Friday, March 20, 2026
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खेती बाड़ी-कलम स्याही: ममता बनर्जी के गढ़ पर भाजपा की नजर!

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। यहां 27 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटरों पर सबकी निगाह है। तृणमूल पार्टी लगातार मुसलमानों को अपने पाले में करने में जुटी हुई हैं, लेकिन बीते कुछ समय से सीएम ममता बनर्जी ने कुछ फैसले ऐसे लिए हैं, जो मुस्लिम समुदाय को असहज कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के 294 सीट के लिए अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। यह चुनाव बंगाल के साथ में देश की राजनीति को आकार देगा।

आगामी बंगाल चुनाव को जीतकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में चौथी बार सत्ता पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रही हैं। दूसरी तरफ बीजेपी सालों से मेहनत करके बंगाल में अपने पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कोशिश में जुटी है। भाजपा इस बार ममता दीदी के गढ़ में कमल खिलाने के लिए जी जान से जुट गई है।

भारतीय जनता पार्टी राज्य में हर उस मुद्दे को हवा दे रही है, जो उसके लिए विधानसभा चुनाव में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए आगामी चुनाव निर्णायक जंग के तौर पर देखा जा रहा है।

उधर, ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले केंद्र पर जमकर हमला बोलना शुरू कर दिया है।
ममता ने राज्य में 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने के आरोप लगाये हैं। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर हमला तेज करते हुए उन्हें ‘खतरनाक’ करार दिया। आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का इस्तेमाल 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल के लाखों योग्य मतदाताओं के नाम गैरकानूनी तरीके से हटाने के लिए कर रहे हैं।

सीएम ममता के कदमों से यह तय है कि टीएमसी चुनाव में अकेले उतरेगी, जबकि भाजपा, वाम दल और कांग्रेस नए गठबंधनों और रणनीतियों पर काम कर रही हैं। भाजपा ने राज्य में अभी से माहौल बनाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने करीब-करीब तस्वीर भी साफ कर दी है कि राज्य में वो मुद्दा कौन सा होगा, जिसपर भाजपा चुनाव लड़ेगी।

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। यहां 27 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटरों पर सबकी निगाह है। तृणमूल पार्टी लगातार मुसलमानों को अपने पाले में करने में जुटी हुई हैं, लेकिन बीते कुछ समय से सीएम ममता बनर्जी ने कुछ फैसले ऐसे लिए हैं, जो मुस्लिम समुदाय को असहज कर रहे हैं। इसके साथ ही, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी, आईएसएफ और अब तृणमूल से निलंबित किए जा चुके हुमांयू कबीर भी इस वोट बैंक पर नजर टिकाए हुए हैं।

पूरे राज्य में 30% मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। लोकसभा की 42 में से 10 सीटों और विधानसभा की 294 में से करीब 80 सीटों पर मुस्लिम आबादी 45% से अधिक है। पिछले कुछ चुनावों से मुस्लिम वोट तृणमूल के पक्ष में रहा है। भाजपा ने आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति कर ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है। 2019 के आम चुनाव में उसे कुछ हद तक सफलता जरूर मिली, लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव और फिर 2024 के आम चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

तृणमूल कांग्रेस से निकाले जा चुके विधायक हुमांयू कबीर ने हाल ही में मुस्लिम बहुल जिले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखी। इस दौरान लाखों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हुए। इसके बाद हुमांयू कबीर ने मीडिया से कहा कि हम अगले चंद दिनों में नई पार्टी का ऐलान करने वाले हैं। कई बड़ी पार्टियों के नेता हमारे संपर्क में हैं। हम राज्य के मुसलमानों की आवाज बनने की कोशिश करेंगे। राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा करने में सीएम ममता बनर्जी असफल रही हैं। उन्होंने कहा कि हम आगामी चुनाव में 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हुमांयू कबीर ने 90 सीटों पर जीत का दावा किया।

टीएमसी के भीतर भी मुस्लिम वोट बैंक खिसने का डर सता रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि ओबीसी आरक्षण को लेकर प्रदेश के मुसलमानों में तृणमूल के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। अल्पसंख्यक वर्ग के भीतर यह धारणा भी बन रही है कि तृणमूल सरकार ने अपने एंटी वक्फ कानून के रुख से पीछे हटकर अपनी हार मान ली है।

एसआईआर के मुद्दे को लेकर भी पश्चिम बंगाल में राजनीति उबाल मार रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बीच एक भड़काऊ भाषण दिया है। ये बंगाल है बिहार नहीं की चेतावनी देने के बाद ममता बनर्जी ने अब राज्य की महिलाओं से कहा कि अगर वोटर लिस्ट की समीक्षा के दौरान उनके नाम हटा दिए जाते हैं, तो वे किचन के औजारों के साथ तैयार रहें। ममता बनर्जी ने कहा कि आप एसआईआर के नाम पर माताओं और बहनों के अधिकार छीन लेंगे? वे चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस लाएंगे और माताओं और बहनों को डराएंगे। माताओं और बहनों, अगर आपके नाम काट दिए जाते हैं, तो आपके पास औजार हैं, है ना? वे औजार जिनका इस्तेमाल आप खाना बनाते समय करती हैं। आप में ताकत है, है ना? अगर आपके नाम काटे जाते हैं, तो आप इसे बर्दाश्त नहीं करेंगी, है ना? महिलाएं आगे लड़ेंगी, और पुरुष उनके पीछे रहेंगे।

नदिया जिले के कृष्णानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि शाह मतदाता सूचियों से ‘डेढ़ करोड़ नाम’ हटाने की कोशिशों को सीधे तौर पर निर्देशित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जायेंगी।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने इसे लेकर गुरुवार को बंगाल प्रशासन व विभिन्न एजेंसियों के साथ जरूरी बैठक की।

बैठक में पुलिस, राज्य सरकार के परिवहन, वन व सहकारिता विभाग, आयकर, आबकारी व सीमा शुल्क विभाग, रिजर्व बैंक, राजस्व खुफिया निदेशालय, भारतीय तटरक्षक बल, सशस्त्र सीमा बल, रेलवे सुरक्षा बल, सीआइएसफ, डाक विभाग, सीमा सुरक्षा बल इत्यादि के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि बैठक में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अग्रिम चर्चा हुई।

गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.
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