नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तहत होने वाली वोटिंग से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और निर्वाचन आयोग में तल्खी बढ़ गई है। एक और जहां तृणमूल की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मीटिंग के दौरान असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया गया। वहीं, दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की ओर से भी टीएमसी के लिए सख्त हिदायत वाला एक ट्वीट आया।
आयोग की ओर से एक्स पर किए गए एक पोस्ट में कहा गया, ‘चुनाव आयोग की ओर से तृणमूल कांग्रेस को दो टूक…पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।’
इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के इशारे पर चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल और टीएमसी को टारगेट कर रहा है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि आयोग ने पीछे के दरवाजे से राज्य प्रशासन और पुलिस पर कब्जा कर लिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने ‘गेट लॉस्ट’ कह दिया: तृणमूल
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने बुधवार सुबह चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई आरोप लगाए। डेरेक ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।
डेरेक ओब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया।
तृणमूल सांसद ने कहा कि यह अपने आप में गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
टीएमसी नेता के मुताबिक बैठक सुबह करीब 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही खत्म हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भाजपा से है।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। आरोपों के अनुसार जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर ‘गेट लॉस्ट’ कह दिया।
डेरेक ओब्रायन ने कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।
डेरेक ओब्रायन की ओर से ये भी कहा गया कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही उनलोगों से यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें अपनी पूरी बात बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।
बताते चलें कि बंगाल में इस बार दो चरण में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को और फिर दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होंगे।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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