‘आप मैडम, कौन सा लैंग्वेज?’
‘हिन्दी।’
‘इन्दी तो सबी बोलता मैडम! बट सबी टॉक इन्दी में नई होता न मैडम!’
‘थोड़ी बहुत अँग्रेजी।’
‘अपुन को अँग्रेजी इल्ले मैडम! यहां जो मैडम सब आती, अँग्रेजी बोलती। वेरी फास्ट- फास्ट। मैं सुनती। सुनकर तोड़ा- तोड़ा बोलने का प्रैक्टिस करती।’
‘अपने क्लायंट्स की बातें सुनती हो? बिजनेस में ऐसा तो नहीं होता!’
‘मैडम! ये बूटी पार्लर है। फेशियल, मसाज, मैनी क्योर, पैडी क्योर- एक- एक सर्विस वास्ते बोत टैम जाता। वो मैडम लोग बोत बड़ा- बड़ा घर से आता। वन आवर, दू आवर, सम टाइम्स, थ्री आवर, चार- चार गंटा का अपोइंटमेंट रहता। अब इतना देर तो वो लोग शांत नहीं बैट सकता न मैडम!’
‘तो उनकी बात सुनोगी? तुम्हारी मैडम से बोल दूँ?’
‘कान है तो सुनाई देगा न मैडम! हाँ, बोलती नहीं उनका बीच में। अपना काम करती रहती मई। बट, आप मेरा मैनेजर मैडम को मति बोलना!’
‘क्यों?’
‘बोत कड़क है। निकाल देगी काम से। गए टैम शैला को निकाल दिया।
‘क्यों?’
‘वो एक क्लायंट का बात दूसरा क्लायंट को बोल दिया। उसको पता नहीं था कि दोनों क्लायंट आपस में फ्रेंड है।’
‘मज़ाक कर रही थी मैं!’
‘मई डर गई।’
‘क्यों?’
‘मुजे लगा, आप मैनेजर मैडम से कांप्लेन मारेगी अमारा।’
‘कैसा कांप्लेन?’
‘यई कि मई क्लायंट का बात सुनती। बट, कान है तो सुनाई देता न मैडम! क्या करेगी मई?’
‘रूई ठूंस लो। हाहाहा….’
‘हेहेहे, आप मैडम, बोत जोली हो….। बट, उनका अँग्रेजी बोलने से मैं बी अबी लिटल- लिटल समझती। बट नो स्पीक।’
‘अरे, बोल तो रही हो इतनी बढ़िया अँग्रेजी।’
‘रियल मैडम? ….इंग्लिश बोत अच्चा लैंग्वेज। येस, सीख रही मई अँग्रेजी। इतना बोलती। नो शरम। व्हाई शरम? मेरी डोटर बी बोलती। छोकरा लोग नई बोलता। डोटर को ऑफिस में काम करना। उसका लिए इंग्लिस बोत ज़रूरी….! फिर बी, एक अपना लैंग्वेज लगता न मैडम!’
‘तुम्हारी भाषा क्या है?’
‘तमिल। तीस साल से मुंबई में। अबी इंदी बोलती। तोड़ा- तोड़ा मराठी बी।’
‘तमिल?’
‘अय्योयो मैडम! अपना लैंग्वेज! कइसा नई बोलेगा?’
‘मुंबई में इतने दिन से हो। भूली नहीं?’
‘नो मैडम! मुलुक का लोग में अपना ही बाषा चलता। हसबइंड, डोटर, सन से अपना लैंग्वेज में ही बोलता मैडम! बोलना पड़ता मैडम!’
‘मैं थी चेन्नै में।’
‘अय्योयो मैडम! फिर तो आपको तमिल मालूम होगा?’
‘कुंचम कुंचम!’
‘ग्रेट मैडम! फिर अमलोग तमिल में बात करेगा।’
‘इतनी भी नहीं आती।’
‘चलेगा मैडम! अमलोग कॉमन बात इन्दी में करेगा। अपना इस्पेसल बात अँग्रेजी में।’
‘कैसा स्पेशल?’
‘अपना पर्सनल टॉक मैडम, जो और कोई नहीं जान सके। कुछ आपका बी होगा, कुछ मेरा बी।’
‘जैसे?’
‘अबी धरो मैडम! ये तिरुपति का बात! कुम्भ का बात! वो इलेक्सन का बात!’
‘हाहाहाह! ये कौन सा पर्सनल है?’
‘है न मैडम! आप नई समझेगा। आप गया तिरुपति?’
‘हाँ! एक बार। देखना चाहती थी। उसके बाद एक बार मैं चेन्नै से कहीं ट्रैवेल कर रही थी। अचानक फ्लाइट में पायलट अनाउंस करने लगा कि आपके दाहिने तिरुपति मंदिर है। सारे लोग उचक- उचक कर देखने लगे, प्रणाम करने लगे। मेरी आयल सीट थी। कोशिश की, कुछ दिखा नहीं।’
‘तिरुपति जा के बाल उतारा?’
‘मंदिर देखना, घूमना अच्छा लगता है। प्रसाद खाना उससे भी अच्छा। फ्री में मिलता है न!’
‘आउर कुम्भ?’
‘एक बार गई थी- संगम। ऐसे ही नॉर्मल दिन में। भीड़ वाले समय में तो मैं सिद्धि विनायक भी नहीं जाती।’
‘और इलेक्सन?’
‘वोट डालने जाती हूँ।’
‘इलेक्सन का प्रचार में?’
‘मतलब?’
‘आप नई जाता। अमलोग जाता।’
‘तो?’
‘ये दरम, पोलटिस सब पर्सनल बात मैडम!’
‘और जो मैंने तुम्हारी मैडम को बोल दिया कि तुम मुझसे पर्सनल बात करती हो तो?’
‘बोलेगा, पूजा का बात, इलेक्सन का बात बोल रहा ता। ये कौन सा पर्सनल है?’
‘हाहाहाह! मियां की जूती, मियां के सर।’
‘अय्योयो! सॉरी मैडम! आपको जूता? किदर…..?’
‘आरे, एक मुहावरा बोला- फ्रेज। ….लेकिन, मेरे बोलने पर मैडम ने तुम्हें निकाल दिया तो?’
‘आप नई बोलेगा मैडम! आप पर कोन्फ़िडेंस आया मैडम! मई इतना देर बात किया आपसे। दूसरा क्लायंट लोग से कबी नई करता। वो लोग आता आउर अपना मोबाइल पर चालू….! खाली गॉसिप मारता वो लोग- वोई सास- बहू का! ये लड़का, वो लड़की का साथ चक्कर का….। आई डोंट लाइक, बट….! वो बूढ़ी अम्मा लोग सब बी आता न मैडम, अइसाई बात करता। वो लोग का दर्द से नी माने गुटना नई उठता, लेकिन, जबान का ‘नी’ बोत चलता। अमलोग चुपचाप सुनता, काम करता। दूसरा स्टाफ से नजर मिलता तो स्माइल मारता, बस! आप इतना देर बात किया, माने आपको बी मेरा बात में इंटेस्ट है।’
‘कैसा इंटरेस्ट?’
‘आप लिखता क्या मैडम?’
‘तुम्हें कैसे पता?
‘आपको देख के। आपका ड्रेस, आपका चलने का, बात करने का स्टाइल…! डिफरेंट मैडम! ….राइटर लोग को इस्टोरी लगता न मैडम!’
‘तुम्हें कैसे मालूम?’
‘मई पढ़ी- लिखी मैडम! सेलम का नाम सुना आप?’
‘तमिलनाडु का सेलम, जहां का स्टील बहुत प्रसिद्ध है?’
‘वोई मैडम! देको, आपको सब पता। यहाँ मंहगा- मंहगा मोबाइल वाली सब आती, उनके लिए अमलोग सिरीफ़ साउथ इंडियन….! कौन कन्नड़ा, कौन तेलुगू, कौन मल्लू… कुछ नई पता। उनको सेलम, तंजावुर, कोयंबटूर कुछ नई पता। मई सेलम की। तमिल मीडियम से पढ़ा। सेवेन्थ तक।’
‘आगे क्यों नहीं पढ़ी?’
‘शादी। लड़की लोग का सारा ड्रीम शादी का ड्रेन में ड्रेन हो जाता मैडम!’
‘अरे वाह! कितनी अच्छी भाषा है तुम्हारी!’
‘इतना देर आपका साथ रहा न मैडम, सो अपना भी लैंग्वेज़ अच्चा हो गया। आप जल्दी- जल्दी आया करो।’
‘अपनी मैडम से बोलकर मेरा आना फ्री करवा दो। हाहा!’
‘आप कितना अच्चा हँसता मैडम! चलो, अमारा- आपका बीच एक ‘डन’! मई आपका टिप फ्री करती!’
‘मुझे ही टिप? ये बात भी मैं तुम्हारी मैडम को बोल दूँ तो?’
‘आपका मर्जी मैडम! मई तो आपका एक लैंग्वेज़ पूचा कि अमलोग अपना प्राइवेट बात उसमें कर सकते। तमिल आप जानती, कुंचम, कुंचम….! बोत अच्छा! ये लैंग्वेज़ किसी को पता नई चलता।’
‘मुझे बांग्ला भी आती है और मराठी, गुजराती भी।’
‘मई तो इल्ले! अक्खा मुंबई मराठी, गुज्जू से फिल! बेंगाली क्लायंट बी आता न! उसमें इतना हिन्दी वर्ड होता कि अम साउथ इंडियन बी समज जाता। अपना लैंग्वेज़ अच्चा! लोग बोलता, टिन में स्टोन डालकर हिलाओ, गड़म गड़म आवाज आएगा, साउथ इंडियन लैंग्वेज़ हो जाएगा।
हाहाहाह!’
‘सॉरी! हमलोग भी ऐसे ही बोलकर तुम्हारी भाषाओं का मज़ाक उड़ाते हैं। रीयली सॉरी!’
‘वेन्डाम मैडम! गड़म- गड़म बोलकर कोई इसको सीखने- समझने का कोशिश नई करता, अमलोग बच जाता। अपना पर्सनल बात बेफिकर होकर करता।’
‘लेकिन क्या पर्सनल बात करनी है तुम्हें मुझसे? और ऐसा ही कुछ पर्सनल है तो मेरे घर आ जाओ। मैं पास में ही रहती हूँ।’
‘नो टैम मैडम! यहाँ काम करता- करता बात हो जाएगा।’
‘अच्छा बोलो, क्या बात करनी है?’
‘वो मेरा एक लेड़का है और एक लेड़की। दोनों पढ़ने में बोत चंट!’
‘माने? अच्छे नहीं हैं?’
‘नई, नई! बोत अच्चा!’
‘तो फिर चंट क्यों बोला?’
‘चंट बैड वर्ड मैडम? मेरे कू लगा, गुड वर्ड! टू डेज पहिला एक मैडम आया था। वो अपना बॉस का संग- संग अपना हसबइंड के लिए बी चंट बोला। मेरे को लगा, ये अच्चा वर्ड होएंगे। सॉरी मैडम!’
‘अच्छा चल, बता बेटे-बेटी का क्या कह रही थी?’
‘लेडका को पाटी- पोलटिस पसंद। लेडकी को जॉब में जाने का। आपका नजर में कोई जॉब तो बोलने को मेरे कू मैडम!’
‘ज़रूर!’
‘वो स्टडी का संग काम बी करती। एक कंपूटर कंपनी में। और इलेक्सन का टाइम मेरा संग जाती। अच्चा धंदा मैडम!’
‘माने?’
‘मैडम! इलेक्सन टाइम में सबी पाटी का लोग आता। परचार वास्ते। सबको अमारा नीड होता। सब पाटी अमलोग को उटा के ले के जाता। जुलूस में नारा लगाना वास्ते, झण्डा पकड़ना वास्ते। अमलोग पूरा फ़ैमिली जाता। बच्चा लोग बी। बड़ा लोग को टू थाउजेंड और बच्चा लोग को वन थाउजेंड। बहुत चोटा तो पाँच सौ बी। मेरा फेमिली से सिक्स लोग। मई, मेरा हसबइंड, दो छोकरा, एक छोकरी आउर एक डोटर इन ला। नेक्स्ट ईयर एक्स्ट्रा फाइव हंडरेड का इंतिज़ाम हो जाएगा। मेरा डोटर इन ला अबी पेट से है।’
‘कौन- कौन पार्टी वाले आते हैं?’
‘सबी बड़ा पाटी मैडम! कोई बी नाम धरो।’
‘लेकिन ये सब तो आचार संहिता के खिलाफ है।’
‘क्या वर्ड बोला मैडम? आचार? मीन्स पिकल? नई? कोई रूल? मई तो ये वर्ड बी पैली बार सुना। मेरे को नई पता, क्या होता, क्या नई होता। मई तो इतना जानती कि पाँच साल तक तो कोई अमारा फेस नई देकता। येई टैम तो अमलोग का नीड उन लोग को आता है।’
‘तो पूरे देश को बेच देते हो दो हजार में? वह भी पाँच साल के लिए? कितना हुआ प्रति दिन के हिसाब से?’
‘मैडम, देश को अमलोग क्या बेचेगा? ये बड़ा- चोटा पाटी का लोग सब बेचता। अमलोग तो अपना धन्दा देखता। आउर दो हजार तो सीरिफ़ एक बार में मिलता मैडम! एक प्रोसेसन का। एक- एक पाटी का कम से कम तीन- चार बार प्रोसेसन होता मैडम! और अमलोग सिक्स परसन। तो सिक्स इंटू टू, मीन्स ट्वेल्व थाउजेंड, एक बार में। चार बार बी हुआ तो फॉर्टी एट थाउजेंड मैडम! आउर ऐसा परचार सबी पाटी करता। सबी बड़ा पाटी। छोटा पाटी सब बी बुलाता मैडम! तोड़ा कम पैसा देता, फिर बी जाता मैडम! जो पैसा मिलता, अमारा एक्स्ट्रा इनकम होता।’
‘तो फिर वोट किसको देती हो, अगर सभी पार्टी के प्रचार के लिए जाती हो तो?’
‘एकदम हानेस्ट मैडम इसमें?’
‘मतलब?’
‘अमलोग सिक्स पर्सन न मैडम! एक- एक मेम्बर एक- एक पार्टी को वोट दे देता। कम पाटी आया, कम प्रोसेसन में गया तो जिस पाटी से जास्ती सामान- पैसा मिलता, उसको दो मेम्बर, तीन मेम्बर वोट दे देते।’
‘अभी तो चुनाव खत्म हो गए। अब पांच साल की छुट्टी!’
‘नई मैडम! ये बार दिल्ली वाला हुआ। अबी यहाँ लोकल गोरमेंट का होगा। उसका बाद बीएमसी का होगा। फिर कॉर्पोरेट का होगा। उसका बाद आज ये पाटी का, कल वो पाटी का… ये इशू, कल वो इशू….! आज ये जयंती, कल वो जयंती। ये पूजा, वो पूजा। कुछ बी होवे, जुलूस तो सबी में चाइए ना मैडम! नारा लगाने का वास्ते अपन लोग का डिमांड मैडम! अपना तो फुल ईयर ये बिजनेस चलता मैडम! घर में पइसा का साथ साड़ी आता, मुर्गी आता। अमरा लोग का अक्खा ईयर का साड़ी हो जाता। ठंडी में ब्लैंकेट मिलता मैडम! कितना यूज करेगी! गाँव में बहन, भाई सबको दे देती। कबी- कबी भिकारी लोग को बी। बाटली बी आता। कबी- कबी अम बी टेस्ट कर लेती। बच्चा लोग को बी जास्ती टेम चिकन मिल जाता। पैसा हाथ में आता तो थोडा अच्छा क्वालिटी का राइस भी लाता। राशन का राइस- नो गुड मैडम। राशन का राइस बनाने पर रसम, सांभर खूब तीखा बनाती मई।’
‘छह लोग, मतलब छह चिकन एक साथ! कैसे खाते हो?’
‘यू आर वेरी इनोसेंट मैडम! अमलोग चिकन का पइसा ले लेता। कबी- कबी कोई पाटी वाला चिकन ही देता तो मेरा हसबइंड चिकन शॉप में जाकर सबी चिकन कटवाकर ले आता। अमलोग येई एलेक्सन का पइसा से एक बड़ा फ्रिज खरीदा। उसमें फ्रीज़ कर देता। आप मैडम, वेज, नॉन वेज? नॉन वेज खाती तो मई आपका लिए चिकन बिरियानी लेकर आएगी। आपका पार्लर का अपोइनमेंट मई रजिस्टर में चेक कर लेगी।’
‘ना, ना, ये सब मत करना।’
‘आप वेज मैडम!’
‘नहीं, बट….!’
‘मई फ्रेश चिकन लाकर बिरियानी बनाएगी मैडम!’
‘बोला न एक बार!’
‘ओके मैडम! आप प्रेयर करो मैडम कि सब अईसा ही चले। अबी मेरा लेड़की का मइरेज़ होगा ये साल। पर, अपना बिजनेस को कोई लोचा नई मैडम! वो जाएगी, छोटा लेडका का बहू आएगी। अपना इनकम फिक्स!’
‘बढ़िया है।’
‘पर अबी बोत डिफिकल्टी मैडम! अबी आज का नेता लोग क्या तो एक नेशन एक इलेक्सन का बात बोलता। एक मैडम आया बस्ती में। आमलोग को समझाया, ‘एक नेशन एक इलेक्सन होने से सब गड़बड़ होएंगा!’ एग्री न मैडम! बार- बार इलेक्सन नेई होने से बोत प्रोब्लेम गिरेगा अमलोग को। ये अमलोग का साएड बिजनेस मैडम! इसमें झोल नको मांगता।’
‘लेकिन यहाँ कैसे मैनेज करती हो? इतनी छुट्टियाँ मिल जाती हैं?’
‘जब इलेक्सन आता, अपुन यहां से छुट्टी ले लेता। कबी बोल देता, गांव जा रही। कबी मई बीमार, कबी आदमी बीमार। ये अपना परमानेंट बिजनेस मैडम! इदिर खोटी नई करने का। अपना पइसा मैं खर्च नहीं करती। ये पइसा से गांव में लोन देती। उदर से इंटेस्ट आता। मैडम, हाथ में चार पइसा बोत ज़रूरी।’
‘लेकिन, ये सब बातें तो हिन्दी में भी हो सकती थीं न! मुझे इतनी तमिल तो आती नहीं। आधी बात समझ सकी, आधी नहीं।’
‘आदा से बी फुल हो जाता मैडम!’
‘मगर, मैं एंजॉय नहीं कर सकी। ऐसा क्यों?’
‘मैडम! ये सब पर्सनल बात इंदी में नई होता। यहाँ सबी इंदी समझता। कोई जाकर मैडम को बोल देगा तो मेरा ये जॉब जाएगा न मैडम!’
‘तो दूसरा तो है न!’
‘वो तो साएड बिजनेस न मैडम! उसमें झोल नको! इसमें बी खोटी नई। बूटी पार्लर का ये परमानेंट जॉब। मिस नहीं करने का। और मैडम, कोई बी पीएम, सीएम रहे कि वार्ड कमिश्नर बने कि कॉर्पोरटर कि यहाँ का मनेजर! अपुन को क्या! अपुन का धंदा फिक्स मैडम! उदर का बी, इदिर का बी। और, ये पर्सनल बात मैडम! सबी से बोलने का नई होता। बिजनेस को नज़र लग जाता मैडम! देश को बी नजर लग गया है मैडम! तबी तो बोलते न वे लोग- एक नेशन, एक इलेक्सन! बताओ मैडम! एक पगार से फ़ैमिली चलता क्या जो एक इलेक्सन से देश चलेगा? अबी टैम अच्चा नई मैडम! इसलिए ये सब बात सबसे खुल के नई बोलने का। ट्रस्ट बोत ज़रूरी। आउर ट्रस्ट अपना बाषा में आता मैडम! पर्सनल बात तो अपनाई बाषा में दौड़ता न मैडम! ….आपका नेक्स्ट अपोइंटमेंट ले के रको मैडम! मई बिरियानी लाएगी आपका वास्ते। आउर अबी आपका टिप फ्री! नो माइंड! ये मेरा बिजनेस का तरीका मैडम! बाय मैडम! टाटा!’


वाह! बहुत ही सरल संवाद में गंभीर राजनीतिक समस्या को कहानी का कथ्य बना दिया ।
विभा जी को खूब बधाई !