वॉशिंगटनः भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते ने न केवल आर्थिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी एक बड़ा संदेश दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा साझा किए गए भारत के आधिकारिक मानचित्र ने चीन और पाकिस्तान के ‘झूठे दावों’ की नींव हिला दी है। इस नक्शे में पूरे जम्मू-कश्मीर (पीओके सहित) और अक्साई चिन को बिना किसी विवादित रेखा के भारत का अभिन्न अंग दर्शाया गया है।
यूएसटीआर ने अपने एक्स हैंडल पर साझा पोस्ट में लिखा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत में नए बाजार खुलेंगे। पोस्ट के साथ जारी मानचित्र ने खासा ध्यान खींचा है, क्योंकि अमेरिका की ओर से पहली बार इतनी साफ और बिना शर्त प्रस्तुति देखी गई है, जिसे भारत की पूर्ण क्षेत्रीय अखंडता की मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान और चीन लगातार भारत की सीमाओं को लेकर झूठे और विवादास्पद दावे करते रहे हैं। पाकिस्तान ने साल 2020 में जारी अपने तथाकथित राजनीतिक नक्शे में पीओके, लद्दाख के कुछ हिस्सों, जूनागढ़, मनावदर और सर क्रीक को अपना बताया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। वहीं, चीन ने 2023 में अपने ‘स्टैंडर्ड मैप’ में अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ और अक्साई चिन को अपना हिस्सा दिखाया था। भारत ने तब भी साफ कहा था कि ऐसे नक्शे जमीनी हकीकत नहीं बदलते।
भारत का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक और अविभाज्य हिस्सा है और इसके लिए किसी बाहरी मान्यता की जरूरत नहीं है। फिर भी, अमेरिकी सरकारी मंच से इस तरह का मानचित्र सामने आना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि पहले अमेरिकी एजेंसियों द्वारा जारी नक्शों में अक्सर पीओके और अक्साई चिन को लेकर अलग-अलग टिप्पणियां या सीमांकन दिखाए जाते रहे हैं।
अमेरिका द्वारा जारी यह मानचित्र पाकिस्तान और चीन-दोनों के दावों पर सीधा सवाल खड़ा करता है। खास बात यह है कि इस नक्शे में पीओके या अक्साई चिन को लेकर न तो कोई बिंदीदार रेखा है और न ही ‘विवादित क्षेत्र’ जैसा कोई संकेत। इसे अमेरिका की ओर से एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम 7 फरवरी 2026 को घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे से भी जुड़ा है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले व्यापार तनाव के दौर में 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। बदले में भारत ने भी अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों, जैसे ट्री नट्स, सूखे अनाज, ज्वार, ताजे और प्रोसेस्ड फलों के लिए बाजार पहुंच आसान करने, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई है।

