थी।
उन्होंने आगे कहा कि यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। जनता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए, चाहे वह यूडीएफ के पक्ष में हो या फिर मेरे निर्वाचन क्षेत्र (तिरुवनंतपुरम) भाजपा के पक्ष में।
तिरुवनंतपुरम में भाजपा की फतह, एलडीएफ का ढहा किला
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। स्थानीय चुनावों के लिए शनिवार, 13 दिसंबर को सुबह 8 बजे से नगर निगम चुनाव की मतगणना शुरू हुई। नगर निगम के 101 सदस्यों में भाजपा ने 50 वार्डों में जीत दर्ज की जो कि बहुमत से सिर्फ एक कम है।
वहीं, सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को इन चुनावों में एक बड़ा झटका लगा है। उसे सिर्फ 29 सीटों पर जीत मिल सकी जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को 19 वार्डों पर जीत मिली। दो सीटों पर स्वतंत्र उम्मीदवारों ने जीत हासिल की और एक सीट पर चुनाव रद्द कर दिए गए थे क्योंकि पिछले हफ्ते एक उम्मीदवार की मौत हो गई थी।
तिरुवनंतपुरम में भाजपा ने जीत हासिल की, हालांकि पूरे राज्य में यूडीएफ ने कुल 7,869 वार्डों पर कब्जा जमाया। वहीं, सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ को 6,505 वार्डों पर जीत मिली जबकि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए को 1,426 वार्डों पर जीत मिली।
केरल के स्थानीय चुनावों में यूडीएफ की जीत को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अहम माना जा रहा है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास भरेगा। केरल में 2026 में अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं। ऐसे में इस चुनाव में काफी कम समय बचा है जो यूडीएफ के लिए अच्छा साबित हो सकता है, वहीं राजधानी में भाजपा की जीत एनडीए कार्यकर्ताओं को भी आत्मविश्वास से भर देगा। इससे भाजपा के लिए भी आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के संकेत मिलते हैं।

