कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM ने तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता हुमांयू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ हाथ मिलाया है। सीट शेयरिंग को लेकर बात फाइनल नहीं हुई है लेकिन दोनों ओर से कहा गया है कि बहुत जल्द इस बारे में भी ऐलान कर दिया जाएगा। इस नए समीकरण से तृणमूल को अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीद से कहीं अधिक कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
सामने आई जानकारी के अनुसार हैदराबाद से सांसद ओवैसी 25 मार्च को पश्चिम बंगाल का दौरा करने वाले हैं। इसी दौरे के दौरान पार्टी द्वारा औपचारिक रूप से उन सीटों की घोषणा किए जाने की संभावना है जिन पर वह चुनाव लड़ेगी।
एआईएमआईएम ने पहली बार 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस समय पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुलता वाली 7 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी के इस बार मुर्शिदाबाद, मालदा सहित उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर में लगभग आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना है।
ममता बनर्जी पर ओवैसी का हमला
ओवैसी ने हैदराबाद में रविवार रात पार्टी मुख्यालय में बंगाल चुनाव लड़ने के फैसले का ऐलान किया था। साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भी निशाना साधा। ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बंगाली मुसलमानों के खिलाफ अन्याय का आरोप लगाया और कहा कि कम से कम पांच लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द कर दिए गए हैं।
ओवैसी ने कहा, ‘धर्मनिरपेक्षता के नाम पर इन लोगों को लुभाए रखने के बावजूद अन्याय के कई उदाहरण मौजूद हैं। जब मजलिस (AIMIM) सहभागिता और सहभागी लोकतंत्र की बात करती है, तो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल असुरक्षित महसूस करने लगते हैं।’
‘बंगाल में सीट शेयरिंग पर जल्द फैसला’
इस बीच एआईएमआईएम और कबीर की पार्टी के बीच शीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है। AIMIM के बंगाल अध्यक्ष इमरान सोलंकी के अनुसार 25 मार्च को ओवैसी के दौरे के समय ही सबकुछ फाइनल हो जाएगा। सोलंकी ने दावा किया कि कबीर की पार्टी AJUP को बड़ी संख्या में सीट देना चाहती है, लेकिन उनकी ओर (AIMIM) से कम सीटों की ही मांग हुई है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने उन्हीं सीटों को मांगा है, जहां जीतने के मौके सही में हैं और एआईएमआईए का आधार मजबूत है। सोलंकी ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य लक्ष्य अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए भाजपा को रोकना है।
सोलंकी ने ये भी बताया है कि इस बार बंगाल में ओवैसी खुद जोरशोर से प्रचार में हिस्सा लेंगे। ओवैसी आने वाले दिनों में करीब एक हफ्ते बंगाल में गुजार सकते हैं। इस दौरान वे दिन में तीन से चार रैलियां करेंगे।
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सोलंकी ने मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में विकास की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि बेरोजगारी के कारण कई युवा पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के अपर्याप्त ढांचे के लिए भी राज्य सरकार दोषी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में मुसलमान सरकार द्वारा कई अल्पसंख्यक ग्रुप को ओबीसी सूची से हटाने और मुख्यमंत्री द्वारा शुरू में विरोध जताने के बावजूद वक्फ कानून लागू करने से भी नाखुश हैं।
बंगाल में हुमांयू कबीर
कबीर ने पिछले हफ्ते अपनी पार्टी AJUP के 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। पार्टी हाई प्रोफाइल सीट भबानीपुर से भी एक उम्मीदवार खड़ा कर रही है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में हैं। इसी सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी भी ताल ठोक रहे हैं। जहां तक हुमांयू कबीर की बात है, वे खुद मुर्शिदाबाद में दो सीटों- रेजीनगर और नाओदा से चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी ने कहा है कि उसके शेष उम्मीदवारों की घोषणा 25 मार्च को कोलकाता में की जाएगी।
माना जा रहा है कि कबीर और हुमांयू कबीर का गठबंधन टीएमसी के लिए कुछ सीटों पर चुनौती बन सकता है, क्योंकि इन दोनों पार्टियों की भी नजर मुस्लिम वोटों पर होगी। हुंमायू कबीर को दरअसल बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की योजना की घोषणा के बाद तृणमूल कांग्रेस से निकाला गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है।
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