पटनाः उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में सब कुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा है। बीते महीने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद एक बार फिर से हलचल दिखाई दे रही है। दरअसल पार्टी के तीन विधायकों ने भाजपा के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कीं। इसके अलावा व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दिया है।
इससे पहले बुधवार, 24 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा आयोजित एक लिट्टी चोखा पार्टी में तीनों विधायक शामिल नहीं हुए थे। इससे अटकलों का बाजार एक बार फिर से गर्म हो गया है कि क्या पार्टी में टूट की संभावना दिखाई दे रही है?
तीन विधायकों ने नितिन नबीन से की मुलाकात
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कुल चार विधायक हैं। इनमें से तीन विधायक रामेश्वर कुमार महतो, माधव आनंद और आनंद सिंह पार्टी द्वारा आयोजित भोज में शामिल नहीं हुए थे और नितिन नबीन से मुलाकात की। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा रोहतास जिले की सासाराम सीट से विधायक हैं।
रामेश्वर महतो सीतामढ़ी जिले की बाजपट्टी विधानसभा से विधायक हैं। वहीं, माधव आनंद मधुबनी विधानसभा से और आलोक सिंह रोहतास जिले की दिनारा विधानसभा से विधायक हैं।
हालांकि पार्टी द्वारा आयोजित बैठक में इन विधायकों के शामिल न होने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। रामेश्वर कुमार महतो ने एक्स पर एक पोस्ट की जिसमें भाजपा के नवीन कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात कर बधाई देने की बात कही गई है। एक्स पर लिखे पोस्ट में रामेश्वर महतो ने लिखा “आज भारतीय जनता पार्टी (@BJP4India) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष माननीय श्री @NitinNabin जी से उनके पदभार ग्रहण के उपरांत औपचारिक एवं शिष्टाचार भेंट कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मधुबनी विधानसभा के माननीय विधायक श्री @MAnandOfficial जी, दिनारा विधानसभा से माननीय विधायक श्री आलोक सिंह जी भी उपस्थित रहे। हम सभी ने उनके नए दायित्व के सफल एवं प्रभावी निर्वहन हेतु शुभेच्छाएँ व्यक्त कीं।”
इसी तरह की पोस्ट माधव आनंद ने भी की। ऐसे में चार में से इन तीन विधायकों के पार्टी भोज में शामिल न होने से सियासत गर्मा गई और अटकलों का बाजार गर्म है कि कहीं ये विधायक पार्टी से नाराज तो नहीं चल रहे। गौरतलब है कि बीते महीने हुए शपथ ग्रहण समारोह में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली थी। दीपक प्रकाश ने चुनाव नहीं लड़ा था और अचानक से मंत्री पद की शपथ ली थी जो कि काफी चर्चा का विषय बना। इसके अलावा दीपक प्रकाश एमएलसी भी नहीं हैं। ऐसे में अब उन्हें छह महीने के अंदर एमएलसी या फिर किसी विधासभा सीट से चुनाव लड़ना होगा।
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में बड़ी टूट
एबीपी की खबर के मुताबिक, 25 दिसंबर को पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस्तीफा दिया है। इनमें व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता शामिल हैं। इससे पहले नवंबर महीने के आखिर में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जीतेंद्र नाथ पटेल समेत पार्टी के राज्य प्रमुख महेंद्र कुशवाहा, प्रदेश महासचिव राहुल कुमार ने भी इस्तीफा दिया था। सभी नेताओं ने दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी और परिवारवाद का आरोप लगाया था।
ऐसे में पार्टी में एक बार फिर से फूट की आशंका दिखाई दे रही है। क्या ये तीनों विधायक भी पार्टी का दामन छोड़कर किसी अन्य पार्टी का दामन थामेंगे, ऐसी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

