Friday, March 20, 2026
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उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा था कि कुलदीप सेंगर पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। कोर्ट ने जमानत देते हुए आदेश दिया कि जब तक सेंगर की सजा के खिलाफ अपील पेंडिंग है, तब तक सजा का निलंबन लागू रहेगा।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप केस के सिलसिले में सजा पाए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगा दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस ए जी मसीह की बेंच ने सेंगर की सजा पर निलंबन पर सवाल उठाते हुए पूर्व विधायक को चार हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी के आखिरी हफ्ते के लिए तय कर दी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में एक महिला के बलात्कार (तब पीड़िता नाबालिग थी) के मामले में दोषी पाए गए सेंगर को मिली उम्र कैद की सजा को निलंबित करते हुए पिछले हफ्ते जमानत दे दी थी। हालांकि, इस जमानत के बावजूद सेंगर जेल में ही रहते क्योंकि वह इसी पीड़ित महिला के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में साथ चल रही 10 साल सजा भी काट रहे है। दिल्ली हाई कोर्ट के पिछले हफ्ते आए फैसले के बाद देश भर में इसे लेकर सवाल उठ रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

बहरहाल, चीफ जस्टिस कांत ने सोमवार को सुनवाई में कहा, ‘फिलहाल, हम आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। आम तौर पर सिद्धांत यह है कि एक बार जब कोई व्यक्ति बाहर आ जाता है, तो कोर्ट उसकी आजादी नहीं छीनता।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन यहां स्थिति अलग है क्योंकि वह दूसरे मामले में जेल में है।’

कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता को भी अपनी याचिका के साथ मामले में दखल देने की इजाजत दे दी है।

इससे पहले CBI ने दिल्ली हाई कोर्ट के रेप केस में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जांच एजेंसी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने घटना को ‘बहुत भयानक मामला’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की अपील की।

मेहता ने कहा, ‘यह एक बच्ची के साथ रेप का भयानक मामला है। IPC की धारा 376 और POCSO एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत आरोप तय किए गए हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि बच्ची 16 साल से कम उम्र की थी, 15 साल और 10 महीने। इस सजा के खिलाफ अपील पेंडिंग है।’

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला क्या था?

पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर शामिल थे, उन्होंने आदेश सुनाते हुए कहा था कि सेंगर पहले ही सात साल और पांच महीने जेल में बिता चुके हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक सेंगर की सजा के खिलाफ अपील पेंडिंग है, तब तक सजा का निलंबन लागू रहेगा।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बावजूद सेंगर को जेल में रहना पड़ता क्योंकि वह केस में पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत से जुड़े एक अलग मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं। उस मामले में सेंगर की अपील, साथ ही सजा के निलंबन की मांग वाली याचिका अभी लंबित है।

हाई कोर्ट ने सेंगर को जमानत देते समय कई शर्तें लगाईं थी, जिसमें 15 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड, दिल्ली में पीड़ित के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में न जाने का निर्देश, और पीड़ित या उसकी मां को धमकी न देने जैसी बातें कही गई थी। दिसंबर 2019 में, पूर्व BJP विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

उन्नाव रेप केस की पूरी टाइमलाइन

  • 4 जून 2017- कुलदीप सेंगर तब उन्नाव से भाजपा विधायक थे। एक नाबालिग लड़की उनसे नौकरी के सिलसिले में मिलने गई थी। उसके साथ बलात्कार हुआ।
  • अगस्त 2017- मामले के सामने आने के बाद एफआईआर में सेंगर का नाम शामिल किया गया।
  • फरवरी से अगस्त 2019- मामला जिला अदालत पहुंचा। इसके बाद नाबालिग के पिता के खिलाफ भी शिकायत कराई गई और सेंगर के कहने पर उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज करते हुए पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस हिरासत में ही पिता की मौत हुई। मामले को अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया गया।
  • दिसंबर 2019- सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई। पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में भी सेंगर को दोषी पाया गया।
  • सनसनीखेज रेप केस और पीड़िता और दूसरों की जान को खतरे को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त, 2019 को निर्देश दिया कि रेप पीड़िता, उसकी मां, परिवार के दूसरे सदस्यों और उनके वकील को CRPF सुरक्षा दी जाए।
  • मार्च 2020 में सेंगर को रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की कड़ी कैद की सज़ा सुनाई गई थी। साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या में भूमिका के लिए सेंगर के भाई को भी 10 साल जेल की सजा सुनाई थी।
  • 23 दिसंबर- 2025- दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा को निलंबित करते हुए जमानत दी। इसके बाद 26 दिसंबर 2025 को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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