नई दिल्लीः गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख कर यूपी 77 के नाम से आ रहे वेब शो की रिलीज पर रोक की मांग की है। यह वेब शो कथित तौर पर विकास दुबे के जीवन पर आधारित है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसको लेकर एक नोटिस जारी किया है।
दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2020 में एक कथित एनकाउंटर में मार गिराया था। यह वेब शो 25 दिसंबर को रिलीज होने वाला है। इस पर रोक की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर मंगलवार, 23 दिसंबर को सुनवाई हुई।
दिल्ली हाई कोर्ट में क्या सुनवाई हुई?
लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान एक नोटिस जारी किया है। जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र सरकार, ओटीटी प्लेटफॉर्म और वेब शो के निर्माताओं से जवाब मांगा है।
इससे पहले आज ही इस याचिका की सुनवाई जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला ने की। इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से उपस्थित हुए वकील ने जल्द ही सुनवाई की मांग की।
अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई के मंजूरी दे दी है। बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, मामले में आज ही सुनवाई की बात की गई थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया।
कथित तौर पर विकास दुबे के जीवन पर आधारित यह वेब शो ओटीटी प्लेटफॉर्म Waves (वेव्स) पर 25 दिसंबर को रिलीज हो रहा है। मामले में सुनवाई 24 दिसंबर को होगी।
विकास दुबे और उसके साथियों पर कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। इसके बाद दुबे ने मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उसे 9 जुलाई 2020 को हिरासत में लिया गया था।
दुबे को उत्तर प्रदेश वापस ले जाने के दौरान राज्य पुलिस द्वारा मार दिया गया। पुलिस ने दावा किया कि दुबे ने एक पुलिस अधिकारी से बंदूक छीनने की कोशिश की और कथित तौर पर गोली चलाई जिसके बाद “आत्मरक्षा” में उसे मार गिराया।
विकास दुबे को कथित मुठभेड़ में हुई हत्या से कुछ घंटों पहले मुंबई के वकील घनश्याम उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें उसकी सुरक्षा की मांग की गई थी। इस याचिका में वकील ने “फर्जी मुठभेड़” में उसकी हत्या की आशंका जताई थी। याचिका को सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होने से पहले विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत हो गई।
फर्जी मुठभेड़ की आशंका
पुलिस द्वारा विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद विभिन्न पक्षों ने आशंका जताई कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ की है। उत्तर प्रदेश के वकीलों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।
वहीं एनजीओ पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच के लिए एक तत्काल आवेदन दायर किया है। अदालत ने मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया।
इस आयोग ने बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस को क्लीन चिट दे दी। हालांकि जांच आयोग ने दुबे को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। वहीं, जुलाई 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को जांच आयोग द्वारा की गई सिफारिशों पर उचित कार्रवाई का भी निर्देश दिया।

