Monday, March 30, 2026
Homeभारत'एकला चलो रे...' कांग्रेस 20 साल बाद बंगाल में अकेले लड़ रही...

‘एकला चलो रे…’ कांग्रेस 20 साल बाद बंगाल में अकेले लड़ रही विधानसभा चुनाव, खोई जमीन तलाशने की कोशिश

कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए जो 284 नाम घोषित किए हैं, उसमें 63 मुस्लिम उम्मीदवार है। वहीं, अधीर रंजन चौधरी करीब तीन दशक बाद राज्य की चुनावी राजनीति में वापसी कर रहे हैं।

कोलकाता: कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को 284 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी कर दी। पार्टी की ओर से बताया गया है कि बचे हुए 10 उम्मीदवारों के भी नाम जल्द जारी कर दिए जाएंगे। कांग्रेस इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में अकेले ही मैदान में उतरने जा रही है। करीब 20 साल बाद ऐसा हो रहा है जब कांग्रेस बिना किसी गठबंधन में गए बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इस लिहाज से नजरें कांग्रेस पर भी होंगी कि आखिर पार्टी ‘एकला चलो रे’ की नीति से क्या फायदा उठा पाती है।

कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने से राज्य में मुस्लिम बहुल सीटों की अहमियत भी और बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए कि वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि तृणमूल की अपनी तैयारी है, कांग्रेस अलग ताल ठोकेगी। इन सबके बीच असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM और तृणमूल के पूर्व नेता हुमांयू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) वाले गठबंधन की भी जोर अजमाइश होगी।

कांग्रेस की ‘एकला चलो’ नीति

बंगाल में विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आखिरी बार 2006 में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस समय उसने 21 सीटें जीती थीं। 2011 में पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर वामपंथियों को सत्ता से बेदखल करने के सफल अभियान में हिस्सा लिया। तब कांग्रेस को 42 सीटें मिली थी। इसके बाद 2016 में कांग्रेस ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया और 44 सीटें जीतीं। 2021 के पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने फिर से वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुल सका, जबकि उसने 91 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

कांग्रेस की ओर से करीब महीने भर पहले ही साफ कर दिया गया था कि वह इस बार बंगाल में अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी। अलग-अलग स्रोतों से इस फैसले के पीछे की वजहों को लेकर कई कहानियां भी आई। इन सबसे यही बात निकल कर आई है कि पार्टी हाई कमान से लेकर नीचे तक सभी इस पर एकमत थे कि कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। पार्टी में ये भी मत है कि बंगाल के नतीजों से बहुत उम्मीदें नहीं हैं, लेकिन अकेले चुनाव लड़ना पार्टी को राज्य में फिर से खड़ा करने की दिशा में सही कदम होगा।

कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला क्यों किया, इसे लेकर सूत्रों के हवाले से कुछ बातें सामने आई। इसमें एक ये बात रही कि राज्य इकाई को लगता है कि वामपंथी दल कांग्रेस के संसाधनों का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उन सीटों पर बतौर कैडर उनका समर्थन नहीं करते जहां गठबंधन सहयोगी का समर्थन करना जरूरी होता है।

हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​था कि बंगाल में अगर गठबंधन की बात ही होती तो तृणमूल पहली पसंद हो सकती थी। लेकिन तृणमूल की ओर से इस समीकरण को बहुत तवज्जो नहीं दिए जाने से यह संभावना भी खत्म हो गई।

बंगाल चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार

कांग्रेस पार्टी ने रविवार को उम्मीदवारों की जो पहली लिस्ट जारी की, उसमें बहुत बड़े या चौंकाने वाले नाम तो नहीं हैं लेकिन कुछ अहम नाम जरूर हैं। मसलन, मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा गया है। इसे कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था।

2024 के लोकसभा चुनावों में हार के बाद अधीर रंजन चौधरी करीब तीन दशकों बाद राज्य की चुनावी राजनीति में वापसी कर रहे हैं। अधीर ने आखिरी बार 1996 में नबग्राम से विधानसभा चुनाव जीता था और 1999 में विधायक पद छोड़कर दिल्ली चले गए थे। पिछले लोकसभा चुनाव (2024) में अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर संसदीय क्षेत्र से तृणमूल उम्मीदवार और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान से हार गए थे। बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र बहरामपुर संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है।

कांग्रेस ने दिग्गज नेता घनी खान चौधरी की भतीजी मौसम नूर को भी मैदान में उतारा है। नूर अपने गृह जिले मालदा के मालतीपुर से चुनाव लड़ेंगी। वह हाल ही में तृणमूल में सात साल बिताने के बाद कांग्रेस में लौटी हैं, जहां वह राज्यसभा सदस्य थीं। पार्टी ने दमदम से सुष्मिता बिस्वास, सुमन रॉयचौधरी (मानिकतला), श्यामल मंडल (जादवपुर) और मानस सिन्हा रॉय (टॉलीगंज) को भी मैदान में उतारा है।

अन्य उम्मीदवारों में दार्जिलिंग से मधप राय, अब्दुल हन्नान (सुजापुर), गौतम भट्टाचार्य (तृणूल के गढ़ डायमंड हार्बर से) को मैदान में उतारा गया है। आसनसोल दक्षिण से सौविक मुखर्जी और आसनसोल उत्तर से प्रसेनजीत पुइतांडी कांग्रेस उम्मीदवार हैं।

कांग्रेस की चुनिंदा सीटों पर नजर और मुस्लिम वोट फैक्टर

कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार पार्टी सभी 294 सीटों पर चुनाव जरूर लड़ रही है लेकिन उसका फोकस कुछ जिलों पर ही है। ये वे जिले हैं, जहां कांग्रेस की पकड़ पहले काफी मजबूत मानी जाती रही है। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद जैसे जिले शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि यहां से सीटें निकालना बड़ी उपलब्धि होगी और पार्टी की वापसी की नींव रखी जा सकेगी।

हालांकि, कांग्रेस के लिए ये भी आसान नहीं होगा। ये मुस्लिम बहुत इलाके हैं और इनके वोटों के लिए कई दावेदार मैदान में हैं। तृणमूल कांग्रेस तो है ही, इसके अलावा ओवैसी और हुमांयू अकबर का गठबंधन भी इन जिलों की सीटों पर नजरें गड़ाए हुए है। ऐसे में मुस्लिम वोट बैंक का बंटना लगभग तय है और संभव है कि यह निर्णायक साबित हो सकता है।

कांग्रेस ने जो 284 नाम घोषित किए हैं, उसमें 63 मुस्लिम उम्मीदवार है। इस तरह कांग्रेस ने सबसे अधिक मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। मौजूदा समय में तृणमूल कांग्रेस का पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल सीटों पर दबदबा है। साल 2021 के विधानसभा चुनावों में ऐसी 85 सीटों में से 75 पर तृणमूल ने जीत हासिल की थी।

ये 85 सीटें पांच जिलों- मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना में हैं। यहां मुस्लिम आबादी 35 प्रतिशत से 66 प्रतिशत तक है। इनमें से मुर्शिदाबाद (66.3 प्रतिशत) और मालदा (51.3 प्रतिशत) मुस्लिम बहुल जिले हैं। इनके बाद उत्तर दिनाजपुर (49.9 प्रतिशत), बीरभूम (37.1 प्रतिशत) और दक्षिण 24 परगना (35.6 प्रतिशत) का स्थान आता है।

यह भी पढ़ें- खेती बाड़ी-कलम स्याही: बीजेपी और टीएमसी, दोनों की निगाहें नॉर्थ बंगाल पर!

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments