नई दिल्ली: ट्रेनों में खानपान की गुणवत्ता को लेकर यात्रियों की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। एक्सप्रेस ट्रेनों से लेकर प्रीमियम सेवाओं तक, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और अनधिकृत वेंडरों की समस्या बार-बार उठती रही है। अब इन चुनौतियों से निपटने के लिए रेलवे हाई-टेक समाधान अपना रहा है।
सरकार ने गुरुवार संसद में बताया कि क्यूआर कोड वाले आईडी कार्ड और डिजिटल रूप से ट्रैक किए जाने वाले फूड पैकेट्स की व्यवस्था से अनधिकृत वेंडिंग पर लगाम लगाने और यात्रियों तक वेरिफाइड कैटरिंग सेवाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने बताया कि नई व्यवस्था से रेलवे की कैटरिंग सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है।
लोकसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ट्रेनों में केवल अधिकृत विक्रेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अब प्रत्येक वेंडर, सहायक और कर्मचारी के लिए क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र (ID Card) अनिवार्य कर दिया गया है। इस तकनीक की मदद से किसी भी कर्मचारी की पहचान को तुरंत सत्यापित किया जा सकेगा।
हाइजीन और क्वालिटी के लिए ‘बेस किचन’ मॉडल
खानपान की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए रेलवे ने कई कड़े कदम उठाए हैं। अब चिन्हित स्थानों पर आधुनिक ‘बेस किचन’ स्थापित किए गए हैं, जहाँ से सीधे भोजन की आपूर्ति की जाती है। इन रसोईघरों में खाना पकाने की प्रक्रिया पर पैनी नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि भोजन तैयार करने में केवल नामी ब्रांड के कच्चे माल (जैसे तेल, आटा, दालें और डेयरी उत्पाद) का ही उपयोग किया जा रहा है।
FSSAI सर्टिफिकेशन और थर्ड-पार्टी ऑडिट
खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी कैटरिंग इकाइयों के पास भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का प्रमाणन होना अनिवार्य किया गया है। निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से भोजन के नमूनों की जांच की जाती है। इसके अलावा, पैंट्री कारों और बेस किचन की स्वच्छता परखने के लिए ‘थर्ड-पार्टी ऑडिट’ और ‘ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण’ भी आयोजित किए जाते हैं, ताकि यात्रियों से सीधा फीडबैक मिल सके।
यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए आईआरसीटीसी द्वारा खानपान कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे उनके कौशल और व्यवहार में सुधार लाया जा सके।

