Friday, March 20, 2026
Homeभारतममता बनर्जी के लिए भबानीपुर 'चक्रव्यूह' तो नहीं बनने जा रहा? कौन-कौन...

ममता बनर्जी के लिए भबानीपुर ‘चक्रव्यूह’ तो नहीं बनने जा रहा? कौन-कौन से फैक्टर बढ़ाएंगे दीदी की चुनौती

भबानीपुर सीट 2011 से ही तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रही है। भाजपा इस छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले ही भाजपा भबानीपुर को बड़ा चुनावी मैदान बना चुकी है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं। बंगाल में कई सीटें चुनाव के लिहाज से अहम होंगी लेकिन एक सीट पर अभी से सभी की नजरें गड़ गई हैं। यह सीट है दक्षिणी कोलकाता का भबानीपुर, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तृणमूल में कभी नंबर दो का स्थान रखने वाले और पिछले पांच सालों में भाजपा के अहम चेहरा बन चुके सुवेंदु अधिकारी चुनौती देंगे। पिछली बार भी नंदीग्राम सीट पर दोनों आमने-सामने थे और ममता को हार का सामना करना पड़ा था।

इस बार ममता नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी। तृणमूल ने नंदीग्राम से इस बार हाल में तृणमूल में शामिल हुए पबित्र कर को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी दोनों सीटों यानी नंदीग्राम और भबानीपुर से ताल ठोकेंगे।

नंदीग्राम सुवेंदु अधिकारी का गृह क्षेत्र है। इसके बावजूद उन्हें भबानीपुर से भी भाजपा द्वारा मैदान में उतारना सीधे-सीधे ममता बनर्जी के लिए एक खुली चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी दशकों से दक्षिण कोलकाता के चुनावी मैदान पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री बनने और सीट खाली करने से पहले ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता की लोकसभा सीट लगातार छह बार जीती थी। यही नहीं, 2021 में नंदीग्राम में अधिकारी के खिलाफ हार के बाद ममता उपचुनाव में भबानीपुर से ही जीत हासिल कर विधानसभा पहुंची थी।

इस लिहाज से देखें तो ममता की पकड़ भबानीपुर में मजबूत नजर आती है। लेकिन इस बार समीकरण कुछ मायनों में ममता के लिए चुनौती भी बन सकते हैं। इसे समझने की कोशिश करते हैं। साथ ही अधिकारी को भबानीपुर से भी मैदान में उतारने के पीछे भाजपा की क्या रणनीति है, ये भी जानने की कोशिश करेंगे। एक कहानी भबानीपुर के डेमोग्राफी की भी है। इसके अलावा इन सबके बीच ममता से अलग हो चुके और बाबरी मस्जिद बनवाने में जुटे हुमायूं कबीर के फैक्टर को भी देखना होगा। आईए इन सब पर नजर डालते हैं।

भबानीपुर में ममता के लिए चक्रव्यूह बना रही भाजपा?

सुवेंदु अधिकारी को उतारने के लिए पीछे भाजपा के लिए एक ये रणनीति सीधी-सादी हो सकती है कि ममता को चुनाव में भबनीपुर तक ही सीमित रखा जाए। सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ पिछला रिकॉर्ड देखते हुए ममता पर जाहिर तौर पर अपनी सीट बचाने का दबाव होगा।

भाजपा के इस कदम से ममता की भबनीपुर में कम समय बिताने और पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में जहां विशेषकर मुकाबला कड़ा है, चुनाव प्रचार करने की योजना पर असर पड़ सकता है। ममता तृणमूल की सबसे बड़ी प्रचारक होंगी और हर उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र में उनकी उपस्थिति से अपनी जीत की संभावनाओं को मजबूत करने की उम्मीद करेगा। भाजपा इस संतुलन को बिगाड़ने का पूरा प्रयास करेगी।

भबानीपुर और नंदीग्राम- दोनों ही सीटों से अधिकारी को मैदान में उतारकर भाजपा का उद्देश्य तृणमूल नेतृत्व पर लगातार दबाव बनाना है। यह सिर्फ चुनावी दांव नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दांव भी है। अगर सुवेंदु अधिकारी हार जाते हैं, तो यह भाजपा विधायक के लिए एक बड़ा झटका होगा। लेकिन अगर ममता बनर्जी हारती हैं, तो यह बंगाल की मुख्यमंत्री के लिए लगातार दूसरा झटका होगा।

यहां इस पर भी गौर करना चाहिए कि पहले भाजपा की लिस्ट आई और उसके बाद तृणमूल ने अपनी सूची जारी की। भाजपा की लिस्ट देखने के बाद अगर ममता भबनीपुर से चुनाव नहीं लड़तीं, या कोई बदलाव किया जाता तो भाजपा को बंगाल की मुख्यमंत्री को ‘भगौड़ा’ के रूप में पेश करने का मौका मिल जाता। इसके अलावा इससे तृणमूल कांग्रेस के मनोबल पर भी असर पड़ सकता था। हालांकि, आखिरकार ममता ने भबनीपुर से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया।

भबानीपुर की डेमोग्राफी भी डालेगी असर?

जानकार बताते हैं कि भबनीपुर कोलकाता की आम सीट नहीं है। इसे अक्सर ‘मिनी भारत’ कहा जाता है। इसका कारण यह है कि यहाँ के लगभग 40% मतदाता गैर-बंगाली समुदायों से हैं। इनमें मुख्य रूप से गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और उड़िया शामिल हैं। भबनीपुर सीट पर मुस्लिम आबादी लगभग 20% है।

ऐतिहासिक रूप से, इस डेमोग्राफी ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया है। लेकिन अब भाजपा को गैर-बंगाली कारोबारी समुदायों में एक अवसर नजर आ रहा है, जिन्हें अक्सर भाजपा की ओर झुकाव रखने वाला माना जाता रहा है। एक संभावना ये भी है कि तृणमूल की ‘बाहरी’ वाली बयानबाजी ने भी इन समुदायों के मतदाताओं को भाजपा की ओर धकेला है।

इसके अलावा मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेसिव रिव्यू (SIR) से भी भबनीपुर चुनाव में एक अलग मोड़ दिख सकता है। एसआईआर के दौरान भबनीपुर से 47,000 से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 14,000 नामों की जांच जारी है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि ये नाम डुप्लिकेट या अमान्य थे, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने वैध मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने इसे भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से रची गई साजिश बताया है।

बाबरी मस्जिद बना रहे हुमांयू कबीर भी खड़ा करेंगे उम्मीदवार

भबानीपुर सीट पहले ही हॉट सीट बन गई है। मुकाबला कड़ा है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व नेता और अब अपनी नई पार्टी- आम जनता उन्नयन पार्टी बना चुके हुमांयू कबीर ने भी भबानीपुर सीट को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। कबीर हाल में मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने की अपनी योजना को लेकर सुर्खियों में रहे थे।

कबीर ने कहा है कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसमें भबानीपुर भी शामिल है। हुमांयू कबीर ने कहा है कि भबानीपुर से उनकी पार्टी गैर-बंगाली मुस्लिम पूनम बेगम को अपना उम्मीदवार बनाने जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भबानीपुर में एक मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारने का कबीर का फैसला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट बैंक को भले ही मामूली रूप से लेकिन नुकसान पहुंचाने का एक प्रयास भी हो सकता है।

भबानीपुर में किस करवट बैठेगा ऊंट?

भाजपा की भबानीपुर में अपनाई गई रणनीति कितनी सफल होगी, यह अभी देखना बाकी है। जाहिर तौर पर चुनाव के बाद ही सबकुछ साफ होगा। लेकिन उसने तृणमूल के लिए रास्ता मुश्किल जरूर बना दिया है। नंदीग्राम में हारने के बाद 2021 के उपचुनाव में, ममता ने भबानीपुर में 58,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी।

यह सीट 2011 से ही तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रही है। भाजपा इस छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले ही भाजपा भबानीपुर को बड़ा चुनावी मैदान बना चुकी है।

बताते चलें कि तृणमूल ने बंगाल में 294 सीटों पर दो चरण में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 291 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। साथ ही पार्टी ने ये भी साफ कर दिया है कि वो दार्जलिंग में तीन सीटों पर भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के साथ समझौते के तहत चुनाव नहीं लड़ेगी। भाजपा ने 144 सीटों के लिए अभी उम्मीदवारों की घोषणा की है।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments