देहरादून: उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के 120 वर्ग किमी इलाके में फैले 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने पर विचार कर रही है। यह मांग कुछ संतों सहित गंगा सभा ने उठाई है, जो हरिद्वार के मुख्य हर-की-पौड़ी घाट के रखरखाव की देखरेख करती है। इसके अलावा राज्य सरकार ऋषिकेश और हरिद्वार को ‘सनातन पवित्र शहर’ घोषित करने की भी योजना बना रही है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह प्रक्रिया अर्ध कुंभ से शुरू हो सकती है, जो 14 जनवरी, 2027 को मकर संक्रांति के मौके पर शुरू होने वाला है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय और अंग्रेजों के बीच 1916 में हुए समझौते की विस्तृत जानकारी निकालना शुरू कर दिया है। मालवीय गंगा सभा के पहले अध्यक्ष थे। 1916 के समझौते का मकसद गंगा के लगातार बहाव को बनाए रखना और इस तीर्थ शहर की पवित्रता को बनाए रखना था, जिसमें गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के आने पर रोक शामिल थी।
इसमें यह भी कहा गया था कि गैर-हिंदू दोनों धार्मिक शहरों (ऋषिकेश और हरिद्वार) में स्थायी रूप से नहीं रह सकते थे, और वे सिर्फ काम के लिए आ सकते थे और काम पूरा होने के बाद वापस लौट जाएंगे। सूत्रों ने पुष्टि की है कि राज्य सरकार ‘मूल समझौते के प्रावधानों को बहाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।’
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा?
इस मामले पर बात करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘हमारी सरकार देवभूमि की अनोखी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। यह हिमालयी राज्य सनातन धर्म मानने वालों के लिए आस्था का केंद्र है।’
उन्होंने आगे कहा कि ‘हरिद्वार और ऋषिकेश आस्था के प्रमुख केंद्र हैं’, और दोनों जगहों को ‘सनातन शहर’ घोषित करने पर विचार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने पहले कहा था, ‘हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखने के लिए, पूरे कुंभ मेले और हरिद्वार शहर को गैर-हिंदुओं के लिए नो-एंट्री जोन घोषित किया जाना चाहिए, और उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। हरिद्वार और ऋषिकेश में सभी नदी किनारे उनके लिए प्रतिबंधित होने चाहिए।’
हालांकि, सोमवार को गौतम ने बताया कि उन्होंने यह मांग विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष (हरिद्वार) के तौर पर की थी, और यह भी कहा कि ‘गंगा सभा ने इस पर कोई प्रस्ताव पास नहीं किया है।’
हालांकि गंगा सभा के जनरल सेक्रेटरी तन्मय वशिष्ठ ने इस संवेदनशील मामले पर कोई पक्का जवाब नहीं दिया, लेकिन इसके पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने कहा कि वह ‘इस मांग के पक्ष में नहीं हैं।’
त्रिपाठी ने कहा, ‘हरिद्वार नगर पालिका के नियमों के अनुसार, सरकारी ड्यूटी पर तैनात लोगों को छोड़कर, गैर-हिंदुओं का हर-की-पौड़ी इलाके में प्रवेश वर्जित है। लेकिन व्यक्तिगत रूप से, मैं ऐसे किसी भी बैन के पक्ष में नहीं हूं।’
‘क्या बीजेपी-आरएसएस मदन मोहन मालवीय से बड़े हिंदू हैं’
इस बीच, हरिद्वार के कई निवासियों ने इस मांग पर आपत्ति जताई। टीओआई के अनुसार एक वकील सुधांशु द्विवेदी ने कहा, ‘पूरे कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाना न तो संभव है और न ही सही है।’ ऐसे ही रिटायर्ड हाइड्रल डिपार्टमेंट के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश चंद्र ने कहा, ‘इस तरह के भेदभाव से हमारे धर्म की उदार छवि पर बुरा असर पड़ेगा।’
राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी है। पूरी तरह से बैन का विरोध करते हुए, कांग्रेस के पूर्व नगर पार्षद अशोक शर्मा ने कहा, ‘क्या बीजेपी-आरएसएस मदन मोहन मालवीय से बड़े हिंदू हैं, जिन्होंने सिर्फ हर-की-पौड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने की मांग की थी?’
दूसरी ओर बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष (हरिद्वार) संदीप गोयल ने कहा, ‘यह मांग हमारी पार्टी की लाइन नहीं है।’

