नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ऐलान किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हमले किए हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, जबकि जानबूझकर महत्वपूर्ण उर्जा ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और वैश्विक बाजार में ईरान के कच्चे तेल की अधिकांश खेपों का संचालन यहां से होता है। हालांकि हमले में तेल के बुनियादी ढांचे को सीधे निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हार्मुज) से जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो उसकी ऊर्जा सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान की आर्थिक लाइफलाइन है खार्ग द्वीप
खार्ग द्वीप को लंबे समय से ईरान की आर्थिक लाइफलाइन माना जाता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र पर किसी भी तरह के लगातार हमले से देश के तेल निर्यात ठप हो सकते हैं और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में, बुशहर बंदरगाह शहर के पास, ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। आकार में छोटा होने के बावजूद, यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे अक्सर ईरान की ‘तेल जीवनरेखा’ (oil lifeline) कहा जाता है। खार्ग देश के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत संभालता है। अबूजर, फोरोजान और दुरूद जैसे प्रमुख अपतटीय क्षेत्रों से तेल को समुद्र के नीचे पाइपलाइनों के माध्यम से द्वीप तक पहुँचाया जाता है, जहाँ इसे संग्रहित किया जाता है और बड़े-बड़े टैंकरों में लादा जाता है जो मुख्य रूप से एशियाई बाजारों के लिए रवाना होते हैं।
इसकी भौगोलिक स्थिति इसे इस भूमिका के लिए और महत्वपूर्ण बनाती है। द्वीप के आसपास का पानी इतना गहरा है कि इसमें सुपरटैंकर चल सकते हैं, जबकि खाड़ी के उथले तट पर स्थित कई ईरानी बंदरगाह ऐसा नहीं कर सकते। दशकों से ईरान ने खार्ग को दुनिया के सबसे बड़े तेल टर्मिनलों में से एक बना दिया है। अपनी अधिकतम क्षमता पर, यहाँ प्रतिदिन 70 लाख बैरल तक तेल लोड हो सकता हैं, हालाँकि वर्तमान निर्यात लगभग 16 लाख बैरल प्रतिदिन है।
ईरान के निर्यात संबंधी बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा इसी एक द्वीप पर केंद्रित होने के कारण विश्लेषक इसे लंबे समय से तेहरान के लिए एक गंभीर कमजोरी भी मानते रहे हैं। यहां किसी भी गंभीर नुकसान से ईरान के तेल राजस्व का अधिकांश हिस्सा तुरंत ठप हो सकता है, जो देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम जरिया है। साथ ही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए भी धन का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
ट्रंप का दावा और ईरान की धमकी
ट्रंप के खार्ग द्वीप पर हमले के दावे के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी अधिकारियों ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आगे किसी भी तरह के हमले से पूरे क्षेत्र में तेल और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे का विनाश हो सकता है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल और ऊर्जा ढांचे पर हमला किया गया तो वह अमेरिका के साथ सहयोग करने वाली तेल कंपनियों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सोशल ट्रुथ’ पर पोस्ट किया, ‘मेरे निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी हमलों में से एक को अंजाम दिया। ईरान के सबसे अहम ठिकाने खर्ग द्वीप पर मौजूद हर सैन्य ठिकाने को पूरी तरह से तबाह कर दिया। हमारे हथियार दुनिया के अब तक के सबसे शक्तिशाली और आधुनिक हथियार हैं, लेकिन इंसानियत के नाते मैंने द्वीप पर मौजूद तेल के बुनियादी ढांचे को तबाह न करने का फैसला किया है।’
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे चेतावनी दी कि अगर ईरान क्षेत्र में समुद्री यातायात में बाधा डालता है तो यह फैसला बदला जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, ‘अगर ईरान या कोई और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से जहाजों के सुरक्षित और बेरोकटोक गुजरने में कोई भी रुकावट डालता है, तो मैं तुरंत अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करूंगा।’
ट्रंप ने अपनी चेतावनी में कहा कि अमेरिका के हमलों से खुद का बचाव करने की ईरान की क्षमता बहुत ही सीमित है। उन्होंने ‘ट्रुथ’ पोस्ट में लिखा, ‘अपने पहले कार्यकाल के दौरान और अभी भी, मैंने हमारी सेना को दुनिया की सबसे घातक, सबसे शक्तिशाली और सबसे प्रभावी सैन्य शक्ति के रूप में खड़ा किया है। ईरान के पास हमारी किसी भी कार्रवाई से बचाव करने की कोई क्षमता नहीं है। वे इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकते।’

