कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत कई अन्य जिलों में बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या के विरोध में बुधवार, 24 दिसंबर को प्रदर्शन हुए।
बांग्लादेश के मेमनसिंह ने दीपू चंद्र दास की 18 दिसंबर को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और शव में आग लगा दी गई थी। दीपू की हत्या इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान की गई थी।
हावड़ा स्टेशन पर हुई झड़प
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, बुधवार को हुए प्रदर्शनों में हावड़ा स्टेशन पर हिंसा तब हो गई जब पुलिस ने भाजपा समर्थकों को हावड़ा पुल तक पहुंचने से रोक दिया। हावड़ा पुल कोलकाता और बंगाल के अन्य जिलों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है।
प्रदर्शनकारी मेमनसिंह में हुई घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान हावड़ा पुल पर सुरक्षा कर्मियों से साथ तीखी बहस हुई। हावड़ा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया “हम किसी को भी विरोध के नाम पर जनजीवन में बाधा डालने और यात्रियों को परेशानी पहुंचाने नहीं देंगे। हम कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पैदा करने के प्रयास को विफल करेंगे।”
जब पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका तो प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास किया जिससे झड़पें हुईं।
इलाके को बैरिकेड से घेर दिया गया था और प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारे लगाने शुरू कर दिए जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
दार्जीलिंग जिले के सिलीगुड़ी और उत्तरी 24 परगना जिले के पेट्रापोल या घोज़ाडांगा सीमा पर भी भारत-बांग्लादेश सीमा के पास अशांति की खबरें आईं जब हिंदुत्व संगठनों के विभिन्न समूहों ने निर्यात और आयात की वस्तुओं से भरे ट्रकों को रोककर प्रदर्शन किया।
हिंदुत्वादी संगठन ‘सनातनी जातीयतावादी मंच’ के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में घोजाडांगा सीमा पर सड़क जाम कर दी और मालवाहक ट्रकों को बांग्लादेश में प्रवेश करने से रोक दिया।
दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद हो रहे प्रदर्शन
एक कार्यकर्ता राजेंद्र साहा ने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत सरकार बांग्लादेश के साथ सभी व्यापार और राजनयिक संबंध तोड़ दे, जहां दीपू चंद्र दास जैसे अल्पसंख्यक हिंदुओं को बहुसंख्यक समुदाय द्वारा मारा-पीटा और प्रताड़ित किया जा रहा है।”
18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और शव को आग लगा दी गई थी। इसके विरोध में भारत के तमाम शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। दीपू चंद्र दास की हत्या ने बांग्लादेश में एक बार फिर से अल्पसंख्यकों के ऊपर हो रहे हमलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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गौरतलब है कि बांग्लादेश में हालात अस्थिर बने हुए हैं। इंकलाब मंच के शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात और भी बिगड़ गए हैं। हादी की मौत के बाद देश के प्रमुख अखबारों डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालयों में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी जिससे वहां मौजूद पत्रकार बड़ी मुश्किल से जान बचाकर निकले।
वहीं, इन घटनाओं का असर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच संबंध वैसे तो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद से बने ही हैं। हालांकि इस बीच तनाव और बढ़ गया है। बीते दिनों बांग्लादेश ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर दी हैं। वहीं, 23 दिसंबर को उच्चायोग ने भारतीय राजदूत को तलब किया और नई दिल्ली स्थित बांग्लादेशी उच्चायोग की सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया।

