हैदराबादः मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में शनिवार को तेलंगाना में प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 130 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसे राज्य में अब तक का सबसे बड़ा माओवादी सरेंडर माना जा रहा है।
हैदराबाद स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में इन माओवादियों ने अपने 124 हथियार भी पुलिस को सौंप दिए। इस मौके पर राज्य के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, इस आत्मसमर्पण के साथ माओवादी संगठन की सशस्त्र इकाई पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) को बड़ा झटका लगा है। इसे सीपीआई एम की तीन प्रमुख ताकतों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता था और अब यह लगभग निष्क्रिय हो गई है।
आत्मसमर्पण करने वालों में तीन स्टेट कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 10 डिविजनल कमेटी सदस्य, 40 एरिया कमेटी सदस्य और 76 पार्टी सदस्य शामिल हैं।
सरेंडर के दौरान माओवादियों ने एक लाइट मशीन गन, 31 एके-47 राइफल, 21 इंसास राइफल, 20 एसएलआर, 18 .303 राइफल और 33 अन्य हथियार पुलिस के हवाले किए। इसके अलावा विभिन्न कैलिबर के कुल 5,205 जिंदा कारतूस भी जमा कराए गए।
ज्यादातर माओवादी छत्तीसगढ़ से
आत्मसमर्पण करने वालों में 125 माओवादी छत्तीसगढ़ के हैं, जबकि चार तेलंगाना और एक आंध्र प्रदेश से है। इनमें पीएलजीए की पहली बटालियन के 42 सदस्य, तेलंगाना स्टेट कमेटी के 30, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 32, सेकेंड सीआरएस के 16 और सेंट्रल कमेटी सदस्यों के 10 स्टाफ शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इस आत्मसमर्पण के बाद प्रतिबंधित संगठन की तेलंगाना स्टेट कमेटी अब अस्तित्व में नहीं रह गई है।
डीजीपी शिवधर रेड्डी ने बताया कि पिछले चार-पांच महीनों में तेलंगाना पुलिस के सामने करीब 250 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं 2024 से अब तक कुल 721 कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश के विभिन्न हिस्सों में केवल सात सक्रिय भूमिगत माओवादी ही तेलंगाना से जुड़े हुए बचे हैं।
मुख्यमंत्री ने माओवादियों से की मुख्यधारा में लौटने की अपील
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने सभी बचे हुए माओवादियों, जिनमें सीपीआई (माओवादी) के महासचिव मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति भी शामिल हैं, से मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 31 मार्च तक देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और शेष माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए 20 दिनों का समय दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले छह वरिष्ठ माओवादियों ने 27 फरवरी को उनसे मुलाकात कर कहा था कि यदि केंद्र और राज्य सरकार कुछ भरोसा दे तो संगठन के सभी भूमिगत सदस्य हथियार डालने को तैयार हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर माओवादी नेतृत्व के प्रस्तावों से अवगत कराया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के प्रति सहानुभूति रखती है। कानून के दायरे में जिन मामलों को वापस लिया जा सकता है, उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति भी बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और उनके लिए दिए जाने वाले आर्थिक पैकेज को बढ़ाने पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

