Friday, March 20, 2026
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केंद्र ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” करने की मांग की थी। इससे पहले 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियों और संशोधनों का सुझाव देते हुए इसे वापस भेज दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब राष्ट्रपति की सिफारिश पर “केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026” को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत केरल विधानसभा के पास उसकी राय के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद ही केंद्र सरकार विधेयक को संसद में पेश करेगी।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने इस फैसले को लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने वाला कदम बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कैबिनेट में लिए गए अहम फैसलों में सबसे प्रमुख निर्णय केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करना है। उन्होंने बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद से ही यह मांग उठती रही है कि राज्य का आधिकारिक नाम उसकी स्थानीय भाषा के अनुरूप होना चाहिए। मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है, इसलिए लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि आधिकारिक रूप से भी राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए।

गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” करने की मांग की थी। इससे पहले 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियों और संशोधनों का सुझाव देते हुए इसे वापस भेज दिया था। संशोधित प्रस्ताव दोबारा पारित कर केंद्र को भेजा गया, जिस पर अब कैबिनेट ने सहमति दे दी है।

प्रस्ताव में तर्क दिया गया है कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम ‘केरलम’ है और 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही एकीकृत मलयालम भाषी राज्य की पहचान इसी नाम से रही है। वर्तमान में संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है, इसलिए नाम परिवर्तन के लिए प्रथम अनुसूची में संशोधन आवश्यक होगा।

संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी राज्य की सीमाओं, क्षेत्रफल या नाम में परिवर्तन का अधिकार देता है। हालांकि, ऐसा विधेयक संसद में तभी पेश किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की सिफारिश हो और संबंधित राज्य की विधानसभा से उस पर राय मांगी गई हो। विधानसभा को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी राय देनी होती है। उसके बाद संसद विधेयक पर विचार कर उसे पारित कर सकती है।

इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विस्तृत विचार के बाद गृह मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से कैबिनेट नोट तैयार किया, जिसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि विभाग और विधायी विभाग को भेजा गया। दोनों विभागों ने प्रस्ताव पर सहमति जताई।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी चुनाव आयोग ने नहीं की है। संसद से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही ‘केरल’ का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ हो सकेगा।

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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