Friday, March 20, 2026
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खेती बाड़ी-कलम स्याही: विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की डायरी

पश्चिम बंगाल में फिलहाल हर दल चुनाव की तैयारी में है और हर कोई जीत हासिल करने के लिए मेहनत कर रहा है। तमाम तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा कि बंगाल के मतदाता क्या सोच रहे थे।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। कहीं पार्टी के भीतर पार्टी चल रही है तो कहीं गठबंधन के लिए नई नई तरकीब खोजी जा रही है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए अपनी आक्रमक छवि बनाए हुए है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी की इच्छा है कि इस बार ममता दीदी के किले में कमल खिलाया जाए।

इन सबके बीच खबर आ रही है कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पश्चिम बंगाल यूनिट के सचिव मोहम्मद सलीम ने जनता उन्नयन पार्टी के चीफ हुमायूं कबीर से मुलाकात की है। इस बैठक से दोनों पार्टियों के बीच चुनाव से पहले गठबंधन की संभावना पर अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। सलीम ने कहा कि चुनाव में सीट बंटवारे के प्रस्ताव पर सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट में चर्चा की जाएगी। उन्होंने हुमायूं कबीर से न्यू टाउन के एक होटल में करीब एक घंटे तक बैठक की थी।

गौरतलब है कि कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस के विधायक थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में एक नई बाबरी मस्जिद की नींव रखकर सूबे की सियासत में हलचल मचा दी।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पश्चिम बंगाल यूनिट के सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, ‘हम इस प्रस्ताव पर लेफ्ट फ्रंट में चर्चा करेंगे। उसके बाद फ्रंट से बाहर की लेफ्ट पार्टियों से बात होगी, फिर आईएसएफ से।’

सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने 2021 के विधानसभा चुनाव में इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी कि आईएसएफ के साथ गठबंधन किया था, लेकिन कोई सीट नहीं जीत सके। सलीम ने कहा कि कबीर से मुलाकात उनके इरादों को समझने के लिए थी। उन्होंने बताया कि कई पार्टियां अभी चुनाव में सीट बंटवारे पर फैसला नहीं ले पाई हैं। सलीम ने गठबंधन पर चर्चा होने से इनकार किया और कहा, ‘मैं उनसे जानना चाहता था कि वे क्या करना चाहते हैं और उनका मकसद क्या है।’

वहीं, कबीर ने इस मुलाकात को शिष्टाचार बैठक बताया, लेकिन चुनाव के लिए गठबंधन पर चर्चा होने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, ‘मैंने सलीम साहब से अपील की है कि गठबंधन बनाने की प्रक्रिया 15 फरवरी तक पूरी कर ली जाए।’

बता दें कि हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम से भी गठबंधन पर बात कर सकती है। खासकर मालदा और मुर्शिदाबाद जिले में दोनों पार्टी मिलकर काम करना चाहती है।

कबीर ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य भ्रष्ट सरकार को हराना है और राज्य के लोगों को पारदर्शी सरकार देना है।’ ऐसा माना जा रहा है कि यदि सीपीएम और जनता उन्नयन पार्टी के बीच गठबंधन होता है, तो इससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में। कबीर की पार्टी मुख्य रूप से मुस्लिम वोटों पर फोकस कर रही है, जो टीएमसी का मजबूत आधार है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह गठबंधन मुस्लिम वोटों को बांट सकता है, जिससे टीएमसी को नुकसान हो सकता है और भाजपा को अप्रत्यक्ष फायदा हो सकता है।

बंगाल चुनाव को लेकर यदि कांग्रेस की बात की जाए तो यह पार्टी एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। वर्षों तक लेफ्ट के साथ चुनावी गठबंधन का हिस्सा रही कांग्रेस अब उससे दूरी बनाने के संकेत दे रही है।

कांग्रेस और वाम दलों का गठबंधन 2016 से बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहा। 2019 लोकसभा चुनाव में दोनों अलग हुए, लेकिन 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में फिर साथ आए। हालांकि यह प्रयोग कांग्रेस के लिए लगभग हर बार नुकसानदेह ही साबित हुआ। 2021 विधानसभा चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जब कांग्रेस ने लेफ्ट के साथ मिलकर 92 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका। उसका वोट शेयर घटकर महज 3 प्रतिशत रह गया।

वहीं हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनकी तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि देश में सिर्फ दीदी ही भाजपा का मुकाबला कर सकती हैं। अखिलेश ने भाजपा पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल और चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समाज में फूट डालने की राजनीति करती है।

इन सब आरोप प्रत्यारोपों के बीच भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन अपने पहले बंगाल दौरे पर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दुर्गापुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में ‘डबल इंजन’ की सरकार बनाने का आह्वान किया और टीएमसी पर बंगाल को बांग्लादेश की ओर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया।

नितिन नवीन ने ऐतिहासिक भिरिंगी श्मशान काली मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद और रवींद्रनाथ ठाकुर जैसी महान विभूतियों की यह भूमि आज अराजकता और भ्रष्टाचार की गवाह बन रही है। नवीन ने कार्यकर्ताओं के संघर्ष का अभिनंदन करते हुए कहा कि केवल भाजपा ही इस दमनकारी और अराजकतावादी सरकार के खिलाफ सीना तानकर खड़ी है।ममता बनर्जी पर सीधा हमला करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि उन्होंने प्रदेश को भ्रष्टाचार के कारखाने में तब्दील कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के विधायक और मंत्री ‘टीएमसी टैक्स’ वसूलने में लगे हुए हैं और जनता की खून-पसीने की कमाई को लूटा जा रहा है। नवीन के अनुसार, ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार खत्म करने का सपना दिखाकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन आज राज्य में केवल घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं।

हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा कि इन आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर बंगाल के मतदाता क्या सोच रहे थे और ग्राउंड के नब्ज को किस दल ने पढ़ने की कोशिश की थी। फिलहाल तो बंगाल में हर दल चुनाव की तैयारी में है और हर कोई जीत हासिल करने के लिए मेहनत कर रही है।

गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.
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