शनिवार, मार्च 21, 2026
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ट्रम्प का ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ का ऐलान, भारत पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ!

आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात और इराक शामिल हैं। ऐसे में अमेरिकी फैसले का असर इन देशों के साथ-साथ उन सभी पर पड़ सकता है, जिनका ईरान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यापारिक रिश्ता है।

वॉशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को उन सभी देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है जो ईरान के साथ व्यापार कर रहे हैं। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रहे हिंसक दमन के जवाब में ट्रंप ने यह सख्त कदम उठाया है।

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस आदेश को अंतिम और निर्णायक बताते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश को अब अमेरिका के साथ होने वाले अपने व्यापार पर भारी कीमत चुकानी होगी।

भारत पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

ट्रंप के इस फैसले का सीधा असर चीन, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और इराक जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझीदारों पर पड़ेगा। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और मजबूत व्यापारिक संबंध रहे हैं।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, हाल के वर्षों में भारत ईरान के शीर्ष पांच व्यापारिक साझेदारों में रहा है। भारत ईरान को बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल, दवाइयां, सॉफ्ट ड्रिंक्स, दालें और बोनलेस भैंस का मांस निर्यात करता है। वहीं ईरान से भारत सैचुरेटेड मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन, सेब, तरलीकृत प्रोपेन, सूखी खजूर, रासायनिक उत्पाद और बादाम जैसे सामान आयात करता है।

हालांकि भारत-ईरान व्यापार में हाल के वर्षों में गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2022-23 में जहां व्यापार 21.76 प्रतिशत बढ़ा था, वहीं 2023-24 में इसमें 20.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 2024-25 में यह गिरावट और बढ़कर 8.89 प्रतिशत हो गई। फिलहाल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 अरब डॉलर पर आ गया है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 44 करोड़ डॉलर का आयात किया।

नए आदेश के बाद भारत पर कुल लेवी यानी शुल्क का बोझ बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसमें पहले से लागू 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और रूसी कच्चे तेल के आयात पर लगा 25% अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। इसके अलावा, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘चाबहार पोर्ट’ प्रोजेक्ट पर भी इसके असर की आशंका जताई जा रही है।

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर रहा अमेरिका

आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ अमेरिका अब ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने सोमवार को पुष्टि की कि तेहरान के खिलाफ ‘हवाई हमले’ उन कई विकल्पों में से एक हैं जिन पर राष्ट्रपति विचार कर रहे हैं।

पिछले साल इजरायल के साथ 12 दिवसीय युद्ध और जून में ईरान के परमाणु केंद्रों पर अमेरिकी बमबारी के बाद दोनों देशों के बीच संबंध पहले ही अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। वहीं, मानवाधिकार समूह ‘HRANA’ के अनुसार, 28 दिसंबर से जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक 599 लोगों की मौत हो चुकी है।

कूटनीति का रास्ता भी अपना रहा अमेरिका

तनाव के इस चरम दौर में कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान के अधिकारी ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ निजी तौर पर संपर्क में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान सार्वजनिक रूप से चाहे जो भी कहे, लेकिन निजी बातचीत में उसका रुख काफी नरम दिखाई दे रहा है।

ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि वे ईरान के नेताओं से मिल सकते हैं, बशर्ते तेहरान बातचीत के लिए तैयार हो। फिलहाल, 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान का शासन अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक और बाहरी चुनौती का सामना कर रहा है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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