कोलकाताः पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने बुधवार (18 मार्च) को पांच उपमहानिरीक्षक रैंक के पुलिस अधिकारियों समेत 11 जिलाधिकारियों का भी तबादला कर दिया है।
गौरतलब है कि डीएम राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी की भी भूमिका निभा रहे हैं।
सीएम ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र
चुनाव आयोग ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखकर भविष्य में ऐसे एकतरफा उपायों से परहेज करने का आग्रह किया था।
चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला को इन तबादलों के बारे में लिखा। इनमें डीआईजी रैंक के अधिकारी अमित कुमार भरत, अजीत सिंह यादव, श्रीहरि पांडे, कंकर प्रसाद बरुई और अंजलि सिंह को क्रमशः रायगंज, मुर्शिदाबाद, बर्धमान, प्रेसिडेंसी और जलपाईगुड़ी में तैनात करने के लिए कहा है।
ये सभी अपने पांच समकक्षों निम्बालकर संतोष उत्तमराव, सुधीरकुमार नीलाकांतम, आलोक राजोरिया, भोलानाथ पांडे और भास्कर मुखोपाध्याय की जगह लेंगे। इन सभी की तैनाती 19 मार्च को तत्काल प्रभाव से की जाएगी।
इसके साथ ही 11 नए जिलाधिकारियों की भी तैनाती की जाएगी। जिन जिलों में नए जिलाधिकारियों की तैनाती की जाएगी, उनमें दार्जीलिंग, अलीपुरदुआर, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नादिया, पूर्बा बर्धमान, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने क्या निर्देश दिए?
चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को चुनाव से संबंधित कोई भी पोर्टफोलियो नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने के विरोध में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार (16 मार्च) रात को मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा था, “यह गहरी चिंता और आश्चर्य की बात है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2026 के आम चुनाव की घोषणा करने वाली प्रेस विज्ञप्ति जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर पश्चिम बंगाल राज्य के प्रशासनिक तंत्र के प्रमुखों को हटा दिया गया।”
उन्होंने कहा कि “यह मनमाने ढंग से किया गया है, राज्य सरकार से अधिकारियों का कोई पैनल गठित किए बिना और पिछली चुनावों के दौरान चुनाव आयोग-राज्य संस्थागत कामकाज को निर्देशित करने वाली स्थापित परंपरा का पालन किए बिना। यह सहकारी संघवाद की भावना और हमारी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के सिद्धांतों को भी कमजोर करता है, जो संवैधानिक शासन का एक मूलभूत पहलू हैं।”
चुनाव आयोग ने रविवार (15 मार्च) राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद प्रशासनिक पदों पर फेरबदल किया था।
आचार संहिता लागू होने के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और शीर्ष पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया था।
मुख्य सचिव, गृह सचिव और शीर्ष पुलिस अधिकारियों का तबादला
चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती की जगह दुष्यंत नरियाला को नियुक्त किया। वह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वहीं, संघमित्रा घोष को जगदीश प्रसाद मीणा की जगह पर नया गृह सचिव नियुक्त किया गया।
घोष 1997 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और बंगाल की पहली पहली गृह सचिव बनी हैं।
चुनाव आयोग ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पीयूष पांडे और पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार समेत कई शीर्ष पुलिस अधिकारियों का भी तबादला किया था।
चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को सिद्ध नाथ गुप्ता को पुलिस महानिदेशक और प्रभारी पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त करने का निर्देश दिया, जबकि नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, आयोग ने अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) और कानून एवं व्यवस्था महानिरीक्षक तथा अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात करने का आदेश दिया।
पश्चिम बंगाल चुनाव पूर्व और चुनाव पश्चात के दौरान हिंसा और आगजनी के लिहाज से सबसे संवेदनशील राज्यों में से एक है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने टिप्पणी की कि मुख्य सचिव का निष्कासन पश्चिम बंगाल के स्वतंत्रताकाल के बाद से इतिहास में अभूतपूर्व है।

