वॉशिंटनः पश्चिम एशिया जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया टैरिफ बम फोड़ दिया है। ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेशी दवाओं और धातु उत्पादों पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। नए आदेश के मुताबिक पेटेंट दवाओं पर अब 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाएगा, जबकि स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे धातु उत्पादों पर भी भारी टैक्स लागू किया गया है।
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि विदेशी आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सैन्य तैयारी के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा कर रही है। ट्रंप ने कहा कि दवाइयां इतनी मात्रा और परिस्थितियों में आयात की जा रही हैं कि वे देश की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता को जोखिम बताते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
विदेशी दवाओं को लेकर क्या आदेश जारी किया गया?
नई नीति के तहत अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत एड वैलोरेम शुल्क लगेगा। हालांकि, जो कंपनियां उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट करने का वादा करेंगी, उन्हें शुरुआती तौर पर 20 प्रतिशत शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड जैसे प्रमुख साझेदारों से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत की रियायती दर लागू होगी, जबकि अनाथ दवाएं, परमाणु दवाएं और जीन थेरेपी जैसी श्रेणियों को छूट दी गई है। फिलहाल जेनेरिक दवाएं और बायोसिमिलर्स इस दायरे से बाहर रखे गए हैं।
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व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह कदम आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने और घरेलू फार्मास्युटिकल उत्पादन को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि फोकस सिर्फ टैरिफ बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर है। उन्होंने यह भी बताया कि कई कंपनियां पहले ही अमेरिका में निवेश बढ़ा रही हैं और नए फार्मा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।
स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 50% टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने ना सिर्फ विदेशी दवाओं बल्कि धातुओं पर भी टैरिफ का ऐलान किया है। नए आदेश के तहत ज्यादातर स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा, जबकि उनसे बने कुछ अन्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। खास बात यह है कि अब टैरिफ “पूरे कस्टम मूल्य” के आधार पर वसूला जाएगा, ताकि कीमतों में हेरफेर कर टैक्स बचाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।
प्रशासन का कहना है कि पहले निर्यातक कंपनियां कीमतों को कृत्रिम रूप से कम दिखाकर टैरिफ से बचने की कोशिश करती थीं, जिसे नई व्यवस्था खत्म करेगी। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा अधिक होगी, उन पर सीधे 25 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जाएगा, जबकि कम धातु वाले उत्पादों को आंशिक छूट मिल सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाकर ट्रंप ने बढ़ाया टैरिफ
यह कदम ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत उठाया गया है, जो राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर प्रतिबंध या शुल्क लगाने की अनुमति देता है। इसी प्रावधान का इस्तेमाल पहले स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ लगाने के लिए किया जा चुका है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले के टैरिफ के बाद अमेरिका में स्टील उत्पादन क्षमता का उपयोग 77.2 प्रतिशत और एल्युमिनियम का 50.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। प्रशासन अब इसे 80 प्रतिशत के करीब ले जाना चाहता है, ताकि घरेलू उद्योग और मजबूत हो सके।
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि इन टैरिफ का आम उपभोक्ताओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और खुदरा कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। धातुओं पर नए टैरिफ 6 अप्रैल से लागू होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों का वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है, खासकर भारत और चीन जैसे देशों पर, जो जेनेरिक दवाओं और एपीआई के बड़े आपूर्तिकर्ता हैं। फिलहाल जेनेरिक दवाओं को छूट दी गई है, लेकिन भविष्य में नीति सख्त होने पर दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
–आईएएनएस इनपुट के साथ

