Friday, March 20, 2026
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ट्रंप ने कहा- एक बार और खार्ग द्वीप पर कर सकते हैं हमला, ईरान ने दी चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार सेना ने द्वीप पर करीब 90 सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए, लेकिन तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान अब समझौता करना चाहता है। हालांकि उन्होंने कहा कि तेहरान जिस तरह का समझौता चाहता है, उसे वह स्वीकार नहीं करेंगे।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के तेल और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। शनिवार ट्रंप ने दावा किया कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान की आर्थिक लाइफलाइन खार्ग द्वीप पर मौजूद कई लक्ष्यों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। और जरूरत पड़ने पर वहां फिर से हमला किया जा सकता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने द्वीप को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, हालांकि ऊर्जा ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया क्योंकि उसे दोबारा खड़ा करने में वर्षों लग सकते हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार सेना ने द्वीप पर करीब 90 सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए, लेकिन तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान अब समझौता करना चाहता है। हालांकि उन्होंने कहा कि तेहरान जिस तरह का समझौता चाहता है, उसे वह स्वीकार नहीं करेंगे।

ईरान ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर देश के तेल या ऊर्जा ढांचे पर हमला किया गया तो इसका जवाब पूरे क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों से जुड़े ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर दिया जाएगा।

ईरान की सैन्य कमान खातम अल-अनबिया मुख्यालय ने भी कहा कि देश के तेल, आर्थिक या ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश का तत्काल जवाब दिया जाएगा। उनके अनुसार अमेरिकी हितों से जुड़े क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को “पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।”

ईरान का कहना है कि खार्ग द्वीप पर हालिया हमले संयुक्त अरब अमीरात के दो स्थानों से किए गए। इसके साथ ही तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ बंदरगाहों के आसपास रहने वाले लोगों को वहां से दूर रहने की चेतावनी भी दी।

हालांकि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गश ने ईरान के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यूएई को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और देश ने इस युद्ध को रोकने के लिए आखिरी क्षण तक मध्यस्थता की कोशिश की थी।

गर्गश ने कहा कि यूएई को आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन वह संयम बरतते हुए क्षेत्र में शांति और समाधान की कोशिश कर रहा है।

उधर, खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों के कुछ ही घंटों बाद यूएई के तटीय शहर फुजैरा के पास एक बड़े ऊर्जा प्रतिष्ठान की दिशा में काला धुआं उठता देखा गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह आग एक ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद उसके मलबे के गिरने से लगी।

यूएई रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निपट रही है।

युद्ध के दौरान ईरान ने खाड़ी के कई देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। हालांकि तेहरान का कहना है कि उसका निशाना केवल अमेरिकी ठिकाने हैं, लेकिन कई जगह नागरिक ढांचे के पास भी हमले या उनके प्रयास देखे गए हैं।

क्यों इतना महत्वपूर्ण है खार्ग द्वीप?

फारस की खाड़ी में ईरानी तट से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित खार्ग द्वीप देश की तेल अर्थव्यवस्था का सबसे अहम केंद्र है। यह द्वीप ईरान के लिए केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक नस है। लगभग आठ किलोमीटर लंबे इस छोटे से द्वीप से ईरान के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है।

समुद्र के भीतर पाइपलाइनों के जरिए अबूज़र, फोरूजान और दुरूद जैसे बड़े तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल यहां लाया जाता है। इसके बाद विशाल टैंकरों में भरकर इसे मुख्य रूप से एशियाई बाजारों में भेजा जाता है।

द्वीप के आसपास समुद्र की गहराई इतनी है कि यहां दुनिया के सबसे बड़े सुपरटैंकर भी आसानी से लग सकते हैं। यही वजह है कि दशकों में इसे दुनिया के सबसे बड़े तेल टर्मिनलों में विकसित किया गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक यहां से अधिकतम क्षमता पर प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल लोड किया जा सकता है, हालांकि वर्तमान निर्यात करीब 16 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खार्ग द्वीप के तेल ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचता है तो ईरान का अधिकांश तेल निर्यात तुरंत रुक सकता है। इससे न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित होगा।

इसका एक बड़ा कारण फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन होता है।

युद्ध शुरू होने के बाद इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के कई शहरों पर हमले किए गए थे। ईरान ने इसके जवाब में मिसाइलों और ड्रोन से अमेरिकी तथा इजराइली ठिकानों को निशाना बनाया।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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