नई दिल्ली: जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने रद्द कर दी है सामने आई जानकारी के अनुसार न्यूनतम मानकों के गंभीर उल्लंघन को आयोग ने इसकी वजह बताया है। अब कॉलेज के मौजूदा MBBS छात्रों को अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा। यह कॉलेज पिछले कुछ दिनों से विवादों में भी था।
दरअसल, कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 सीटों पर मुस्लिम छात्रों के नामांकन को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसमें हिंदू छात्रों को सात और सिख को एक सीट मिली थी। इस पर हिंदू संगठन लगातार विरोध जता रहे थे। इनका कहना था कि यह कॉलेज माता वैष्णो देवी के भक्तों के चढ़ावे से संचालित होता है, इसलिए हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कॉलेज को बंद ही कर देना चाहिए: उमर अब्दुल्ला
इससे पहले एडमिशन को लेकर विवाद के बीच मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि इन छात्रों को दूसरे मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट कर देना चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि भाजपा सरकार इन छात्रों को दूसरे मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करे और विवाद खत्म करने के लिए नए खुले मेडिकल कॉलेज को बंद कर दे।
दरअसल, हालिया विवाद के बीच स्थानीय लोग और कई हिंदू संगठन इस आधार पर हिंदू उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की मांग कर रहे थे कि मेडिकल कॉलेज को श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में हिंदू भक्तों के दान से बनाया गया है और बड़े पैमाने पर उसी से चलाया जा रहा है।
उमर ने शिक्षा, खेल और खाने की आदतों पर कथित सांप्रदायिक राजनीति का आरोप भी भाजपा पर लगाया। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उमर ने कहा, ‘बच्चों ने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की सीटें हासिल की। किसी ने उन पर कोई एहसान नहीं किया। अगर आप उन्हें वहां नहीं चाहते हैं तो उन्हें कहीं और एडजस्ट कर दें।’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस हालात में, मुझे नहीं लगता कि छात्र खुद वहाँ पढ़ना चाहेंगे। हम भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से गुजारिश करते हैं कि इन बच्चों को दूसरे कॉलेजों में एडजस्ट करें। अगर मैं इन छात्रों का पैरेंट होता, तो मैं उन्हें वहाँ नहीं भेजता। हम नहीं चाहेंगे कि वे ऐसी जगह पढ़ें जहाँ इतनी ज्यादा राजनीति हो रही हो।’
उन्होंने कहा, ‘हमारे बच्चों को एक और मेडिकल कॉलेज दो और उस मेडिकल कॉलेज (वैष्णो देवी) को बंद कर दो। हमें ऐसे मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है। इन बच्चों को अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करो।’
मेडिकल कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन
दूसरी ओर श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति की यूथ विंग ने मंगलवार को सिविल सेक्रेटेरिएट के पास जम्मू-कश्मीर सरकार की कथित भेदभावपूर्ण नीतियों और श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्रों के पहले बैच से संबंधित बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (BOPEE) की ‘खराब’ चयन प्रक्रिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान, बड़ी संख्या में युवा सचिवालय परिसर के पास इकट्ठा हुए और केंद्र शासित प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान खासकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू को लेकर नाराजगी जताई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नाक के नीचे जम्मू के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और संवैधानिक संस्थानों का दुरुपयोग एक खास ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
संघर्ष समिति के संयोजक, कर्नल (रिटायर्ड) सुखवीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पारदर्शिता से कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत दखल देकर ‘खराब’ एडमिशन प्रक्रिया को रद्द करने और एक निष्पक्ष सिस्टम बहाल करने की मांग की। बजरंग दल के अध्यक्ष राकेश बजरंगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भी MBBS एडमिशन विवाद को लेकर बस स्टैंड पर विरोध प्रदर्शन किया और श्राइन बोर्ड का पुतला जलाया।
जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग पर क्या बोले उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला से जब भाजपा के सीनियर नेता और विधायक शाम लाल शर्मा की जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग के बारे में पूछा गया, तो सीएम ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भाजपा को ऐसा करने से किसने रोका है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अलग करके लद्दाख को पहले ही बर्बाद कर दिया है। अब, अगर वे जम्मू को अलग राज्य बनाना चाहते हैं तो उन्हें कौन रोक रहा है। उन्हें यह 2019 में ही कर देना चाहिए था जब वे यह सब (आर्टिकल 370 हटाना और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटना) कर रहे थे।’

