नई दिल्ली: साल 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो अगर छिपकर नॉर्वे में यह सम्मान लेने पहुंचती हैं, तो उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया जाएगा। वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल ने समाचार एजेंसी एएफपी से यह कहा है। माचाडो ने हाल में 10 दिसंबर को ओस्लो में होने वाले नोबेल पुरस्कर वितरण समारोह में शामिल होने की इच्छा जताई थी।
हालांकि, वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल तारेक विलियम साब ने कहा, ‘वेनेजुएला से बाहर होने और उन पर कई आपराधिक जाँचें होने के कारण, उन्हें भगोड़ा माना जाता है।’ उन्होंने आगे कहा कि मचाडो पर ‘षड्यंत्र, नफरत फैलाने और आतंकवाद’ के आरोप लगाए गए हैं।
मचाडो- वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर
वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर 58 वर्षीय मचाडो पूर्व में देश में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रह चुकी हैं। उन्हें वेनेजुएला के बंटे हुए विपक्ष में एकजुटता का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने विपक्ष के 2023 के प्राइमरी चुनाव में भारी जीत हासिल की, लेकिन उन्हें अयोग्य बताते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ 2024 का चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।
अयोग्य ठहराए जाने के बाद, उन्होंने एक अन्य विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज का समर्थन किया। इस घटनाक्रम को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि वह चुनाव अनियमितताओं से भरा हुआ था।
मचाडो वेनेजुएला में पिछले वर्ष के चुनाव के बाद से छुपी हुई हैं, जिसमें कथित तौर पर वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो द्वारा धांधली करने के आरोप लगे थे। टाइम मैगजीन ने 2025 में दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में इन्हें शामिल किया है।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शांति पुरस्कार का ऐलान करते हुए कहा था कि मारिया कोरिना मचाडो को ‘वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने में उनके अथक प्रयास और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायसंगत और शांतिपूर्ण संक्रमण तरीक से जाने के लिए किए गए उनके संघर्ष के लिए’ चुना गया है।
मचाडो 2013 में वेनेजुएला में स्थापित उदार विचारधारा माने जाने वाले राजनीतिक संगठन- ‘वेंटे वेनेजुएला’ की राष्ट्रीय समन्वयक हैं और इसकी संस्थापक सदस्य भी हैं। वे 2011 से 2014 तक नेशनल असेंबली की सदस्य भी रहीं। अपने पूरे करियर के दौरान मचाडो मानवाधिकारों की प्रबल समर्थक रही हैं।
मचाडो ने ट्रंप को समर्पित किया था पुरस्कार
मचाडो ने ऐलान के समय अपना पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया था, जो लंबे समय से इस सम्मान को पाने की सार्वजनिक रूप से इच्छा कई बात बातों-बातों में जताते रहे हैं।
बता दें कि वेनेजुएला पर दशकों से एक निरंकुश शासन रहा है और वर्तमान में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो इसका नेतृत्व कर रहे हैं। कई देश इस नेतृत्व को मान्यता नहीं देते हैं। इसमें अमेरिका भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर ड्रग तस्करी गिरोहों के साथ मिलकर काम करने का भी आरोप लगाया है।
मचाडो ने पिछले महीने सीबीएस न्यूज को बताया था कि उनका मानना है कि नोबेल पुरस्कार जीतने से उन्हें मादुरो शासन से ‘काफी सुरक्षा’ मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया भर में वेनेजुएला के संघर्ष के महत्व को उजागर करता है।’

